3 नवंबर 2026
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दवा आयात के लिए 9 नए गेटवे: स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स नियम 43ए में संशोधन प्रस्तावित किया

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दवा आयात के लिए 9 नए गेटवे: स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स नियम 43ए में संशोधन प्रस्तावित किया

सारांश

दवाओं और मेडिकल डिवाइस के आयात को देश के हर कोने तक पहुँचाना आसान बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स नियम 43ए में बड़ा संशोधन प्रस्तावित किया है — हरियाणा से हैदराबाद तक 9 नए एंट्री पॉइंट, जिनमें नोएडा का नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को ड्रग्स नियम, 1945 के नियम 43ए में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया।
प्रस्ताव में 8 नए ICD , 1 SEZ (बोम्मसांद्रा, कर्नाटक) और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अधिकृत आयात स्थानों में जोड़ा जाएगा।
प्रभावित राज्यों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक शामिल हैं।
इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी , शिपमेंट क्लियरेंस में देरी कम होगी और हेल्थकेयर सप्लाई चेन मजबूत होगी।
प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति या सुझाव अवर सचिव (ड्रग्स रेगुलेशन) को भेजे जा सकते हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को ड्रग्स नियम, 1945 के नियम 43ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत देशभर में दवाओं, मेडिकल डिवाइस और कॉस्मेटिक्स के आयात के लिए अधिकृत एंट्री पॉइंट्स का नेटवर्क व्यापक किया जाएगा। इस प्रस्ताव में 8 नए इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), 1 विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और 1 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अधिकृत आयात स्थानों की सूची में जोड़ने की बात कही गई है। यह कदम हेल्थकेयर सप्लाई चेन को मजबूत करने और आयात प्रक्रिया को सुगम बनाने की दिशा में उठाया गया है।

प्रस्तावित नए आयात स्थान

मंत्रालय द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, प्रस्तावित नए स्थानों में हरियाणा के ICD सोनीपत, ICD पियाला और ICD हरसारू; उत्तर प्रदेश के ICD दादरी; गुजरात के ICD गांधीनगर/मुंद्रा; तेलंगाना के हैदराबाद में ICD सनत नगर और ICD थिम्मापुर; तथा कर्नाटक के बेंगलुरु में ICD व्हाइटफील्ड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कर्नाटक का SEZ बोम्मसांद्रा और उत्तर प्रदेश का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट — हवाई मार्ग से दवाओं के आयात के लिए — भी इस सूची में प्रस्तावित हैं।

ये सभी नए स्थान उस मौजूदा नेटवर्क के साथ जोड़े जाएंगे जिसमें मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित ICD धनाड और ICD तीही तथा पहले से अधिसूचित हवाई अड्डे पहले से शामिल हैं।

क्यों उठाया गया यह कदम

मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में आयातकों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट या वेयरहाउस से दूर के बंदरगाहों से खेप क्लियर करनी पड़ती है, जिससे अंदरूनी परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं। नए ICD और SEZ जोड़े जाने से आयातक अपनी उत्पादन और वितरण इकाइयों के निकट ही कस्टम क्लियरेंस पा सकेंगे। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, शिपमेंट की देरी में कटौती और समग्र परिचालन दक्षता में सुधार की उम्मीद है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत मेडिकल डिवाइस और फार्मा क्षेत्र में वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि एक सुलभ और वितरित आयात नेटवर्क न केवल बड़े आयातकों, बल्कि छोटे और मझोले हेल्थकेयर कारोबारियों के लिए भी पहुँच आसान बनाता है।

आम जनता और उद्योग पर असर

इस संशोधन से देश के विभिन्न क्षेत्रों में दवाओं, मेडिकल डिवाइस और कॉस्मेटिक्स की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होने की संभावना है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक — ये सभी प्रमुख फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस हब हैं। इन राज्यों में नए ICD की मंजूरी से स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स और आयातकों की लागत घटने की उम्मीद है, जो अंततः उपभोक्ता कीमतों पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयर रूट से दवा आयात के लिए प्रस्तावित करना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि यह उत्तर भारत में एक नया त्वरित आयात चैनल खोलेगा।

