संसद मानसून सत्र: NDA सांसदों का विपक्ष पर हमला, हंगामे को बताया लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र के दौरान 20 जुलाई को राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई सांसदों और नेताओं ने विपक्ष के संसदीय व्यवधान, परिसीमन, नीट परीक्षा विवाद और सीजेपी के विरोध मार्च पर कड़ी प्रतिक्रियाएँ दीं। BJP नेताओं ने एकस्वर में कहा कि संसद संवाद का मंच है, टकराव का नहीं, और हंगामे की राजनीति लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रतिकूल है।
कंगना रनौत: संसद संवाद का मंच, टकराव का नहीं
BJP सांसद कंगना रनौत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संसद सत्र का उद्देश्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, 'विरोध प्रदर्शन के नाम पर हंगामा करना और संसदीय कार्यवाही में बाधा डालना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।'
रनौत ने यह भी स्पष्ट किया कि जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सरकार को चुना है और यदि किसी दल को सरकार की नीतियों पर आपत्ति है, तो उसे चुनावी मैदान में जनता का समर्थन प्राप्त करना चाहिए। केवल विरोध प्रदर्शन के ज़रिए सरकारी नियुक्तियों या नीतियों पर दबाव बनाना उचित नहीं है।
अशोक मित्तल: TMC के अलग गुट पर संवैधानिक टिप्पणी
BJP के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसदों द्वारा अलग गुट बनाए जाने पर कहा कि संविधान के तहत सांसदों को अलग समूह बनाने का अधिकार है और इसका विरोध करने का कोई औचित्य नहीं। हालाँकि, उन्होंने वॉकआउट को भी संविधान की भावना के विपरीत बताया।
रेखा शर्मा: परिसीमन ज़रूरी, व्यापक समर्थन मिलेगा
BJP नेता रेखा शर्मा ने परिसीमन के मुद्दे पर कहा कि यह एक लंबी और आवश्यक प्रक्रिया है। उनके अनुसार, कई क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है क्योंकि समय पर परिसीमन नहीं हुआ। उन्होंने विश्वास जताया कि इस विषय पर आने वाले विधेयक को व्यापक समर्थन प्राप्त होगा।
कमलजीत सहरावत: नीट और सीजेपी मार्च पर BJP का पक्ष
BJP सांसद कमलजीत सहरावत ने नीट परीक्षा विवाद पर कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह संवेदनशील है और गड़बड़ियों के लिए ज़िम्मेदार बिचौलियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
सीजेपी के विरोध मार्च पर सहरावत ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने के लिए उचित मंच उपलब्ध हैं, लेकिन अराजकता फैलाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि मानसून सत्र में अब तक कई बार कार्यवाही बाधित हो चुकी है।
आगे क्या
मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक, नीट सुधार और अन्य विधायी एजेंडे पर चर्चा अपेक्षित है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच यह तनातनी आने वाले दिनों में संसदीय कामकाज की दिशा तय करेगी।