29 अक्टूबर 2026
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नासिक कुंभ 2027: निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख ने मांस-मछली-शराब बिक्री बंद करने की माँग उठाई

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नासिक कुंभ 2027: निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख ने मांस-मछली-शराब बिक्री बंद करने की माँग उठाई

सारांश

नासिक कुंभ की तैयारियाँ अभी शुरुआती दौर में हैं, लेकिन निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख महंत मुरलीधर जी महाराज ने अभी से बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं — मांस-मछली-शराब बंद हो, सीढ़ियाँ चौड़ी हों, ज़मीन मिले। राम की तपोभूमि की अंतरराष्ट्रीय छवि दाँव पर है।

मुख्य बातें

निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख महंत मुरलीधर जी महाराज ने 29 अक्टूबर 2026 को नासिक कुंभ क्षेत्र में मांस, मछली और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध की माँग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस पर रोक न लगने से विदेशों में भगवान राम की तपोभूमि की नकारात्मक छवि जाएगी।
अकेले निर्वाणी अखाड़े में लगभग 50 हजार साधु-संत हैं; घाट की सँकरी सीढ़ियों से भगदड़ का खतरा बताया।
अखाड़े को अभी तक ज़मीन का आवंटन नहीं; जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से प्रयागराज जैसी तैयारी की अपील।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन और कुंभ मेला मंत्री से जल्द बैठक प्रस्तावित।

नासिक कुंभ मेले की तैयारियों के बीच निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख महंत मुरलीधर जी महाराज ने 29 अक्टूबर 2026 को कुंभ क्षेत्र के आसपास मांस, मछली और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की माँग की। उनका तर्क है कि इस पर कार्रवाई न होने से देश-विदेश में भगवान राम की तपोभूमि की छवि को ठेस पहुँचेगी।

मुख्य माँगें और चेतावनी

महंत मुरलीधर जी महाराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यहां मांस, मछली और शराब की बिक्री भी बंद होनी चाहिए, क्योंकि यहां देश-विदेश से भक्त आएंगे। यदि कुंभ क्षेत्र के आसपास मांस, मछली और शराब बिकते दिखेंगे, तो विदेशों में यह संदेश जाएगा कि भगवान राम की तपोभूमि और इतनी पवित्र जगह पर भी यह सब बिकता है। यह हमारी परंपरा और सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है।'

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब नासिक कुंभ की आधिकारिक तैयारियाँ अभी प्रारंभिक चरण में हैं और अखाड़ों को अभी तक ज़मीन का आवंटन भी नहीं हुआ है।

घाट सुरक्षा और भगदड़ की आशंका

महंत मुरलीधर जी महाराज ने घाटों की सीढ़ियों की वर्तमान बनावट पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अकेले निर्वाणी अखाड़े में लगभग 50 हजार साधु-संत हैं और कुल मिलाकर 9 से 10 हजार खालसा हैं। जब 100, 200, 500 या 1,000 संत एक साथ स्नान के लिए घाट पर उतरते हैं, तो भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती है।

उन्होंने प्रशासन से माँग की कि एक-एक सीढ़ी के बीच अतिरिक्त स्टेप बनाए जाएँ ताकि संत और श्रद्धालु आराम से और सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। गौरतलब है कि देश में बड़े धार्मिक आयोजनों में भगदड़ की घटनाएँ पहले भी हो चुकी हैं, जो इस चेतावनी को विशेष महत्व देती हैं।

भूमि आवंटन और बुनियादी सुविधाओं की कमी

महंत मुरलीधर जी महाराज ने बताया कि अभी तक अखाड़े को नापकर ज़मीन आवंटित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जब तक भूमि का आवंटन नहीं होगा, तब तक व्यवस्थाएँ ठीक से नहीं हो पाएंगी। उन्होंने नासिक के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और राज्य सरकार से कुंभ क्षेत्र का विस्तार करने की अपील की, ताकि प्रयागराज की तर्ज पर नासिक में भी भव्य कुंभ का आयोजन हो सके।

