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नीट परीक्षा केंद्र विवाद: वडेट्टीवार का केंद्र पर हमला — 'बच्चों को अबू धाबी भेजो, शर्म नहीं आती?'

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नीट परीक्षा केंद्र विवाद: वडेट्टीवार का केंद्र पर हमला — 'बच्चों को अबू धाबी भेजो, शर्म नहीं आती?'

सारांश

नागपुर के एक छात्र को री-नीट के लिए अबू धाबी का परीक्षा केंद्र मिलना महज प्रशासनिक चूक नहीं — यह उस बड़े संकट का प्रतीक है जिसे कांग्रेस नेता वडेट्टीवार ने 'शिक्षा व्यवस्था की बर्बादी' कहा। उनकी माँग है कि शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लें और पद छोड़ें।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने 20 जून को नागपुर में री-नीट परीक्षा केंद्र विवाद पर केंद्र सरकार को घेरा।
नागपुर के एक छात्र को री-नीट के लिए अबू धाबी परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया, जिसे वडेट्टीवार ने शिक्षा व्यवस्था की विफलता बताया।
उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की माँग की।
संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए दल-बदल की राजनीति को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
एनसीपी (शरद पवार) में टूट की अटकलों पर कहा — भविष्य में क्या होगा, यह समय बताएगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने 20 जून को नागपुर में री-नीट परीक्षा केंद्र आवंटन की व्यवस्था पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। नागपुर के एक छात्र को री-नीट के लिए परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी आवंटित किए जाने की घटना को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की घोर विफलता बताया। उन्होंने कहा कि यदि देश में परीक्षा ठीक से आयोजित नहीं की जा सकती, तो इसकी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए।

अबू धाबी केंद्र आवंटन पर तीखी प्रतिक्रिया

वडेट्टीवार ने कहा, 'अगर महाराष्ट्र या पूरे हिंदुस्तान में इस परीक्षा को ठीक ढंग से आयोजित नहीं किया जा सकता, तो फिर सभी बच्चों का सेंटर अबू धाबी ही कर दिया जाए। फ्लाइट भर-भर कर बच्चों को वहाँ ले जाइए। कुछ तो शर्म होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी माँग की कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस प्रकार की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें।

सरकार पर शिक्षा व्यवस्था बर्बाद करने का आरोप

वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता केवल सत्ता और कुर्सी बचाना रह गई है, छात्रों के भविष्य से उसे कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा, 'ये लोग शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करना चाहते हैं। बच्चों के भविष्य को लेकर इन्हें कोई चिंता नहीं है।' गौरतलब है कि नीट परीक्षा विवाद पहले से ही पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है, और री-नीट की प्रक्रिया में यह नया विवाद उस आग में घी का काम कर रहा है।

एकनाथ शिंदे और राहुल गांधी पर टिप्पणी

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस बयान पर — कि 'जो भी राहुल गांधी के साथ गया, वह बर्बाद हो गया' — वडेट्टीवार ने संयमित लेकिन सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'राजनीति में परिस्थितियाँ लगातार बदलती हैं। आज किसी के दिन खराब हैं तो उसे कोसना उचित नहीं। सबके अच्छे दिन भी आते हैं और बुरे दिन भी। राजनीति में समय के साथ खुद को ढालकर आगे बढ़ना चाहिए।'

दल-बदल और लोकतंत्र पर चिंता

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत की बागी नेताओं पर टिप्पणी के संदर्भ में वडेट्टीवार ने संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों को तोड़कर दूसरी पार्टियों में ले जाने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की अवधारणा के पीछे भी विपक्षी दलों को कमजोर करने की मानसिकता दिखती है, और देश को एकदलीय व्यवस्था की ओर धकेला जा रहा है।

एनसीपी टूट और युवाओं की भूमिका

एनसीपी (शरद पवार) में संभावित टूट की अटकलों पर वडेट्टीवार ने कहा कि भविष्य में कौन पार्टी छोड़ेगा और कौन रहेगा, इसका जवाब समय देगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की सोच में सभी पार्टियों को खत्म करके केवल एक पार्टी रखने की मंशा दिखाई देती है। वडेट्टीवार ने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए आगे आएँ, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परीक्षा केंद्र आवंटन में इस स्तर की चूक के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए — यह सवाल दलगत राजनीति से परे है। साथ ही, दल-बदल और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर उनकी टिप्पणियाँ विपक्ष की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं जो हर शिक्षा या प्रशासनिक विफलता को संवैधानिक संकट के बड़े आख्यान से जोड़ती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागपुर के छात्र को री-नीट के लिए अबू धाबी केंद्र क्यों मिला?
रिपोर्टों के अनुसार, री-नीट परीक्षा के लिए केंद्र आवंटन प्रक्रिया में नागपुर के एक छात्र को अबू धाबी का केंद्र दिया गया। इस आवंटन के कारणों का आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी तक सामने नहीं आया है और यह मामला विवाद का विषय बना हुआ है।
विजय वडेट्टीवार ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की माँग क्यों की?
वडेट्टीवार ने कहा कि नीट परीक्षा केंद्र आवंटन जैसी घटनाएँ शिक्षा व्यवस्था की विफलता दर्शाती हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार छात्रों के भविष्य के प्रति उदासीन है।
री-नीट परीक्षा क्या है और यह विवाद क्यों हुआ?
री-नीट उन छात्रों के लिए आयोजित परीक्षा है जिन्हें पूर्व में हुई नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के कारण दोबारा परीक्षा देने का अवसर दिया गया। परीक्षा केंद्र आवंटन में हुई इस चूक ने पहले से विवादास्पद इस प्रक्रिया को और सवालों के घेरे में ला दिया है।
वडेट्टीवार ने दल-बदल विरोधी कानून का उल्लेख क्यों किया?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की बागी नेताओं पर टिप्पणी के संदर्भ में वडेट्टीवार ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया। उनका कहना था कि सांसदों-विधायकों को तोड़कर दूसरी पार्टियों में ले जाने की प्रवृत्ति संवैधानिक मूल भावना के विरुद्ध है और लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
एनसीपी (शरद पवार) में टूट को लेकर वडेट्टीवार ने क्या कहा?
वडेट्टीवार ने कहा कि भविष्य में कौन पार्टी छोड़ेगा और कौन रहेगा, यह समय बताएगा। उन्होंने इशारा किया कि कुछ लोगों की मंशा सभी विपक्षी दलों को समाप्त कर एकदलीय व्यवस्था स्थापित करने की है।
राष्ट्र प्रेस
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