उजड़ी जातियों को संवैधानिक अधिकार दिलाना एनडीए की प्राथमिकता: संजय निषाद
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कहा कि देश की आज़ादी के लिए जिन लोगों ने अपना सर्वस्व बलिदान किया — तलवार और तोप का सामना किया, फाँसी के फंदे को गले लगाया — उनकी पिछली सरकारों ने कभी सुध नहीं ली। निषाद के अनुसार, एनडीए सरकार अब उन उजड़ी और विस्थापित जातियों को फिर से स्थापित करने और उनके संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।
उजड़ी जातियों के उत्थान का दावा
संजय निषाद ने कहा कि अंग्रेज़ों और मुग़लों के दौर में जो समाज विस्थापित हुए, उन्हें पिछली व्यवस्थाओं के 'गजट और बजट' ने और भी हाशिये पर धकेल दिया। उन्होंने कहा, एनडीए सरकार इन तबकों के संवैधानिक अधिकारों के लिए हमेशा आवाज़ उठाती रहेगी। उनके अनुसार, जो निर्बल हैं उन्हें सबल बनाना इस सरकार की मूल प्राथमिकता है।
सपा पर सीधा निशाना
निषाद ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि वे सत्ता में रहते हुए शहीदों को याद करते, तिरंगा यात्रा निकालते और उजड़ी जातियों के उत्थान के लिए कार्य करते, तो उसका कोई अर्थ होता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में महिलाओं की घोर उपेक्षा हुई और उनके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
आत्मनिर्भरता बनाम सीधी नकद सहायता
निषाद ने सामाजिक कल्याण की अवधारणा पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में केवल पैसा बाँटना स्थायी समाधान नहीं है। उनके शब्दों में, बेहतर नीतियों और योजनाओं के ज़रिये रोज़गार उपलब्ध कराना और लोगों को आत्मनिर्भर बनाना ही असली विकास है। उन्होंने दावा किया कि एनडीए सरकार रोज़गार के अवसर देने के साथ-साथ उन्हें हासिल करने के लिए ज़रूरी सहयोग भी प्रदान कर रही है।
स्वतंत्रता दिवस पर राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 78वें स्वतंत्रता दिवस पर विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी उपलब्धियाँ गिनाने में जुटे हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच निषाद जैसे नेताओं का उजड़ी और पिछड़ी जातियों पर ध्यान केंद्रित करना राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। निषाद पार्टी परंपरागत रूप से मछुआरों और नाविक समुदायों का प्रतिनिधित्व करती है, जो उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
आगे की राह
संजय निषाद ने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार उन समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी जो ऐतिहासिक रूप से हाशिये पर रहे हैं। उनके बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में इन जातियों के लिए विशेष नीतिगत कदमों की घोषणा हो सकती है।