29 अक्टूबर 2026
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एमएलसी नतीजों पर विपक्ष का हमला: मनीष तिवारी बोले — '13 करोड़ लोगों से छिना मतदान अधिकार'

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एमएलसी नतीजों पर विपक्ष का हमला: मनीष तिवारी बोले — '13 करोड़ लोगों से छिना मतदान अधिकार'

सारांश

एमएलसी नतीजों के बाद विपक्ष ने मोर्चा खोला — कांग्रेस ने 13 करोड़ मतदाताओं के अधिकार का सवाल उठाया, सपा ने मतदाता सूची से हजारों नाम हटाने का आरोप लगाया। आरोप गंभीर हैं, लेकिन स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दावा किया कि 13 करोड़ लोगों से मतदान का अधिकार छीना गया है।
तिवारी ने प्रधानमंत्री मोदी की एमएलसी नतीजों पर टिप्पणी को 'प्रधानमंत्री पद के अनुकूल नहीं' बताया।
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने दावा किया कि पार्टी ने 11 में से 5 सीटें जीती हैं और मतदाता सूची से हजारों नाम कथित तौर पर हटाए गए।
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि जिन सीटों पर पार्टी लड़ी, वहाँ वोट प्रतिशत पिछले चुनाव से कई गुना बढ़ा।
विपक्ष के सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है; चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने 29 अक्टूबर 2026 को एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया। विपक्ष ने मतदान के अधिकार, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब भाजपा 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा निकाल रही है।

मनीष तिवारी का मतदान अधिकार पर बड़ा दावा

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भाजपा की पदयात्रा को निशाने पर लेते हुए कहा कि विपक्ष मतदान के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि 13 करोड़ लोगों से मतदान का अधिकार छीन लिया गया है और यदि उन्हें यह अधिकार वापस मिल जाए तो ऐसी रैलियों की आवश्यकता ही नहीं होगी।

तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एमएलसी नतीजों पर टिप्पणी को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एमएलसी चुनावों में मतदाता वर्ग और निर्वाचन क्षेत्र का दायरा विधानसभा या लोकसभा चुनावों से भिन्न होता है, इसलिए प्रधानमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की टिप्पणी शोभा नहीं देती।

सपा के आरोप — अनियमितता और प्रशासनिक दबाव

सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने कहा कि एमएलसी चुनाव परिणामों ने उत्तर प्रदेश के शिक्षित वर्ग और युवाओं की भावनाओं को उजागर किया है। उनके अनुसार, जिन सीटों पर सपा ने चुनाव लड़ा, वहाँ पार्टी का वोट प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में कई गुना बढ़ा है। कुछ सीटों पर कम अंतर से हार के पीछे कथित प्रशासनिक दबाव और पक्षपात को जिम्मेदार ठहराया गया, जिसकी पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से अभी होनी बाकी है।

नई दिल्ली में सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने दावा किया कि पार्टी ने 11 में से 5 सीटें जीती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके जिले में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों से हजारों नाम कथित तौर पर हटाए गए और इस बार कुल मतदान भी पिछले चुनाव की तुलना में कम रहा।

राजनीतिक संदर्भ और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि एमएलसी चुनाव राज्य विधान परिषद की सीटों के लिए होते हैं, जिनमें मतदाता मुख्यतः स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, शिक्षक और स्नातक होते हैं — यह आधार आम जनता के प्रत्यक्ष मतदान से मौलिक रूप से भिन्न है। ऐसे में इन परिणामों की व्यापक राजनीतिक व्याख्या विशेषज्ञों के बीच बहस का विषय रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी जमीन तैयार करने को लेकर सभी दल सक्रिय हैं। भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा और विपक्ष की पलटवार की यह रणनीति उसी व्यापक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है।

आरोपों की स्थिति और आगे की राह

विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए गए मतदाता सूची से नाम हटाने और प्रशासनिक दबाव के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। चुनाव आयोग (ECI) की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सपा आधिकारिक शिकायत दर्ज कराती है तो यह मामला चुनावी जाँच के दायरे में आ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एमएलसी परिणामों के बाद उठी यह बहस आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन शायद ही कभी विधिवत जाँच तक पहुँचते हैं। '13 करोड़ लोगों से अधिकार छिनने' जैसे बड़े आँकड़े बिना स्रोत के राजनीतिक बयानबाज़ी की श्रेणी में ही रहते हैं। असली सवाल यह है कि क्या सपा और कांग्रेस इन दावों को चुनाव आयोग में आधिकारिक शिकायत के रूप में दर्ज कराएँगे — यही उनकी विश्वसनीयता की असली कसौटी होगी। एमएलसी जैसे सीमित मतदाता वर्ग वाले चुनाव को व्यापक जनादेश के रूप में पेश करना — चाहे सत्ता पक्ष करे या विपक्ष — दोनों के लिए राजनीतिक सुविधा का खेल है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएलसी चुनाव क्या होते हैं और इनमें कौन मतदान करता है?
एमएलसी यानी विधान परिषद सदस्य के चुनाव राज्य विधान परिषद की सीटों के लिए होते हैं। इनमें मतदाता आम नागरिक नहीं, बल्कि स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, शिक्षक और स्नातक जैसे विशेष वर्ग होते हैं, जो इन्हें विधानसभा चुनावों से मौलिक रूप से अलग बनाता है।
मनीष तिवारी ने '13 करोड़ लोगों से मतदान अधिकार छिनने' का दावा किस संदर्भ में किया?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए यह दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि इन 13 करोड़ लोगों को उनका मतदान अधिकार वापस मिल जाए तो ऐसी रैलियों की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, इस आँकड़े का स्रोत और आधार स्पष्ट नहीं किया गया।
सपा ने एमएलसी चुनाव में कितनी सीटें जीतने का दावा किया है?
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने दावा किया कि पार्टी ने 11 में से 5 सीटें जीती हैं। सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने भी कहा कि जिन सीटों पर पार्टी ने चुनाव लड़ा, वहाँ वोट प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में कई गुना बढ़ा है।
सपा ने मतदाता सूची को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने आरोप लगाया कि उनके जिले में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों से हजारों नाम कथित तौर पर हटाए गए और इस बार कुल मतदान भी पिछले चुनाव से कम रहा। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा है?
अभी तक चुनाव आयोग (ECI) की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सपा या कांग्रेस आधिकारिक शिकायत दर्ज कराती है तो यह मामला चुनावी जाँच के दायरे में आ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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