10 जुलाई 2026
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मोतिहारी वॉटर पार्क विवाद: राजद सांसद सुधाकर सिंह बोले — किसानों की जमीन का दुरुपयोग, एफआईआर राजनीतिक साजिश

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मोतिहारी वॉटर पार्क विवाद: राजद सांसद सुधाकर सिंह बोले — किसानों की जमीन का दुरुपयोग, एफआईआर राजनीतिक साजिश

सारांश

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने मोतिहारी वॉटर पार्क परियोजना में किसानों की जमीन के दुरुपयोग का आरोप लगाया और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को राजनीतिक साजिश करार दिया। हाई कोर्ट के नोटिस के बावजूद निर्माण जारी रहने और राम मंदिर चंदे पर सुप्रीम कोर्ट में PIL — यह मामला बिहार की राजनीति में नया तूफान बन रहा है।

मुख्य बातें

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने मोतिहारी में प्रस्तावित वॉटर पार्क परियोजना में किसानों की जमीन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर सरकारी अधिकारी ने नहीं, बल्कि ठेकेदार के मुनीम ने कराई — जिसे उन्होंने राजनीतिक साजिश बताया।
उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी किया, फिर भी निर्माण कार्य नहीं रुका; सिंह ने पुनः अदालत जाने की चेतावनी दी।
राम मंदिर चंदे में कथित ₹10,000 करोड़ की अनियमितता का आरोप; सर्वोच्च न्यायालय में PIL दाखिल।
बिहार के लखीसराय में 50 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े जाने का हवाला देते हुए पेपर लीक मामले में राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने 9 जुलाई को बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मोतिहारी में प्रस्तावित वॉटर पार्क परियोजना के लिए किसानों की जमीन का अवैध तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर एक सुनियोजित राजनीतिक दबाव की कोशिश है, जिसका उद्देश्य उनकी आवाज़ को दबाना है।

एफआईआर पर सवाल: ठेकेदार के मुनीम ने क्यों कराया मुकदमा?

सुधाकर सिंह ने तर्क दिया कि इस मामले में सबसे बड़ी विसंगति यह है कि उनके खिलाफ शिकायत किसी सरकारी अधिकारी ने नहीं, बल्कि ठेकेदार के मुनीम ने दर्ज कराई। उनका कहना है कि यदि सरकारी कार्य में वास्तव में बाधा पहुँची होती, तो प्राथमिकी किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा दर्ज होनी चाहिए थी। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि एक निजी ठेकेदार के प्रतिनिधि को यह अधिकार किस कानूनी आधार पर दिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि उन पर पॉकेटमारी, हत्या के प्रयास और गला दबाने जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं, जबकि घटनास्थल पर बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। उनके अनुसार, यदि ऐसी कोई घटना सच में हुई होती तो उसका वीडियो या कोई प्रत्यक्ष प्रमाण अवश्य सामने आता।

हाई कोर्ट का नोटिस, फिर भी जारी रहा निर्माण

सांसद सिंह ने बताया कि भूमि अधिग्रहण के इस विवाद में वे पहले ही उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं। अदालत ने मामला स्वीकार कर नोटिस भी जारी किया, किंतु इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका। उनका आरोप है कि न्यायालय की यथास्थिति बनाए रखने की मंशा के विपरीत प्रशासन ने काम जारी रखा, जो अदालत की अवमानना के समान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बेबुनियाद धाराएँ नहीं हटाईं, तो वे पुनः न्यायालय की शरण लेंगे।

पेपर लीक और राहुल गांधी के बयान पर समर्थन

कथित पेपर लीक मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने ठोस तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपनी बात रखी है। उन्होंने बिहार के लखीसराय में 50 फर्जी परीक्षार्थियों के पकड़े जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि गड़बड़ियों के संकेत पहले से मिल रहे थे। उनके अनुसार, जब परीक्षा की निगरानी उच्चतम स्तर पर हो और प्रश्नपत्र पहुँचाने की जिम्मेदारी सेना तक निभाए, फिर भी अनियमितताएँ सामने आएँ, तो विपक्ष का मुखर होना स्वाभाविक है।