नासिक की धार्मिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय छवि

महंत जी ने नासिक की ऐतिहासिक-धार्मिक पहचान को रेखांकित करते हुए कहा कि मान्यता है कि भगवान राम यहाँ आए थे और शूर्पणखा की नाक कटने की घटना के कारण ही इस स्थान का नाम 'नासिक' पड़ा। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में यह संदेश जाना चाहिए कि नासिक कुंभ दिव्यता और भव्यता का प्रतीक है।

सरकार और प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा

महंत मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि जल्द ही कुंभ मेला मंत्री का दौरा प्रस्तावित है और वे उनके सामने भी सभी माँगें रखेंगे। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन से भी सहयोग की अपेक्षा जताई। उनका मानना है कि सनातन धर्म का इतना बड़ा पर्व बड़े अंतराल पर आता है, इसलिए इसकी तैयारियाँ भी उसी स्तर की होनी चाहिए। साधु-संत और प्रशासन के आपसी सहयोग से ही कुंभ सफल हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासनिक और कूटनीतिक — लेकिन असली कसौटी भूमि आवंटन और घाट पुनर्निर्माण जैसी ठोस कार्रवाइयाँ हैं जो अभी तक शुरू नहीं हुई हैं। मांस-मछली-शराब बंदी की माँग राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और इस पर प्रशासन की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि राज्य सरकार साधु समाज को किस हद तक प्राथमिकता देती है। गौरतलब है कि भगदड़ से जुड़ी चिंताएँ महज भावनात्मक नहीं हैं — पिछले बड़े कुंभ और धार्मिक आयोजनों में यह त्रासदी हो चुकी है। यदि ज़मीन आवंटन और बुनियादी सुविधाएँ समय पर नहीं मिलीं, तो 'भव्य कुंभ' केवल एक नारा बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नासिक कुंभ मेले के पास मांस-मछली-शराब बिक्री बंद करने की माँग क्यों उठी?
निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख महंत मुरलीधर जी महाराज का कहना है कि नासिक भगवान राम की तपोभूमि है और कुंभ में देश-विदेश से भक्त आएंगे। उनके अनुसार, यदि पवित्र क्षेत्र के आसपास मांस-मछली-शराब बिकती दिखी, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तीर्थस्थल की छवि खराब होगी।
नासिक कुंभ में घाट सुरक्षा को लेकर क्या चिंता जताई गई है?
महंत मुरलीधर जी महाराज ने चेतावनी दी कि अकेले निर्वाणी अखाड़े में लगभग 50 हजार साधु-संत हैं। जब 100 से 1,000 संत एकसाथ स्नान के लिए उतरते हैं, तो सँकरी सीढ़ियों पर भगदड़ हो सकती है। उन्होंने हर सीढ़ी के बीच अतिरिक्त स्टेप बनाने की माँग की है।
नासिक कुंभ की तैयारियाँ अभी किस चरण में हैं?
महंत मुरलीधर जी महाराज के अनुसार, अखाड़े को अभी तक ज़मीन नापकर आवंटित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ज़मीन आवंटन के बाद ही व्यवस्थाएँ ठीक से हो पाएंगी और कुंभ की तैयारी आगे बढ़ेगी।
निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख ने महाराष्ट्र सरकार से क्या अपेक्षाएँ रखी हैं?
उन्होंने महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन से सहयोग की अपेक्षा जताई और कहा कि कुंभ मेला मंत्री के आगामी दौरे में भी सभी माँगें रखी जाएंगी। उनकी मुख्य माँगें हैं — भूमि आवंटन, घाट की सीढ़ियों का चौड़ीकरण, कुंभ क्षेत्र का विस्तार और मांस-मछली-शराब बंदी।
नासिक का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि भगवान राम वनवास के दौरान नासिक आए थे और शूर्पणखा की नाक कटने की घटना के कारण ही इस स्थान का नाम 'नासिक' पड़ा। यह स्थान हिंदू धर्म में एक प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है और कुंभ मेले का आयोजन यहाँ बारह वर्षों के अंतराल पर होता है।
राष्ट्र प्रेस
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