पुणे में मनसे कार्यकर्ताओं ने इन्फ्लुएंसर महेश मोटे को राज ठाकरे की फोटो के सामने सिर पर चप्पल रख माफी मांगने पर किया मजबूर
सारांश
मुख्य बातें
पुणे में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने 21 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महेश मोटे को कथित तौर पर पार्टी के जनसंपर्क कार्यालय में बुलाकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे की तस्वीर के सामने सिर पर चप्पल रखकर और चेहरे पर काली स्याही पोतकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया। पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया गया, जिसमें महेश मोटे रोते हुए और उठक-बैठक करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
घटनाक्रम: कैसे पहुँचे इस मुकाम तक
रिपोर्टों के अनुसार, हरदासपुर विधानसभा क्षेत्र के मनसे उप-विभागीय अध्यक्ष शुभम जगदाले ने आरोप लगाया कि इन्फ्लुएंसर महेश मोटे ने लगभग 15 दिन पहले पोस्ट किए गए एक वीडियो में मनसे प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था।
घटना से पहले इन्फ्लुएंसर केरल में था। जैसे ही वह पुणे लौटा, मनसे कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी मिली और वे उसे पार्टी के जनसंपर्क कार्यालय ले आए, जहाँ यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया।
वीडियो में क्या दिखा
रिकॉर्ड किए गए वीडियो में महेश मोटे को राज ठाकरे की तस्वीर के सामने सिर पर चप्पल रखे और चेहरे पर काली स्याही पोते उठक-बैठक करते और रोते हुए देखा गया। वीडियो में वह कहते सुने गए, 'मैंने अनजाने में राज साहब के बारे में कुछ गलत कह दिया था और गलती से शुभम दादा और मनसे के अन्य पदाधिकारियों के बारे में भी गलत बातें कह दी थीं। आज मुझे अपनी गलती पर बहुत अफसोस है। इस रील की वजह से ही मैं इस मुश्किल स्थिति में फंस गया हूँ। मैं मनसे पार्टी और आप सभी से दिल से माफी माँगता हूँ।'
मनसे कार्यकर्ताओं का रुख
शुभम जगदाले ने दावा किया कि युवक को 'महाप्रसाद' दिया गया — यानी उसके साथ बुरा बर्ताव किया गया। एक मनसे नेता को यह कहते सुना गया, 'हम उसे अपने कार्यालय लाए और सम्माननीय राज साहब ठाकरे की तस्वीर के सामने उसे झुकाया और माफी की माँग की।'
उन्होंने आगे कहा, 'असली मनसे अंदाज में हमने उसे अपनी भाषा में मुंहतोड़ जवाब दिया, जिसे आप 'महाप्रसाद' भी कह सकते हैं। मेरा मानना है कि अगर कोई राज साहब ठाकरे के खिलाफ ऐसी बातें करता है, तो मनसे ठीक इसी तरह जवाब देगी।'
व्यापक संदर्भ और सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य और रील संस्कृति को लेकर महाराष्ट्र में तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर किसी को इस तरह के व्यवहार का सामना करना पड़ा हो।
आलोचकों का कहना है कि किसी को इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और जबरन माफी दिलवाने की घटना न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अभी तक पुणे पुलिस की ओर से इस मामले में किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आगे क्या
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन्फ्लुएंसर महेश मोटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है या नहीं। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा स्वयंभू न्याय की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।