कल्पसर प्रोजेक्ट को मिली नीदरलैंड की 'एडवांस्ड इंजीनियरिंग एक्सपर्टीज', भारत-नीदरलैंड्स ने साइन किया LoI

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कल्पसर प्रोजेक्ट को मिली नीदरलैंड की 'एडवांस्ड इंजीनियरिंग एक्सपर्टीज', भारत-नीदरलैंड्स ने साइन किया LoI

सारांश

गुजरात के ड्रीम प्रोजेक्ट कल्पसर को मिली नीदरलैंड्स की 90 साल पुरानी जल इंजीनियरिंग विशेषज्ञता — पीएम मोदी की यूरोप यात्रा के दौरान दोनों देशों के जल मंत्रालयों के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए। खंभात की खाड़ी में मीठे पानी का विशाल जलाशय बनाने की यह महत्वाकांक्षी योजना अब वैश्विक तकनीकी आधार पर आगे बढ़ेगी।

मुख्य बातें

भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए आशय पत्र (LoI) पर हस्ताक्षर हुए।
पीएम नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के पीएम रॉब जेटेन के साथ 32 किलोमीटर लंबे ऐतिहासिक अफ्सलुइटडिज्क डैम का दौरा किया।
नीदरलैंड्स इस डैम के प्रबंधन का 90 वर्षों से अधिक का अनुभव और विशेषज्ञता भारत के साथ साझा करेगा।
कल्पसर परियोजना का लक्ष्य खंभात की खाड़ी में मीठे पानी का विशाल जलाशय बनाना और सौराष्ट्र को दक्षिण गुजरात से जोड़ना है।
30 मार्च 2026 को नीदरलैंड के राजदूत की गुजरात यात्रा के बाद 'इंडो-डच एक्सपर्ट ग्रुप' और जी2जी पार्टनरशिप पर सहमति बनी थी।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे जल प्रबंधन और सतत अवसंरचना में भारत-नीदरलैंड्स सहयोग की ऐतिहासिक घटना बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 से 20 मई 2026 तक चल रही यूरोप यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड्स ने गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) का आदान-प्रदान किया। यह समझौता भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच हुआ, जो जल प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाई देता है।

अफ्सलुइटडिज्क डैम: कल्पसर का वैश्विक रोल मॉडल

पीएम मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ ऐतिहासिक अफ्सलुइटडिज्क डैम का दौरा किया। यह 32 किलोमीटर लंबा डच बाँध खारे पानी की खाड़ी को मीठे पानी के विशाल भंडार में बदलने की अपनी क्षमता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। नीदरलैंड्स के पास इस परियोजना के प्रबंधन का 90 वर्षों से अधिक का अनुभव और विशेषज्ञता है, जो अब गुजरात के कल्पसर प्रोजेक्ट के लिए मार्गदर्शक बनेगी।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस अवसर पर कहा कि अफ्सलुइटडिज्क जल अभियांत्रिकी के क्षेत्र में एक वैश्विक मिसाल है, जो नवाचार और दूरदर्शी सोच के माध्यम से चुनौतियों को अवसरों में बदलता है।

कल्पसर परियोजना: गुजरात का ड्रीम प्रोजेक्ट

कल्पसर परियोजना का उद्देश्य खंभात की खाड़ी के पार एक विशाल मीठे पानी का जलाशय बनाना और सौराष्ट्र को दक्षिण गुजरात से जोड़ना है। यह परियोजना सिंचाई, जल सुरक्षा, ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, बेहतर संपर्क और क्षेत्रीय विकास जैसे कई मोर्चों पर व्यापक लाभ देने की क्षमता रखती है।

मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि नीदरलैंड्स की उन्नत इंजीनियरिंग विशेषज्ञता गुजरात में उन्नत जल इंजीनियरिंग, मीठे पानी के संरक्षण, बाढ़ प्रबंधन और एकीकृत अवसंरचना विकास के लिए नए अवसर खोलेगी।

इंडो-डच सहयोग की पृष्ठभूमि

यह सहयोग अचानक नहीं हुआ। 30 मार्च 2026 को नीदरलैंड के राजदूत के गुजरात दौरे के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ हुई बैठक में कल्पसर प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा के बाद 'इंडो-डच एक्सपर्ट ग्रुप' बनाने और जी2जी (Government-to-Government) पार्टनरशिप पर सहमति बनी थी।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जल संकट से निपटने के लिए वैश्विक विशेषज्ञता को अपनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। डच विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग से जल क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मज़बूत होने की उम्मीद है।

सीएम पटेल की प्रतिक्रिया और आगे की राह

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और सतत अवसंरचना के क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड्स सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आने वाली पीढ़ियों के लिए जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला और जल-सुरक्षित भविष्य बनाने के लिए विश्व स्तरीय नवाचार को अपना रहा है। आशय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद अब दोनों देशों के विशेषज्ञ समूह कल्पसर परियोजना की तकनीकी रूपरेखा पर मिलकर काम करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहला नहीं है। असली सवाल यह है कि इस बार इंडो-डच एक्सपर्ट ग्रुप की सिफारिशें ठोस क्रियान्वयन में कब और कैसे बदलेंगी। अफ्सलुइटडिज्क डैम नीदरलैंड की दशकों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और निरंतर निवेश का परिणाम है — गुजरात के लिए असली चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि परियोजना को वित्तीय और प्रशासनिक धरातल पर उतारने की है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कल्पसर परियोजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
कल्पसर परियोजना गुजरात की महत्वाकांक्षी जल अवसंरचना योजना है, जिसका उद्देश्य खंभात की खाड़ी के पार एक विशाल मीठे पानी का जलाशय बनाना और सौराष्ट्र को दक्षिण गुजरात से जोड़ना है। इससे सिंचाई, जल सुरक्षा, ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन और क्षेत्रीय विकास में व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत और नीदरलैंड्स के बीच कल्पसर पर क्या समझौता हुआ?
भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के अवसंरचना एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच कल्पसर परियोजना पर तकनीकी सहयोग के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता पीएम मोदी की मई 2026 की यूरोप यात्रा के दौरान हुआ।
अफ्सलुइटडिज्क डैम कल्पसर के लिए रोल मॉडल क्यों है?
नीदरलैंड का 32 किलोमीटर लंबा अफ्सलुइटडिज्क डैम खारे पानी की खाड़ी को मीठे पानी के विशाल भंडार में बदलने की तकनीक के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। नीदरलैंड्स के पास इस परियोजना के प्रबंधन का 90 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जो कल्पसर जैसी चुनौती के लिए सीधे प्रासंगिक है।
इंडो-डच एक्सपर्ट ग्रुप कब और कैसे बना?
30 मार्च 2026 को नीदरलैंड के राजदूत की गुजरात यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ हुई बैठक में कल्पसर प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा के बाद इंडो-डच एक्सपर्ट ग्रुप बनाने और जी2जी पार्टनरशिप पर सहमति बनी थी। यह ग्रुप दोनों देशों के विशेषज्ञों की मिलकर तकनीकी रूपरेखा तैयार करेगा।
कल्पसर परियोजना से गुजरात को क्या फायदे होंगे?
कल्पसर परियोजना से सिंचाई के लिए मीठे पानी की उपलब्धता, जल सुरक्षा, ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के बीच बेहतर संपर्क और समग्र क्षेत्रीय विकास जैसे व्यापक लाभ मिलने की संभावना है। नीदरलैंड्स की उन्नत इंजीनियरिंग विशेषज्ञता से बाढ़ प्रबंधन और जल संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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