सुझाव और आपत्ति की प्रक्रिया

मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट संशोधन पर सार्वजनिक टिप्पणी आमंत्रित की है। जो भी पक्ष आपत्ति या सुझाव देना चाहते हैं, वे अवर सचिव (ड्रग्स रेगुलेशन), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को लिखित रूप में या ईमेल के माध्यम से अपनी राय भेज सकते हैं। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन आधिकारिक गजट पर उपलब्ध है।

यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है, तो भारत का दवा आयात नेटवर्क काफी विस्तृत हो जाएगा और हेल्थकेयर उत्पादों की सप्लाई चेन अधिक लचीली एवं उत्तरदायी बनेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके निहितार्थ व्यापक हैं — खासकर उत्तर भारत के लिए, जहाँ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ज़रिये एक नया त्वरित एयर इम्पोर्ट चैनल खुलने की संभावना है। असली सवाल यह है कि नए ICD और SEZ पर ड्रग इंस्पेक्शन और कस्टम क्लियरेंस की क्षमता कितनी जल्दी तैयार होगी — क्योंकि बिना पर्याप्त नियामकीय जनशक्ति के, नए गेटवे बोतलनेक बन सकते हैं। भारत की फार्मा सप्लाई चेन में पहले से ही कोल्ड-चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी चुनौती है, और नए एंट्री पॉइंट तभी सार्थक होंगे जब इनके साथ उचित भंडारण और निरीक्षण सुविधाएँ भी विकसित की जाएँ।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्रग्स नियम 43ए में प्रस्तावित संशोधन क्या है?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को ड्रग्स नियम, 1945 के नियम 43ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत दवाओं, मेडिकल डिवाइस और कॉस्मेटिक्स के आयात के लिए 8 नए ICD, 1 SEZ और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अधिकृत एंट्री पॉइंट्स में जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य आयात प्रक्रिया को सुगम बनाना और हेल्थकेयर सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
कौन-कौन से नए स्थान प्रस्तावित किए गए हैं?
प्रस्तावित स्थानों में हरियाणा के ICD सोनीपत, पियाला और हरसारू; उत्तर प्रदेश के ICD दादरी; गुजरात के ICD गांधीनगर/मुंद्रा; हैदराबाद के ICD सनत नगर और थिम्मापुर; बेंगलुरु के ICD व्हाइटफील्ड; कर्नाटक का SEZ बोम्मसांद्रा; और उत्तर प्रदेश में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं।
इस बदलाव से आम लोगों और दवा उद्योग को क्या फायदा होगा?
नए ICD और SEZ जुड़ने से आयातक अपनी मैन्युफैक्चरिंग और वितरण इकाइयों के करीब खेप क्लियर कर सकेंगे, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और शिपमेंट में देरी कम होगी। इससे अंततः देश के विभिन्न क्षेत्रों में दवाओं और मेडिकल डिवाइस की समय पर और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
इस प्रस्ताव पर सुझाव या आपत्ति कैसे दर्ज करें?
प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति या सुझाव अवर सचिव (ड्रग्स रेगुलेशन), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को लिखित या ईमेल के ज़रिये भेजे जा सकते हैं। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन आधिकारिक राजपत्र पर उपलब्ध है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इस सूची में क्यों शामिल किया गया?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को हवाई मार्ग से दवाओं के आयात के लिए प्रस्तावित किया गया है, जिससे उत्तर भारत में एक नया त्वरित आयात चैनल तैयार होगा। यह विशेष रूप से उन दवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें तेज़ डिलीवरी और कोल्ड-चेन हैंडलिंग की ज़रूरत होती है।
राष्ट्र प्रेस
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