14 अगस्त 2026
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मेघालय के दो बार एसोसिएशनों ने एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग की, 400 से अधिक वकीलों ने लिया फैसला

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मेघालय के दो बार एसोसिएशनों ने एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग की, 400 से अधिक वकीलों ने लिया फैसला

सारांश

मेघालय के दो प्रमुख बार एसोसिएशनों ने 400 से अधिक वकीलों की ईजीएम में एडवोकेट जनरल अमित कुमार को सदस्यता सूची से हटाया और राज्य सरकार से उन्हें पद से बर्खास्त करने की माँग की। विवाद की जड़ में हाईकोर्ट में उनकी कथित टिप्पणियाँ और शिलांग में एक अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट का मामला है।

मुख्य बातें

मेघालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और शिलांग बार एसोसिएशन ने संयुक्त ईजीएम में 400 से अधिक वकीलों की उपस्थिति में एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने का प्रस्ताव पारित किया।
दोनों एसोसिएशनों ने अमित कुमार का नाम सदस्यता सूची से हटाया और उन्हें एडवोकेट जनरल के रूप में मान्यता देने से इनकार किया।
विवाद की वजह हाईकोर्ट में अमित कुमार की कथित टिप्पणियाँ हैं, जिनमें उन्होंने कहा था कि बार एसोसिएशन महिला वकीलों को सुरक्षित वातावरण देने में विफल रहे।
एचएनवाईएफ के चार सदस्यों को 3 अगस्त को गिरफ्तार किया गया; वे एक अधिवक्ता को सार्वजनिक रूप से घुमाने के आरोपी हैं।
स्वत: संज्ञान मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को मेघालय हाईकोर्ट में होगी।
राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी पक्षकार बनाया गया है।

मेघालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और शिलांग बार एसोसिएशन ने राज्य के एडवोकेट जनरल अमित कुमार से संबंध विच्छेद करते हुए उन्हें संवैधानिक पद से हटाने की औपचारिक मांग की है। 14 अगस्त 2026 को आयोजित संयुक्त असाधारण आम बैठक (ईजीएम) में 400 से अधिक अधिवक्ताओं ने भाग लिया और सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया। मेघालय सरकार पर अब यह फैसला करने का दबाव है कि वह अपने एडवोकेट जनरल को पद पर बनाए रखती है या नहीं।

विवाद की जड़: हाईकोर्ट में दी गई कथित टिप्पणियाँ

यह टकराव मेघालय हाईकोर्ट में चल रहे एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान उभरा। कथित तौर पर अमित कुमार ने अदालत के समक्ष यह बयान दिया कि बार एसोसिएशन महिला वकीलों को सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराने में पर्याप्त रूप से सफल नहीं रहे हैं। दोनों बार एसोसिएशनों ने इन टिप्पणियों को पूरे कानूनी समुदाय पर व्यापक आरोप के रूप में देखा और इन्हें अस्वीकार्य बताया।

एसोसिएशनों ने अमित कुमार से स्पष्टीकरण भी माँगा, लेकिन बताया गया कि उनके जवाब से विवाद सुलझने के बजाय और गहरा हो गया।

मूल घटना: वकील के साथ कथित मारपीट और सार्वजनिक अपमान

यह पूरा मामला शिलांग में हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें हाइन्यूट्रेप नेशनल यूथ फ्रंट (एचएनवाईएफ) के सदस्यों ने कथित तौर पर एक अधिवक्ता को उनके चैंबर से बाहर खींचकर सार्वजनिक रूप से घुमाया। उस अधिवक्ता पर इससे पहले एक इंटर्न से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे थे।

घटना के बाद दोनों बार एसोसिएशनों ने मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे से संपर्क कर आरोप लगाया कि हमले और अपमान को रोकने में अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरती गई।

