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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द: संजय राउत बोले — 'महिला सशक्तीकरण के दावों से सीधा विरोधाभास'

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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द: संजय राउत बोले — 'महिला सशक्तीकरण के दावों से सीधा विरोधाभास'

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने को 'काला दिन' बताया और BJP पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया — एक ओर महिला शक्ति वंदन अधिनियम, दूसरी ओर महिला उम्मीदवार का नामांकन खारिज। झारखंड के परमल नाथवानी को 24 घंटे मिले, नटराजन को नहीं।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 10 जून को मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने को 'काला दिन' बताया।
राउत का आरोप — महिला शक्ति वंदन अधिनियम के दावों और नामांकन रद्द करने में सीधा विरोधाभास।
झारखंड से BJP उम्मीदवार परमल नाथवानी को नामांकन में खामी पर 24 घंटे का समय मिला, नटराजन को नहीं — राउत ने इसे दोहरा रवैया बताया।
राउत का दावा — नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं, केवल कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था।
PM मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल पर भी राउत ने विसंगतिपूर्ण शासन का आरोप लगाया।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने 10 जून को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज होने को 'काला दिन' करार दिया। राउत ने आरोप लगाया कि यह कदम सत्तारूढ़ दल के महिला सशक्तीकरण के दावों से सीधा विरोधाभास है।

मुख्य आरोप: दोहरा रवैया

राउत ने कहा, 'एक तरफ आप महिला शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिला सशक्तीकरण का दावा करते हैं, और दूसरी तरफ एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता का नामांकन रद्द कर देते हैं — यह महिला का सीधा अपमान है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।'

उन्होंने झारखंड से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार परमल नाथवानी के मामले से तुलना करते हुए कहा कि नाथवानी के नामांकन पत्र में खामियाँ होने के बावजूद वहाँ के रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें कमियाँ दूर करने के लिए 24 घंटे का समय दिया, जबकि नटराजन के मामले में यह नियम लागू नहीं किया गया।

नामांकन रद्द होने की पृष्ठभूमि

राउत ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उनके अनुसार, 'मैंने स्वयं पूरी वस्तुस्थिति समझने का प्रयास किया — उन्हें केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था, इससे अधिक कुछ नहीं।' गौरतलब है कि नटराजन एक जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं और विपक्षी गठबंधन की ओर से राज्यसभा के लिए नामित की गई थीं।

मोदी सरकार के 12 वर्ष पर प्रतिक्रिया

राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बारह वर्षों में एक दिन भी ऐसा नहीं रहा जब प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विसंगतिपूर्ण व्यवहार न किया हो।

न्यायतंत्र पर सवाल

राउत ने आगे कहा कि महिला राजनेताओं को सुनियोजित तरीके से राज्यसभा में आने से रोका जा रहा है, जबकि उन्हीं महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए महिला शक्ति वंदन अधिनियम लाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में न्याय के लिए मुख्य न्यायाधीश से उम्मीद करनी होगी, क्योंकि उनके अनुसार 'मौजूदा समय में न्यायतंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है।'

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्यसभा चुनावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की संयुक्त प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी कदम की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो रिटर्निंग ऑफिसर के विवेकाधिकार में असमानता एक प्रक्रियागत सवाल उठाती है जिसका जवाब चुनाव आयोग को देना होगा। हालाँकि, राउत के दावे अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं और नामांकन रद्द होने के आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं हुए हैं। महिला शक्ति वंदन अधिनियम को ढाल बनाकर विपक्ष का यह हमला उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जिसमें सत्ता पक्ष की नीतियों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को उजागर किया जाता है — लेकिन असली जवाबदेही तब तय होगी जब चुनाव आयोग इस पर अपना पक्ष रखे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन क्यों रद्द किया गया?
नामांकन रद्द होने के आधिकारिक कारण अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। संजय राउत का दावा है कि नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उन्हें केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था।
संजय राउत ने परमल नाथवानी का जिक्र क्यों किया?
राउत ने आरोप लगाया कि झारखंड से BJP उम्मीदवार परमल नाथवानी के नामांकन में खामियाँ होने पर रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें 24 घंटे सुधार का समय दिया, जबकि नटराजन के मामले में यह अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने इसे दोहरा मानदंड बताया।
महिला शक्ति वंदन अधिनियम और इस विवाद का क्या संबंध है?
राउत का तर्क है कि सत्तारूढ़ दल एक ओर महिला शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए महिला सशक्तीकरण का दावा करता है, और दूसरी ओर एक महिला उम्मीदवार का नामांकन रद्द करता है — जो उनके अनुसार सीधा विरोधाभास है।
शिवसेना (यूबीटी) ने इस मामले में आगे क्या कदम उठाने का संकेत दिया?
राउत ने मुख्य न्यायाधीश से न्याय की उम्मीद का सवाल उठाया, जो संभावित कानूनी कदम की ओर इशारा करता है। हालाँकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
संजय राउत ने PM मोदी के 12 साल के कार्यकाल पर क्या कहा?
राउत ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 12 वर्षों के कार्यकाल में एक दिन भी विसंगतिपूर्ण व्यवहार से मुक्त नहीं रहा। यह टिप्पणी उन्होंने मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के मौके पर की।
राष्ट्र प्रेस
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