14 जुलाई 2026
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क्या निलंबित आईएएस अधिकारी एन प्रशांत ने केरल के मुख्य सचिव पर अत्यधिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया?

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क्या निलंबित आईएएस अधिकारी एन प्रशांत ने केरल के मुख्य सचिव पर अत्यधिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया?

सारांश

निलंबित आईएएस अधिकारी एन प्रशांत का आरोप है कि केरल के मुख्य सचिव ने नियमों का उल्लंघन किया है। यह मामला प्रशासनिक दखलंदाजी का एक नया उदाहरण है, जिससे राज्य की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह विवाद केरल की राजनीति में नई हलचल लाएगा?

मुख्य बातें

निलंबित आईएएस अधिकारी एन प्रशांत ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
जयथिलक पर प्रशासनिक दखल का आरोप।
बिना मंत्री की जानकारी के सरकारी आदेश जारी करने का आरोप।
कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
नौकरशाही में चापलूसी के सवाल उठाए गए हैं।

तिरुवनंतपुरम, 8 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। निलंबित आईएएस अधिकारी एन प्रशांत ने केरल के मुख्य सचिव डॉ. ए. जयथिलक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशांत का कहना है कि जयथिलक ने नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए संबंधित मंत्री की जानकारी के बिना सरकारी आदेश जारी किए, जो रूल्स ऑफ बिजनेस का स्पष्ट उल्लंघन है।

सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में प्रशांत ने कहा कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक अति दखलंदाजी का विस्तृत पैटर्न है। उन्होंने हाल ही में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का जिक्र करते हुए दावा किया कि जयथिलक ने विभागीय मंत्री को फ़ाइल भेजे बिना ही स्वतंत्र रूप से आदेश जारी किए।

प्रशांत ने आरोप लगाया कि पूर्व में डॉ. बी. अशोक से जुड़े मामले में फ़ाइल को मुख्यमंत्री के पास तभी भेजा गया, जब अदालत में प्रश्न उठे।

उन्होंने याद किया कि जब जयथिलक एससी/एसटी विभाग में पदस्थ थे, तब तत्कालीन मंत्री के. राधाकृष्णन फ़ाइल मूवमेंट पर कड़ी नजर रखते थे। लेकिन चुनाव प्रचार के कारण मंत्री की अनुपस्थिति में जयथिलक ने कथित रूप से "अवैध कार्यवाही" आगे बढ़ाने की कोशिश की, मानो वे स्वयं मंत्री हों।

प्रशांत का दावा है कि उन्हीं "अवैध निर्णयों" का विरोध करने के कारण उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हुई।

उन्होंने आगे बताया कि 16 मार्च 2024 को आईएएस अधिकारी गोपालकृष्णन को उन्नति मिशन के सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया, जबकि इसकी जानकारी न तो विभागीय मंत्री को थी, न ही मुख्यमंत्री को। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इस नियुक्ति और उससे संबंधित फ़ाइलों को ट्रांसफर कराने में जयथिलक की भूमिका दिखाई देती है।

प्रशांत ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बाद में वही फ़ाइलें अनुपलब्ध पाई गईं।

उन्होंने सचिवालय कर्मचारियों की बातचीत का हवाला देते हुए दावा किया कि जयथिलक उन विभागों में मनमाने आदेश अक्सर जारी करते थे जहां प्रशासनिक अनुभव कम था। उन्होंने मुत्तिल में पेड़ों की कटाई से जुड़े विवादित आदेश को भी एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

प्रशांत ने कहा कि बिना वैधानिक अधिकार के जारी आदेशों की कोई कानूनी मान्यता नहीं होती और वे न्यायिक परीक्षण में टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने सभी ऐसे आदेशों को रद्द करने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की।

अंत में उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि नौकरशाही में “चापलूसी के जरिए राजनीतिक शक्ति हासिल करने” की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो सिविल सेवाओं की नैतिक नींव के खिलाफ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या एन प्रशांत के आरोप सही हैं?
एन प्रशांत के आरोपों की सत्यता की जांच आवश्यक है, क्योंकि यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गंभीरता को प्रभावित करता है।
क्या प्रशासनिक दखलंदाजी के मामले आम हैं?
हां, प्रशासनिक दखलंदाजी के मामले अक्सर सामने आते हैं, जो सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को प्रभावित करते हैं।
इस मामले का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
इस मामले का राजनीतिक असर गहरा हो सकता है, क्योंकि यह राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाता है।
राष्ट्र प्रेस
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