27 जुलाई 2026
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मोदी के 4399 दिन: पूर्व नागालैंड CM जमीर बोले — 'नेहरू दार्शनिक, मोदी व्यवहारिक नेता'

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मोदी के 4399 दिन: पूर्व नागालैंड CM जमीर बोले — 'नेहरू दार्शनिक, मोदी व्यवहारिक नेता'

सारांश

नेहरू के संसदीय सचिव रह चुके पूर्व नागालैंड CM एस.सी. जमीर ने मोदी के 4,399 दिन पूरे होने पर दोनों नेताओं की तुलना की — नेहरू को दार्शनिक और मोदी को व्यवहारिक बताया। पूर्वोत्तर विकास, आर्थिक बदलाव और नागा शांति प्रक्रिया को मोदी की बड़ी उपलब्धि करार दिया।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 4,399 दिन 10 जून 2026 को पूरे हुए।
पूर्व नागालैंड CM एस.सी.
जमीर — जो नेहरू के संसदीय सचिव रह चुके हैं — ने नेहरू को दार्शनिक और मोदी को व्यवहारिक नेता बताया।
जमीर के अनुसार मोदी किसी भी समस्या को बिना मध्यस्थ के सीधे संवाद से सुलझाते हैं।
नेहरू युग की नियोजित अर्थव्यवस्था की तुलना में मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना।
जमीर के CM कार्यकाल में नागालैंड का बजट ₹10–20 करोड़ था; आज निवेश का स्तर कई गुना बढ़ा।
पहली बार नागा उग्रवादी संगठनों ने दो राजनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर की सहमति दी — जमीर ने इसे ऐतिहासिक बताया।

नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री एस.सी. जमीर ने 10 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे होने के अवसर पर उनकी नेतृत्व शैली की विस्तार से प्रशंसा की। नेहरू के संसदीय सचिव रह चुके जमीर ने दोनों प्रधानमंत्रियों की कार्यशैली की तुलना करते हुए कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू एक दार्शनिक सोच वाले नेता थे, जबकि नरेंद्र मोदी पूरी तरह व्यवहारिक नेता हैं।

नेहरू और मोदी की कार्यशैली में अंतर

जमीर ने कहा कि नेहरू के दौर में प्रशासनिक व्यवस्था काफी हद तक अधिकारियों और संस्थागत प्रक्रियाओं पर निर्भर थी, जिसके कारण जमीनी समस्याएं कई बार सीधे प्रधानमंत्री तक नहीं पहुंच पाती थीं। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत प्रधानमंत्री मोदी किसी भी मुद्दे को केवल अधिकारियों के भरोसे नहीं छोड़ते।

जमीर के अनुसार, मोदी ने स्वयं कहा है — 'यदि आप कोई समस्या उनके सामने रखते हैं तो वह बिना किसी मध्यस्थ के खुद उस पर ध्यान देते हैं और समाधान निकालने का प्रयास करते हैं।' यह प्रत्यक्ष संवाद और व्यक्तिगत भागीदारी की शैली उन्हें विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत जैसे क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति से जोड़ती है।

औपनिवेशिक प्रशासन से भारतीय कार्यप्रणाली तक

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी के शुरुआती वर्षों में प्रशासन पर ब्रिटिश कार्यशैली और औपनिवेशिक संस्कृति का गहरा प्रभाव था। उन्होंने कहा कि आज भारत ने अपनी स्वतंत्र कार्यप्रणाली विकसित कर ली है, जिससे प्रधानमंत्री मोदी आम लोगों और विभिन्न वर्गों के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक सुलभ दिखाई देते हैं।

जमीर ने यह भी कहा कि पीएम मोदी खुलकर अपनी बात रखते हैं और अपनी राय स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हैं — जो उनके कई पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों से अलग शैली है।

