मुहर्रम पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन समेत नेताओं ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 26 जून — मुहर्रम के पावन अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन सहित देश के कई प्रमुख नेताओं ने हजरत इमाम हुसैन की अजीम शहादत को श्रद्धापूर्वक नमन किया। नेताओं ने इस दिन को न्याय, सत्य और भाईचारे के प्रतीक के रूप में याद करते हुए देशवासियों से एकता और सौहार्द का संकल्प लेने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति का संदेश
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'मुहर्रम के मौके पर हम हज़रत इमाम हुसैन (एएस) की कुर्बानी को याद करते हैं। मुहर्रम हमें हिम्मत, कुर्बानी, दया और सच्चाई व न्याय के प्रति अटूट निष्ठा जैसे मूल्यों की याद दिलाता है। यह पवित्र अवसर हमें अपने समाज में भाईचारे, शांति और आपसी सम्मान के बंधन को मजबूत करने के लिए प्रेरित करे।'
कांग्रेस नेताओं की श्रद्धांजलि
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर महात्मा गांधी की उक्ति का उल्लेख करते हुए लिखा, 'मजलूम होते हुए फतेह हासिल करना, यह मैंने इमाम हुसैन से सीखा।' उन्होंने आगे कहा कि इस अवसर पर मोहब्बत, भाईचारे, इंसाफ और आपसी सौहार्द के रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'हजरत इमाम हुसैन जी का संघर्ष, त्याग और बलिदान हमें असत्य, अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध मानवता की सबसे मज़बूत ढाल बनने की सीख देता है। आज मुहर्रम के दिन हमें उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की प्रेरणा लेनी चाहिए।'
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने लिखा, 'आज मोहर्रम के मौके पर हजरत इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की कुर्बानी को नमन। हमारा संकल्प होना चाहिए कि सत्य, न्याय और इंसानियत की राह पर चलते रहें।'
मुख्यमंत्रियों के संदेश
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मुहर्रम की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पवित्र अवसर सभी के लिए शांति, खुशी, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, 'हजरत इमाम हुसैन साहब की शहादत सत्य, इंसाफ, इंसानियत और भाईचारे की अमर मिसाल है। उनका बलिदान हर दौर में जुल्म और अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।'
मुहर्रम का महत्व
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और आशूरा — मुहर्रम की 10वीं तारीख — को कर्बला की लड़ाई में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर के मुसलमानों, विशेषकर शिया समुदाय के लिए गहरी आस्था और शोक का प्रतीक है। गौरतलब है कि भारत में मुहर्रम सांप्रदायिक सौहार्द और साझी विरासत की मिसाल के रूप में भी देखा जाता है।
राजनीतिक एकजुटता का संदेश
विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से आए इन संदेशों में एक साझा सूत्र स्पष्ट दिखा — न्याय, बलिदान और भाईचारे के मूल्यों को आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक बताना। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सामाजिक एकता और धार्मिक सद्भाव को लेकर व्यापक चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में इन मूल्यों को नीतिगत स्तर पर किस रूप में अपनाया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।