31 अक्टूबर 2026
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मोदी 2029 में चौथी बार लेंगे शपथ: आचार्य प्रमोद कृष्णम का दावा, विपक्ष को बताया 'कौरव'

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मोदी 2029 में चौथी बार लेंगे शपथ: आचार्य प्रमोद कृष्णम का दावा, विपक्ष को बताया 'कौरव'

सारांश

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राजनीति को महाभारत का रूपक देते हुए मोदी को 'अर्जुन' और विपक्ष को 'कौरव' बताया। उनका दावा है कि 2029 में मोदी चौथी बार PM पद की शपथ लेंगे। यह बयान खड़गे की विवादास्पद टिप्पणी पर मचे हंगामे के बीच आया है।

मुख्य बातें

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 31 अक्टूबर को गाजियाबाद में दावा किया कि PM मोदी 2029 में चौथी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।
कृष्णम ने वर्तमान राजनीति की तुलना महाभारत से की — मोदी को 'अर्जुन' और राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष को 'कौरव' बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की पटना में की गई कथित विवादास्पद टिप्पणी के बाद यह राजनीतिक विवाद उभरा।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने खड़गे का बचाव करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी 'लाक्षणिक' थी और इसे शाब्दिक अर्थ में नहीं लेना चाहिए।
कृष्णम ने खड़गे को 'इस्तेमाल हो चुका कारतूस' और 'बुझी हुई राख' बताते हुए तीखी आलोचना की।

गाजियाबाद में 31 अक्टूबर को मीडिया से बात करते हुए धर्मगुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य की तुलना महाभारत के युद्ध से की और दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी राजनीतिक चक्रव्यूहों को तोड़कर 2029 में चौथी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनका यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की पटना में की गई विवादास्पद टिप्पणी को लेकर मचे राजनीतिक हंगामे के बीच आया है।

महाभारत से राजनीति की तुलना

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दल एकजुट होकर प्रधानमंत्री मोदी पर हमला कर रहे हैं और उन्हें 'अभिमन्यु' समझने की भूल कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'विपक्ष में इकट्ठा हुए इन सभी कौरवों को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभिमन्यु नहीं हैं, वे अर्जुन हैं।'

उन्होंने आगे दावा किया कि 2029 में यह शपथ पूरे देश में गूंजेगी — 'मैं, नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ लेता हूँ।' गौरतलब है कि यह बयान किसी सरकारी या संवैधानिक प्राधिकरण का नहीं, बल्कि एक धार्मिक-राजनीतिक टिप्पणीकार का व्यक्तिगत दावा है।

खड़गे पर तीखा निशाना

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 'खड़गे अब तरस खाने लायक हो गए हैं, उनमें कोई चिंगारी नहीं बची। एक इस्तेमाल हो चुका कारतूस और बुझी हुई राख कभी धमाका नहीं कर सकती।' यह टिप्पणी खड़गे द्वारा पटना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर की गई कथित विवादास्पद टिप्पणी की पृष्ठभूमि में आई।

कांग्रेस का पलटवार

खड़गे के बचाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी सामने आए। उन्होंने कहा कि खड़गे की टिप्पणी लाक्षणिक थी और स्थानीय बोलचाल की भाषा से जुड़ी है, इसे शाब्दिक अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए। चौधरी ने इस विवाद को 'राई का पहाड़ बनाने' की कोशिश करार दिया।

चौधरी के अनुसार, 'खड़गे का कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी से भी अधिक ताकतवर व्यक्ति को हराया जा सकता है — यह एक स्थानीय मुहावरा था, जिसे लाक्षणिक रूप में इस्तेमाल किया गया था।' उन्होंने सरकार पर छोटी-मोटी बातों को तूल देने का आरोप लगाया।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देश में 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से विपक्षी एकता और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीति पर बहस जारी है। आचार्य प्रमोद कृष्णम, जो पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, अब BJP के समर्थक माने जाते हैं। उनके बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे धर्म और राजनीति के संगम पर खड़े होकर व्यापक जनमानस को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।

आने वाले समय में इस राजनीतिक वाकयुद्ध के और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारी और 2029 के आम चुनाव की रणनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक आकांक्षा है — और इसे उसी रूप में पढ़ा जाना चाहिए। महाभारत के रूपक भारतीय राजनीतिक भाषण में नए नहीं हैं, लेकिन जब एक धार्मिक व्यक्तित्व चुनावी भविष्यवाणी को धर्मग्रंथ की भाषा में लपेटता है, तो यह राजनीति और धर्म के बीच की रेखा को और धुंधला करता है। दूसरी ओर, खड़गे-विवाद में कांग्रेस की 'लाक्षणिक भाषा' वाली सफाई यह दर्शाती है कि विपक्ष अभी भी संवाद-प्रबंधन में पिछड़ रहा है। असली सवाल यह है कि क्या ऐसे बयान 2029 की चुनावी जमीन तैयार करने की सुनियोजित रणनीति हैं, या महज़ मीडिया की सुर्खियाँ बटोरने का प्रयास।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मोदी के बारे में क्या दावा किया?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 में चौथी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उन्होंने मोदी की तुलना महाभारत के 'अर्जुन' से की और कहा कि वे सभी राजनीतिक चक्रव्यूहों को तोड़ देंगे।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने विपक्ष को 'कौरव' क्यों बताया?
कृष्णम ने वर्तमान राजनीति की तुलना महाभारत से करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट विपक्षी दल 'कौरव' की तरह PM मोदी पर हमला कर रहे हैं। उनका कहना था कि विपक्ष मोदी को 'अभिमन्यु' समझने की भूल कर रहा है, जबकि वे 'अर्जुन' हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादास्पद टिप्पणी क्या थी?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पटना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर एक कथित विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसने राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सफाई दी कि वह टिप्पणी लाक्षणिक थी और इसका अर्थ था कि मोदी से भी अधिक ताकतवर व्यक्ति को हराया जा सकता है।
कांग्रेस ने खड़गे की टिप्पणी का बचाव कैसे किया?
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि खड़गे की टिप्पणी एक स्थानीय मुहावरे पर आधारित थी और इसे शाब्दिक अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने इस विवाद को 'राई का पहाड़ बनाने' की कोशिश बताया और कहा कि सरकार छोटी-मोटी बातों को तूल देने में माहिर है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम कौन हैं और उनका राजनीतिक रुख क्या है?
आचार्य प्रमोद कृष्णम एक धार्मिक-राजनीतिक टिप्पणीकार हैं जो पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और अब BJP के समर्थक माने जाते हैं। वे अक्सर धर्म और राजनीति को जोड़कर सार्वजनिक बयान देते हैं और मीडिया में सक्रिय रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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