नरेश पाल गंगवार बने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, NEET विवाद के बीच परीक्षा सुधार की जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 24 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राजस्थान कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे नाजुक दौर में हुई है जब NEET और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर चौतरफा दबाव है।
नियुक्ति की पृष्ठभूमि
नियुक्ति समिति के इस फैसले को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बाद छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने परीक्षा ढाँचे में व्यापक सुधारों की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा मंत्रालय पेपर लीक रोकने और परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
गंगवार की प्राथमिकताएँ
अधिकारियों के अनुसार, नरेश पाल गंगवार की तत्काल प्राथमिकताओं में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश एवं भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, हालिया परीक्षा विवादों से प्रभावित छात्रों का भरोसा बहाल करना और NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना शामिल हो सकता है। संस्थागत सुधारों के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना उनके कार्यभार का केंद्रबिंदु रहेगा।
गंगवार का प्रशासनिक अनुभव
नई जिम्मेदारी संभालने से पहले गंगवार मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव पद पर कार्यरत थे। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने से पूर्व उन्होंने राजस्थान में कई जिलों में जिला कलेक्टर के रूप में काम किया और राज्य सरकार में प्रमुख सचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर दायित्व निभाए। उनके पास करीब तीन दशक का प्रशासनिक अनुभव है।
गौरतलब है कि गंगवार को 2010 से 2014 के बीच जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के शुरुआती चरण में राजस्थान की सौर नीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है। इसके अलावा, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण और खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी नीतियों के निर्माण में भी योगदान दिया।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गंगवार की शैक्षणिक योग्यता भी उल्लेखनीय है। उन्होंने तत्कालीन यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की (अब IIT रुड़की) से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बी.टेक., IIT दिल्ली से कम्युनिकेशन एवं रडार इंजीनियरिंग में एम.टेक. तथा राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से अर्थशास्त्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की है। तकनीकी और नीतिगत दोनों क्षेत्रों में यह विशेषज्ञता उन्हें परीक्षा प्रणाली के डिजिटल सुधारों के लिए उपयुक्त बनाती है।
आगे की राह
शिक्षा मंत्रालय अब परीक्षा सुरक्षा को तकनीकी रूप से अभेद्य बनाने और NTA के कामकाज में संस्थागत बदलाव लाने की दिशा में काम करेगा। गंगवार के नेतृत्व में उच्च शिक्षा विभाग से अपेक्षा है कि वह न केवल मौजूदा संकट का समाधान करे, बल्कि दीर्घकालिक सुधारों की नींव भी रखे जो लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य को सुरक्षित कर सके।