हाईकोर्ट की टिप्पणियाँ और गिरफ्तारियाँ

31 जुलाई की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह की पीठ ने टिप्पणी की कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद हस्तक्षेप करने में विफल रही प्रतीत होती है। इसके बाद 3 अगस्त को हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि एचएनवाईएफ के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हाईकोर्ट ने महिला अधिवक्ताओं और युवा इंटर्न की सुरक्षा व गरिमा से जुड़े मुद्दों पर अलग से भी विचार किया है। इस मामले में राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी पक्षकार बनाया गया है और उनसे जवाब माँगा गया है।

बार एसोसिएशनों का फैसला और सरकार पर दबाव

ईजीएम में पारित प्रस्ताव के तहत दोनों बार एसोसिएशनों ने अमित कुमार का नाम अपनी सदस्यता सूची से हटा दिया है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि उनके सदस्य अमित कुमार को मेघालय के एडवोकेट जनरल के रूप में मान्यता नहीं देंगे। मेघालय सरकार से संवैधानिक पद से उन्हें हटाने की माँग की गई है।

आगे क्या

स्वत: संज्ञान मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को मेघालय हाईकोर्ट में निर्धारित है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार बार एसोसिएशनों की माँग पर क्या रुख अपनाती है और क्या अदालत इस मामले में कोई अतिरिक्त निर्देश जारी करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन्हें अदालत के समक्ष देने का समय और संदर्भ राजनीतिक रूप से विस्फोटक साबित हुआ। मुख्यधारा की कवरेज इस बात पर ध्यान नहीं दे रही कि एचएनवाईएफ द्वारा एक अधिवक्ता का सार्वजनिक अपमान — चाहे आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों — कानून के शासन पर गहरे सवाल खड़े करता है। अब राज्य सरकार के सामने असली परीक्षा यह है कि वह बार एसोसिएशनों के दबाव और संवैधानिक प्रक्रिया के बीच संतुलन कैसे बनाती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय के बार एसोसिएशनों ने एडवोकेट जनरल अमित कुमार को हटाने की मांग क्यों की?
दोनों बार एसोसिएशनों ने आपत्ति जताई कि अमित कुमार ने मेघालय हाईकोर्ट में स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर कहा कि बार एसोसिएशन महिला वकीलों को सुरक्षित कार्य वातावरण देने में विफल रहे हैं। एसोसिएशनों ने इसे पूरे कानूनी समुदाय पर अनुचित आरोप माना और स्पष्टीकरण से संतुष्ट न होने पर हटाने की माँग की।
शिलांग में अधिवक्ता के साथ क्या घटना हुई थी?
हाइन्यूट्रेप नेशनल यूथ फ्रंट (एचएनवाईएफ) के सदस्यों ने कथित तौर पर एक अधिवक्ता को उनके चैंबर से बाहर खींचकर शिलांग में सार्वजनिक रूप से घुमाया। उस अधिवक्ता पर पहले एक इंटर्न से छेड़छाड़ के आरोप लगे थे। 3 अगस्त को एचएनवाईएफ के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।
मेघालय हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या रुख अपनाया है?
मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह की पीठ ने 31 जुलाई की सुनवाई में टिप्पणी की कि पुलिस मौके पर होने के बावजूद हस्तक्षेप करने में विफल रही। हाईकोर्ट ने महिला अधिवक्ताओं और इंटर्न की सुरक्षा पर अलग से विचार करते हुए राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी पक्षकार बनाया है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
स्वत: संज्ञान मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को मेघालय हाईकोर्ट में निर्धारित है। इस सुनवाई में राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया से भी जवाब अपेक्षित है।
एडवोकेट जनरल को हटाने का अधिकार किसके पास है?
एडवोकेट जनरल एक संवैधानिक पद है और उन्हें हटाने का अधिकार मेघालय सरकार के पास है। बार एसोसिएशनों की माँग के बाद अब राज्य सरकार को इस पर अपना फैसला सुनाना है।
राष्ट्र प्रेस
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