राम मंदिर चंदा विवाद: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

राम मंदिर के चंदे को लेकर सुधाकर सिंह ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि गाँव-गाँव से रसीद काटकर एकत्र किया गया धन अयोध्या तक पूरी तरह नहीं पहुँचा। उनके दावे के अनुसार यह मामला लगभग ₹10,000 करोड़ का है, जिसमें चंदा संग्रह, निर्माण कार्य और चढ़ावे — तीनों स्तरों पर कथित अनियमितताएँ हुई हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है, जिसमें देशभर से प्राप्त चंदे का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की माँग की गई है।

राहुल गांधी की इस मुद्दे पर चुप्पी के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि राहुल गांधी एक आस्थावान हिंदू हैं और उचित समय पर इस विषय पर अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश में एक साथ इतने बड़े मुद्दे खड़े कर दिए गए हैं कि विपक्ष को हर मोर्चे पर एक साथ सक्रिय रहना पड़ रहा है।

आगे की राह

सुधाकर सिंह ने स्पष्ट किया कि वे भ्रष्टाचार और बेईमानी के विरुद्ध अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यदि एक निर्वाचित सांसद के साथ इस तरह का व्यवहार हो सकता है, तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। मोतिहारी भूमि विवाद में उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई और PIL पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पेपर लीक और राम मंदिर चंदा — पर एक साथ हैं, जो विपक्षी रणनीति की व्यापकता तो दर्शाते हैं, लेकिन फोकस को कमज़ोर भी करते हैं। मोतिहारी मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उच्च न्यायालय के नोटिस के बाद भी निर्माण क्यों नहीं रुका — यह प्रशासनिक जवाबदेही का सीधा प्रश्न है जिसका उत्तर सरकार को देना होगा। राम मंदिर चंदे पर PIL एक साहसिक कदम है, लेकिन ₹10,000 करोड़ के दावे के लिए सार्वजनिक साक्ष्य अभी सामने नहीं आए हैं। बिहार में भूमि विवाद और संस्थागत जवाबदेही का यह टकराव आने वाले चुनावी मौसम में और तीखा होगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोतिहारी वॉटर पार्क विवाद क्या है?
मोतिहारी में प्रस्तावित वॉटर पार्क परियोजना के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद है। राजद सांसद सुधाकर सिंह का आरोप है कि इस जमीन का गलत इस्तेमाल हो रहा है और उनके विरोध के बाद उन पर राजनीतिक रूप से एफआईआर दर्ज कराई गई।
सुधाकर सिंह पर दर्ज एफआईआर में क्या आरोप हैं?
उन पर पॉकेटमारी, हत्या के प्रयास और गला दबाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। सिंह का कहना है कि ये आरोप बेबुनियाद हैं क्योंकि घटनास्थल पर मीडियाकर्मी, अधिकारी और हजारों लोग मौजूद थे और कोई प्रमाण सामने नहीं आया।
उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
सुधाकर सिंह ने भूमि अधिग्रहण विवाद को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर नोटिस जारी किया। हालाँकि उनका आरोप है कि नोटिस के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रोका गया।
राम मंदिर चंदे पर सुधाकर सिंह ने क्या आरोप लगाए?
सिंह ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि गाँव-गाँव से एकत्र किया गया चंदा पूरी तरह अयोध्या नहीं पहुँचा और यह लगभग ₹10,000 करोड़ का मामला है। उन्होंने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की है।
पेपर लीक मामले में सुधाकर सिंह का क्या कहना है?
सिंह ने राहुल गांधी के पेपर लीक संबंधी बयान का समर्थन किया और बिहार के लखीसराय में 50 फर्जी परीक्षार्थियों के पकड़े जाने का उदाहरण दिया। उनके अनुसार राहुल गांधी के पास ठोस साक्ष्य हैं और यह केवल राजनीतिक आरोप नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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