21 जुलाई 2026
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कंगना रनौत बोलीं — 'संसद के बाहर CJP भीड़ देख डर गए थे, दिल्ली पुलिस ने ढाल बनकर बचाया'

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कंगना रनौत बोलीं — 'संसद के बाहर CJP भीड़ देख डर गए थे, दिल्ली पुलिस ने ढाल बनकर बचाया'

सारांश

संसद के बाहर CJP प्रदर्शन के दौरान भीड़ इतनी आक्रामक थी कि संसद के गेट बंद करने पड़े। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने खुद चोटें सहकर सांसदों की ढाल बनकर सुरक्षा की — और विरोध प्रदर्शन की जगह संसद को बताया।

मुख्य बातें

कंगना रनौत ने 21 जुलाई को मीडिया से बातचीत में CJP के संसद-बाहर प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि भीड़ के आक्रामक रूप से सभी घबरा गए और संसद के गेट बंद करने पड़े।
दिल्ली पुलिस ने खुद चोटें सहकर सांसदों व उपस्थित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
कंगना ने मानसून सत्र में पहले भी कहा था कि सरकार पर दबाव बनाने का माध्यम प्रदर्शन नहीं, चुनाव होना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर के आसपास विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।

भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने 21 जुलाई को मीडिया से बातचीत में संसद के बाहर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान माहौल अत्यंत तनावपूर्ण हो गया था और वहाँ मौजूद लोग भय में आ गए थे। साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों ने खुद को खतरे में डालकर भी सबकी सुरक्षा सुनिश्चित की।

मुख्य घटनाक्रम

कंगना रनौत ने कहा, 'प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ को देखकर संसद में हर कोई बेहद घबरा गया था। सुरक्षा के लिहाज से संसद के गेट तक बंद करने पड़े, जिससे सभी लोग अंदर एक तरह से कैद हो गए थे।' उन्होंने आगे कहा कि भीड़ का आक्रामक रूप देखकर हमले का अंदेशा बना हुआ था।

यह प्रदर्शन नई दिल्ली में संसद भवन के निकट CJP द्वारा आयोजित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्व में ही बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए थे और संसद के आसपास विशेष सुरक्षा घेरा बनाया गया था।

दिल्ली पुलिस की सराहना

कंगना ने दिल्ली पुलिस को श्रेय देते हुए कहा, 'मैं दिल्ली पुलिस की सराहना करती हूँ कि उन्होंने हमारे लिए ढाल का काम किया। पुलिस अधिकारियों ने खुद चोटें सहकर भी जनमानस की सुरक्षा सुनिश्चित की।' प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार स्थिति तनावपूर्ण हुई, जिसे बल की तैनाती से नियंत्रित किया गया।

मानसून सत्र में कंगना का पूर्व बयान

गौरतलब है कि इससे पूर्व मानसून सत्र के दौरान भी कंगना ने मीडिया से बात करते हुए विरोध प्रदर्शनों पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था, 'किसी को पद से हटाने या रखने के लिए सरकार पर दबाव बनाना गलत है। सार्वजनिक मुद्दों पर बहस के लिए संसद सही जगह है, न कि आंदोलन।' उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी दल या नेता को सरकार की नीतियों पर आपत्ति है तो उसे चुनाव लड़कर जनता का समर्थन प्राप्त करना चाहिए।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब संसद सत्र के दौरान विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन आम होते जा रहे हैं। CJP के इस प्रदर्शन ने संसद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से सवाल खड़े किए हैं। कंगना रनौत का यह बयान संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर जारी बहस में एक नई आवाज़ जोड़ता है।

आगे क्या

फिलहाल CJP प्रदर्शन और उससे जुड़े सुरक्षा प्रबंधों को लेकर कोई आधिकारिक जाँच की घोषणा नहीं हुई है। संसद सत्र के शेष दिनों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह बयानबाज़ी विपक्षी आवाज़ों को कमज़ोर करने की रणनीति का हिस्सा है। दिल्ली पुलिस की तारीफ स्वाभाविक है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि प्रदर्शन की अनुमति किन शर्तों पर दी गई और सुरक्षा चूक कहाँ हुई।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंगना रनौत ने CJP प्रदर्शन पर क्या कहा?
कंगना रनौत ने कहा कि संसद के बाहर CJP की भारी और आक्रामक भीड़ को देखकर सभी लोग घबरा गए थे और सुरक्षा के लिए संसद के गेट बंद करने पड़े। उन्होंने दिल्ली पुलिस की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों ने खुद चोटें सहकर सांसदों की सुरक्षा की।
CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का संसद के बाहर प्रदर्शन किसलिए था?
CJP की ओर से नई दिल्ली में संसद भवन के निकट प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए और संसद परिसर के आसपास विशेष सुरक्षा घेरा बनाया गया।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान क्या भूमिका निभाई?
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और संसद में मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ी संख्या में बल तैनात किया। कंगना रनौत के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने खुद चोटें सहकर भी लोगों की ढाल बनकर काम किया।
कंगना रनौत ने विरोध प्रदर्शनों पर पहले क्या कहा था?
मानसून सत्र के दौरान कंगना ने कहा था कि सरकार पर किसी को पद से हटाने या रखने के लिए प्रदर्शन के ज़रिए दबाव बनाना गलत है। उनके अनुसार सार्वजनिक मुद्दों पर बहस का सही मंच संसद है और असहमति जताने का सही तरीका चुनाव लड़ना है।
इस प्रदर्शन का संसद की सुरक्षा पर क्या असर पड़ा?
प्रदर्शन को देखते हुए संसद के गेट बंद कर दिए गए और सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल कड़ा किया गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार स्थिति तनावपूर्ण हुई, जिससे संसद परिसर की सुरक्षा नीति पर नए सवाल उठे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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