आर्थिक नीति: नियोजित अर्थव्यवस्था से बाज़ार-केंद्रित सोच तक

देश की आर्थिक नीतियों का जिक्र करते हुए जमीर ने कहा कि नेहरू सरकार ने सोवियत संघ की तर्ज पर नियोजित अर्थव्यवस्था का मॉडल अपनाया था, जहाँ लाइसेंस व्यवस्था और सरकारी नियंत्रण का व्यापक प्रभाव था। उनके मुताबिक उस व्यवस्था के कारण देश की आर्थिक प्रगति सीमित रही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आर्थिक सोच में आए बदलावों का असर आज दिखाई दे रहा है और भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।

पूर्वोत्तर भारत को अभूतपूर्व प्राथमिकता

जमीर ने पूर्वोत्तर भारत के विकास का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रहा। उन्होंने कहा कि मोदी के सत्ता में आने के बाद इस क्षेत्र को अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है और विकास परियोजनाओं व वित्तीय सहायता का स्तर पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है।

अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए जमीर ने कहा — 'जब मैं मुख्यमंत्री था तब कई बार बजट केवल ₹10 से ₹20 करोड़ के आसपास होता था, लेकिन आज पूर्वोत्तर क्षेत्र में होने वाला निवेश और विकास कार्य बिल्कुल अलग स्तर पर पहुंच चुका है।'

नागा शांति प्रक्रिया: ऐतिहासिक कदम

जमीर ने प्रधानमंत्री मोदी की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में नागा शांति प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहली बार नागा उग्रवादी संगठनों ने दो महत्वपूर्ण राजनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर करने की सहमति दी — जिसे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है। गौरतलब है कि नागालैंड में दशकों पुरानी उग्रवाद की समस्या भारत की सबसे जटिल आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में से एक रही है। जमीर के अनुसार, आने वाले वर्षों में इस शांति प्रक्रिया और पूर्वोत्तर विकास के परिणाम और अधिक स्पष्ट होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस पीढ़ी के गवाह की है जिसने दोनों युगों को जिया। हालाँकि, यह ध्यान देने योग्य है कि मोदी की 'व्यवहारिकता' की तारीफ एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण पर आई है, जब सरकार पूर्वोत्तर में शांति और विकास की उपलब्धियों को रेखांकित कर रही है। नागा शांति प्रक्रिया पर हस्ताक्षर की बात सकारात्मक है, लेकिन अंतिम समझौता अभी भी अधूरा है — यह तथ्य मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ होता है। जमीर की प्रशंसा को उसकी पूरी पृष्ठभूमि में पढ़ा जाना चाहिए।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एस.सी. जमीर ने मोदी और नेहरू की तुलना में क्या कहा?
जमीर ने कहा कि पंडित नेहरू दार्शनिक सोच वाले नेता थे जबकि प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह व्यवहारिक नेता हैं। उनके अनुसार यही दोनों की कार्यशैली का सबसे बड़ा अंतर है।
एस.सी. जमीर कौन हैं और नेहरू से उनका क्या संबंध था?
एस.सी. जमीर नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में वे पंडित जवाहरलाल नेहरू के संसदीय सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, इसलिए उनकी तुलना प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित मानी जाती है।
मोदी के कार्यकाल में पूर्वोत्तर भारत का विकास कैसा रहा?
जमीर के अनुसार मोदी के सत्ता में आने के बाद पूर्वोत्तर को अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। उन्होंने बताया कि उनके मुख्यमंत्री काल में नागालैंड का बजट ₹10–20 करोड़ था, जबकि आज निवेश और विकास कार्य का स्तर कई गुना बढ़ चुका है।
नागा शांति प्रक्रिया में मोदी सरकार की क्या भूमिका रही?
जमीर ने कहा कि पहली बार नागा उग्रवादी संगठनों ने दो महत्वपूर्ण राजनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर की सहमति दी। उन्होंने इसे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया।
जमीर ने नेहरू की आर्थिक नीतियों पर क्या कहा?
जमीर ने कहा कि नेहरू सरकार ने सोवियत संघ की तर्ज पर नियोजित अर्थव्यवस्था अपनाई थी जहाँ लाइसेंस व्यवस्था और सरकारी नियंत्रण हावी था, जिससे आर्थिक प्रगति सीमित रही। उनके अनुसार मोदी के नेतृत्व में आई आर्थिक सोच का असर आज दिखाई दे रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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