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'गूंगी गुड़िया' टिप्पणी पर एनसीपी का पलटवार: क्या कांग्रेस इंदिरा गांधी की आलोचना को दे रही मान्यता?

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'गूंगी गुड़िया' टिप्पणी पर एनसीपी का पलटवार: क्या कांग्रेस इंदिरा गांधी की आलोचना को दे रही मान्यता?

सारांश

कांग्रेस के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया। सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहने पर एनसीपी ने पलटवार किया और पूछा — क्या यही वह भाषा है जो कभी इंदिरा गांधी के लिए इस्तेमाल हुई थी? महिला गरिमा और राजनीतिक संस्कृति का यह टकराव अब राष्ट्रीय बहस बन चुका है।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में महाराष्ट्र उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहकर संबोधित किया।
एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कांग्रेस से पूछा कि क्या यह शब्दावली इंदिरा गांधी पर की गई ऐतिहासिक आलोचना को वैधता देती है।
पाटिल ने कहा कि इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश मुक्ति युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपने रुख से वैश्विक प्रशंसा अर्जित की थी।
एनसीपी पदाधिकारी सूरज चव्हाण ने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस खंडित नेतृत्व की स्थिति में है।
एनसीपी ने कांग्रेस से अपमानजनक टिप्पणी वापस लेने और गरिमापूर्ण भाषा अपनाने की मांग की।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) — सुनेत्रा पवार गुट — ने मंगलवार, 4 अगस्त को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जब कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहकर संबोधित किया। एनसीपी ने इस शब्दावली को न केवल अपमानजनक बताया, बल्कि यह भी पूछा कि क्या कांग्रेस इस वाक्यांश के ज़रिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर की गई ऐतिहासिक आलोचना को परोक्ष रूप से वैधता दे रही है।

विवाद की जड़: कांग्रेस का सोशल मीडिया पोस्ट

कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सवाल उठाया था कि आखिर कब तक सुनेत्रा पवार 'गूंगी गुड़िया' बनकर रहेंगी — यह टिप्पणी उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की पत्नी और एनसीपी नेता सुनेत्रा पवार के संदर्भ में की गई थी। इस पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में तत्काल प्रतिक्रिया उत्पन्न की।

एनसीपी की तीखी प्रतिक्रिया

एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा, 'क्या कांग्रेस 'गूंगी गुड़िया' जैसे अपमानजनक वाक्यांश का सहारा लेकर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी पर लक्षित ऐतिहासिक आलोचना को परोक्ष रूप से वैधता प्रदान कर रही है?' पाटिल ने रेखांकित किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक मतभेद और नीति-आलोचना स्वाभाविक हैं, परंतु महिलाओं के विरुद्ध अपमानजनक भाषा का राजनीति में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

इंदिरा गांधी का ऐतिहासिक संदर्भ

पाटिल ने ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के राजनीतिक सफर की शुरुआत में उनके प्रतिद्वंद्वियों ने भी इसी तरह की अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा, 'इंदिरा गांधी ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को बयानों से नहीं, बल्कि अपनी उपलब्धियों से जवाब दिया। बांग्लादेश मुक्ति युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर उनके दृढ़ रुख ने उन्हें वैश्विक मान्यता दिलाई और उनके आलोचक भी उनकी प्रशंसा करने को विवश हुए।'

महिला गरिमा और राजनीतिक संस्कृति पर सवाल

पाटिल ने मांग की कि कांग्रेस इस अपमानजनक टिप्पणी को वापस ले और सार्वजनिक विमर्श में गरिमापूर्ण भाषा का पालन करे। उन्होंने कहा कि इस तरह की शब्दावली से राजनीतिक संस्कृति और महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण की पूरी तस्वीर सामने आती है।

एनसीपी पदाधिकारी सूरज चव्हाण ने भी कांग्रेस की आलोचना की। उनके अनुसार, कांग्रेस की परंपरागत रूप से सभ्य राजनीतिक विचारधारा रही है, लेकिन वर्तमान में पार्टी अपनी उस विचारधारा और जनाधार से कट चुकी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान केवल भाषणों में नहीं, विचारों में भी प्रतिबिंबित होना चाहिए। चव्हाण ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस इस समय खंडित नेतृत्व की स्थिति में है।

आगे क्या

यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में महिला नेताओं के प्रति भाषाई मर्यादा और राजनीतिक शिष्टाचार के व्यापक प्रश्न को केंद्र में ले आया है। कांग्रेस की ओर से अब तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और यह देखना होगा कि पार्टी अपना पक्ष किस प्रकार रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह शब्द कभी इंदिरा गांधी के विरोधियों ने उनके लिए इस्तेमाल किया था — और उसे कांग्रेस ने दशकों तक लैंगिक अपमान के प्रतीक के रूप में याद रखा। एनसीपी ने इस विरोधाभास को कुशलता से भुनाया है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्षी दलों की सोशल मीडिया टीमें नीतिगत आलोचना और व्यक्तिगत अपमान के बीच की रेखा को समझती हैं — क्योंकि यही रेखा जनता के विश्वास को तय करती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'गूंगी गुड़िया' विवाद क्या है और यह कैसे शुरू हुआ?
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहकर संबोधित किया, जिसके बाद एनसीपी ने 4 अगस्त को कड़ी आपत्ति जताई। एनसीपी ने इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा बताते हुए माफी की मांग की।
एनसीपी ने इंदिरा गांधी का ज़िक्र क्यों किया?
एनसीपी प्रवक्ता उमेश पाटिल ने बताया कि 'गूंगी गुड़िया' जैसी शब्दावली का इस्तेमाल कभी इंदिरा गांधी के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने उनके शुरुआती राजनीतिक जीवन में किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस इस भाषा को दोहराकर उस ऐतिहासिक आलोचना को वैधता दे रही है।
एनसीपी ने कांग्रेस से क्या मांग की है?
एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कांग्रेस से मांग की है कि वह इस अपमानजनक टिप्पणी को वापस ले और सार्वजनिक विमर्श में गरिमापूर्ण भाषा का पालन सुनिश्चित करे।
इस विवाद में सूरज चव्हाण की क्या भूमिका रही?
एनसीपी पदाधिकारी सूरज चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस की परंपरागत सभ्य विचारधारा रही है, लेकिन वर्तमान में पार्टी उससे भटक चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस इस समय खंडित नेतृत्व की स्थिति में है।
इस विवाद का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद महिला नेताओं के प्रति राजनीतिक भाषा और शिष्टाचार के व्यापक प्रश्न को सामने लाता है। कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में और गहरा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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