मुर्शिदाबाद में रेलवे कोच फैक्ट्री की माँग: अधीर रंजन चौधरी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के सहयोग से रेलवे कोच फैक्ट्री स्थापित करने की औपचारिक माँग की है। यह पत्र 6 जून 2026 को भेजा गया और इसमें चौधरी ने इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी देने का आग्रह किया है।
पत्र की पृष्ठभूमि और पुरानी माँग
अपने पत्र में अधीर रंजन चौधरी ने उल्लेख किया कि उन्होंने इससे पहले 12 मई 2026 को प्रधानमंत्री को भी इसी विषय पर पत्र लिखा था। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव उनके रेल राज्य मंत्री कार्यकाल के दौरान ही तैयार किया गया था, जो अब भी लंबित है। चौधरी ने यह भी रेखांकित किया कि रेलवे मंत्रालय पश्चिम बंगाल में रेलवे अवसंरचना सहित कई विकास परियोजनाओं को लागू करने की योजना बना रहा है — ऐसे में मुर्शिदाबाद को इस औद्योगिक पहल में शामिल करना स्वाभाविक कदम होगा।
मुर्शिदाबाद की चुनौतियाँ और परियोजना का महत्व
चौधरी के अनुसार, मुर्शिदाबाद अपनी ऐतिहासिक विरासत, सीमावर्ती भौगोलिक स्थिति और बड़ी आबादी के बावजूद औद्योगीकरण और रोज़गार सृजन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। यह ज़िला पश्चिम बंगाल के उन पिछड़े क्षेत्रों में शुमार है जहाँ बेरोज़गार युवाओं की तादाद बड़ी है।
प्रस्तावित रेलवे कोच फैक्ट्री से मुर्शिदाबाद और आसपास के जिलों के हज़ारों बेरोज़गार युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलने की संभावना है। चौधरी ने यह भी कहा कि यह फैक्ट्री सहायक उद्योगों को प्रोत्साहन देगी, स्थानीय युवाओं के कौशल विकास में सहायक होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मज़बूती प्रदान करेगी।
SAIL की भूमिका और प्रस्तावित साझेदारी
इस परियोजना में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की भागीदारी का प्रस्ताव रखा गया है। यह साझेदारी सार्वजनिक क्षेत्र के दो बड़े उपक्रमों — रेलवे और SAIL — के बीच समन्वय का उदाहरण बन सकती है। गौरतलब है कि भारतीय रेलवे पहले से ही SAIL से स्टील खरीदता है, इसलिए एकीकृत कोच-निर्माण इकाई आपूर्ति शृंखला को भी सुदृढ़ कर सकती है।
सरकार से आग्रह
चौधरी ने रेल मंत्री से अनुरोध किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जाए और शीघ्र घोषणा की जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि यह परियोजना साकार होती है तो यह मुर्शिदाबाद के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
आगे की राह
अब यह देखना होगा कि रेल मंत्रालय इस माँग पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है। यह परियोजना लंबे समय से प्रस्ताव के स्तर पर है और केंद्र सरकार की मंज़ूरी के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में केंद्रीय औद्योगिक निवेश की गति राजनीतिक समीकरणों पर भी निर्भर करती है।