नेहरू युग में सीमित बजट के बावजूद भारत को मिला था वैश्विक सम्मान: पप्पू यादव का मोदी सरकार पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 10 जून 2026 को पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के संदर्भ में केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में देश के पास सीमित संसाधन और छोटा बजट था, फिर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को गहरा सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त थी।
बजट बढ़ा, आम जनता की मुश्किलें भी
पप्पू यादव ने कहा कि आज देश का बजट पहले की तुलना में कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन इसके बावजूद आम नागरिकों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, विशेष रूप से मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोग और युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन वर्गों की आय और रोज़गार की स्थिति देश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर पेश करती है।
वादे और हकीकत: आतंकवाद, काला धन, बेरोज़गारी
सांसद ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि आतंकवाद, काले धन की वापसी और बेरोज़गारी के खिलाफ किए गए बड़े वादे अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि देश से आतंकवाद की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और काला धन वापस लाने का वादा भी केवल घोषणा तक सीमित रह गया। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार के तीसरे कार्यकाल की उपलब्धियों पर राष्ट्रीय बहस तेज़ है।
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मुद्दे पर पप्पू यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमज़ोर किया जा रहा है और चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने माँग की कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया जाना चाहिए और विपक्ष को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखना होगा।
असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप
बिहार सरकार में मंत्री निशांत कुमार को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेताओं की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने कहा कि यदि किसी ने तथ्यात्मक बात कही है तो उसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि डीज़ल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतें, शिक्षा और रोज़गार जैसी समस्याएँ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक दल जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाकर अनावश्यक विवादों को हवा देने का प्रयास कर रहे हैं।
आगे क्या
पप्पू यादव के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब बिहार में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और विपक्षी दल केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार हमलावर हैं। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन मामले में न्यायिक प्रक्रिया का रुख आने वाले दिनों में राजनीतिक परिदृश्य को और प्रभावित कर सकता है।