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भारतीय नौसेना को मिला पहला स्वदेशी बहुउद्देश्यीय पोत 'समर्थक', 75% स्वदेशी सामग्री से निर्मित

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भारतीय नौसेना को मिला पहला स्वदेशी बहुउद्देश्यीय पोत 'समर्थक', 75% स्वदेशी सामग्री से निर्मित

सारांश

भारतीय नौसेना को 27 अगस्त को पहला स्वदेशी बहुउद्देश्यीय पोत 'समर्थक' मिला — L&T के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में निर्मित, 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से लैस। यह पोत निगरानी, गश्त, आपदा राहत और तकनीकी परीक्षण — सभी भूमिकाओं में सक्षम है, और हिंद महासागर में भारत की नौसैनिक ताकत का नया प्रतीक है।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना को 27 अगस्त 2026 को देश का पहला स्वदेशी बहुउद्देश्यीय पोत 'समर्थक' सौंपा गया।
पोत का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में किया गया है।
इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
'समर्थक' समुद्री निगरानी, गश्त, मानवीय सहायता और बहुउद्देश्यीय परीक्षण प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा।
यह डिलीवरी हिंद महासागर में बढ़ती समुद्री सुरक्षा ज़रूरतों के बीच आत्मनिर्भर भारत अभियान की एक ठोस उपलब्धि है।

भारतीय नौसेना को 27 अगस्त 2026 को देश का पहला स्वदेशी बहुउद्देश्यीय पोत 'समर्थक' सौंपा गया — जो आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में घरेलू निर्माण क्षमता की एक ठोस उपलब्धि है। इस पोत का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (L&T) के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में किया गया है, और इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।

पोत की विशेषताएँ और क्षमताएँ

'समर्थक' की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहुआयामी भूमिका निभाने की क्षमता है। यह पोत किसी एकल मिशन तक सीमित नहीं है — समुद्री निगरानी, टोह अभियान और समुद्री गश्त से लेकर विभिन्न नौसैनिक गतिविधियों को सहायता प्रदान करने तक, इसे व्यापक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम है।

नौसेना के अनुसार, 'समर्थक' को एक बहुउद्देश्यीय परीक्षण और मूल्यांकन प्लेटफॉर्म के रूप में भी विकसित किया गया है। इसका अर्थ है कि नौसेना इस पोत का उपयोग अलग-अलग प्रणालियों और नई तकनीकों के परीक्षण एवं मूल्यांकन के लिए कर सकेगी — जो भविष्य के नौसैनिक प्लेटफॉर्म विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्वदेशी निर्माण की दिशा में बड़ा कदम

पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में घरेलू डिज़ाइन, निर्माण और औद्योगिक क्षमताओं को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है। गौरतलब है कि यह डिलीवरी ऐसे समय हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी और सुरक्षा की रणनीतिक भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।

'समर्थक' शब्द का अर्थ है — समर्थन देने वाला या किसी कार्य को आगे बढ़ाने वाला। यह नाम इस पोत के व्यापक उद्देश्य को सटीक रूप से परिभाषित करता है।

रणनीतिक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद महासागर में अपनी नौसैनिक उपस्थिति को और सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है। बहुउद्देश्यीय और स्वदेशी पोत न केवल नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। L&T के कट्टुपल्ली शिपयार्ड द्वारा इस पोत का निर्माण भारत के निजी रक्षा क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का भी प्रमाण है।

आगे की राह

'समर्थक' का नौसेना में शामिल होना भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। बदलती परिचालन ज़रूरतों के अनुसार इसे अलग-अलग भूमिकाओं में तैनात किया जा सकेगा, जिससे यह नौसेना के बेड़े में एक लचीला और दीर्घकालिक संसाधन साबित होगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के स्वदेशी पोतों की श्रृंखला भारत को आयात पर निर्भरता घटाने और रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाने में सहायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी इसकी परिचालन तैनाती होगी — विशेष रूप से तब जब हिंद महासागर में चीन की नौसैनिक गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं। 75% स्वदेशी सामग्री का आँकड़ा उत्साहजनक है, परंतु रक्षा विश्लेषकों का सवाल यह है कि शेष 25% आयातित घटकों की आपूर्ति श्रृंखला कितनी सुरक्षित है। L&T जैसे निजी शिपयार्ड को इस तरह के महत्वपूर्ण अनुबंध मिलना भारत की रक्षा नीति में सार्थक बदलाव का संकेत है, लेकिन इस मॉडल को स्केल करने के लिए नीतिगत निरंतरता और दीर्घकालिक वित्तपोषण की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय नौसेना का पोत 'समर्थक' क्या है?
'समर्थक' भारत का पहला स्वदेशी बहुउद्देश्यीय नौसैनिक पोत है, जिसे 27 अगस्त 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया। इसे लार्सन एंड टुब्रो के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में निर्मित किया गया है और इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
'समर्थक' पोत का निर्माण कहाँ हुआ?
इस पोत का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (L&T) के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में किया गया है। यह शिपयार्ड भारत के प्रमुख निजी रक्षा जहाज निर्माण केंद्रों में से एक है।
'समर्थक' पोत किन-किन कार्यों के लिए उपयोग किया जाएगा?
यह पोत समुद्री निगरानी, टोह अभियान, समुद्री गश्त, नौसैनिक गतिविधियों को सहायता, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में काम आएगा। इसके अलावा इसे एक बहुउद्देश्यीय परीक्षण और मूल्यांकन प्लेटफॉर्म के रूप में भी इस्तेमाल किया जाएगा।
इस पोत में स्वदेशी सामग्री कितनी है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
'समर्थक' में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में घरेलू निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह भारत की आयात निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है।
हिंद महासागर क्षेत्र में 'समर्थक' की क्या भूमिका होगी?
हिंद महासागर में बढ़ती समुद्री निगरानी और सुरक्षा की ज़रूरतों के बीच 'समर्थक' नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा। इसकी बहुउद्देश्यीय प्रकृति इसे विभिन्न रणनीतिक परिस्थितियों में लचीले ढंग से तैनात करने में सक्षम बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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