एनडीए सांसद 23 जुलाई को संसद के मकर द्वार पर करेंगे विरोध प्रदर्शन, राहुल गांधी पर लगाया जिम्मेदारी से भागने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसद 23 जुलाई 2026, गुरुवार को संसद के मकर द्वार पर सुबह 10:30 बजे विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के निकट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) द्वारा किए गए धरने के जवाब में आयोजित किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया है कि विपक्ष संसदीय जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ रहा है और केवल हंगामा खड़ा करने की रणनीति अपना रहा है।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ मिलकर 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के पास धरना दिया था। यह धरना नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ था। बाद में पुलिस ने उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया था।
BJP का पक्ष और बांसुरी स्वराज का बयान
BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'उन्होंने (राहुल गांधी) कहा था कि अगर सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है, तो हम यहाँ से चले जाएँगे। चूँकि बातचीत के ज़रिए समाधान निकालना PM मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीति है, इसलिए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह वहाँ पहुँचे और राहुल गांधी से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन लोकसभा में विपक्ष के नेता अपनी बात से पीछे हट गए।'
स्वराज ने यह भी दावा किया कि विपक्ष की ओर से सदन में पेपर लीक पर चर्चा के लिए कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा, 'संसद में 193 नोटिस दिया गया। मैंने भी नीट परीक्षा पर खुली चर्चा के लिए एक नोटिस दिया, क्योंकि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। हम देश के छात्रों के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।'
विपक्ष पर सरकार का आरोप
BJP का कहना है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल संसदीय परंपराओं को दरकिनार कर सड़क पर प्रदर्शन का रास्ता चुन रहे हैं, जबकि सरकार सदन के भीतर नीट मुद्दे पर खुली बहस के लिए तैयार है। यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद पूरे देश में छात्रों और अभिभावकों की चिंता का केंद्र बना हुआ है।
आगे क्या होगा
एनडीए सांसदों के मकर द्वार पर प्रदर्शन के बाद संसद के भीतर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव और तेज़ होने की संभावना है। नीट पेपर लीक पर संसद में चर्चा की माँग और सरकार की जवाबदेही का सवाल आने वाले सत्र में केंद्रीय मुद्दा बना रहेगा।