तनाव से बिगड़ता है नर्वस सिस्टम: योगासन से कैसे पाएं राहत, आयुष मंत्रालय की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
मानसिक तनाव और भावनात्मक अस्थिरता आज के दौर में सेंट्रल नर्वस सिस्टम को अत्यधिक सक्रिय कर देती है, जिससे नींद टूटना, चिड़चिड़ापन और शारीरिक थकान जैसी समस्याएं उभरती हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगासन इन समस्याओं को जड़ से नियंत्रित करने में कारगर साबित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़ाना मात्र 15–20 मिनट का योग अभ्यास मानसिक संतुलन बहाल कर सकता है।
तनाव नर्वस सिस्टम को कैसे प्रभावित करता है
आयुष मंत्रालय के अनुसार, लगातार मानसिक दबाव और भावनात्मक उथल-पुथल सेंट्रल नर्वस सिस्टम को ज़रूरत से अधिक सक्रिय कर देती है। इस अतिसक्रियता के कारण नींद आने में कठिनाई होती है, मन अशांत रहता है और शरीर की स्वाभाविक लय बिगड़ जाती है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो थकान, चिड़चिड़ापन और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जन्म ले सकती हैं।
योगासन किस तरह देता है राहत
योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योग अभ्यास कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करता है और नर्वस सिस्टम को पुनः संतुलित करता है। योग मन को शांत करने के साथ-साथ नींद के प्राकृतिक चक्र को भी बहाल करता है। जब मन स्थिर होता है, तो शरीर स्वतः अपनी प्राकृतिक लय में लौट आता है।
आयुष मंत्रालय का कहना है कि नियमित योग से न केवल नींद की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि भावनात्मक संतुलन भी मज़बूत होता है — जिससे रोज़मर्रा के तनाव को संभालना सहज हो जाता है।
व्यस्त दिनचर्या में योग को कैसे शामिल करें
विशेषज्ञों का सुझाव है कि व्यस्त जीवनशैली में भी प्राणायाम, ध्यान और सरल आसन जैसी छोटी-छोटी योग क्रियाएं बहुत लाभकारी होती हैं। रोज़ाना 15–20 मिनट का अभ्यास मानसिक शांति प्रदान करता है और अनिद्रा की समस्या को दूर करने में सहायक है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह या शाम के समय शांत वातावरण में योग करना सबसे अधिक प्रभावशाली रहता है।
किन्हें सबसे अधिक फायदा होगा
जो लोग अनिद्रा, चिंता या लगातार तनाव से पीड़ित हैं, उनके लिए योग को दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाना विशेष रूप से लाभदायक बताया गया है। योग अभ्यास से नर्वस सिस्टम की अतिसक्रियता धीरे-धीरे कम होती है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। गौरतलब है कि यह सलाह किसी चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है — गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श ज़रूरी है।