16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उरी-प्रथम चरण-द्वितीय जलविद्युत परियोजना: NHPC ने बारामूला में 240 MW के लिए पहला विस्फोट किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उरी-प्रथम चरण-द्वितीय जलविद्युत परियोजना: NHPC ने बारामूला में 240 MW के लिए पहला विस्फोट किया

सारांश

NHPC के CMD भूपेंद्र गुप्ता ने बारामूला के उरी में 240 मेगावाट की उरी-प्रथम चरण-द्वितीय परियोजना का पहला विस्फोट कर निर्माण का आगाज़ किया। यह परियोजना दुलहस्ती चरण-द्वितीय के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में 500 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ेगी।

मुख्य बातें

NHPC के CMD भूपेंद्र गुप्ता ने बारामूला जिले के उरी में 240 मेगावाट की उरी-प्रथम चरण-द्वितीय परियोजना का पहला विस्फोट सफलतापूर्वक किया।
यह विस्फोट परियोजना की प्रमुख निर्माण गतिविधियों के औपचारिक प्रारंभ का संकेत है।
दुलहस्ती चरण-द्वितीय और उरी-प्रथम चरण-द्वितीय मिलकर 500 मेगावाट की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ेंगी।
NHPC पहले से जम्मू-कश्मीर में 6 परियोजनाओं के ज़रिये 2,250 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है।
NHPC की निर्माणाधीन परियोजनाओं में पाकल दुल (1,000 MW) , रैटल (850 MW) , किरू (624 MW) और क्वार (540 MW) शामिल हैं।

राष्ट्रीय जलविद्युत ऊर्जा निगम (NHPC) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता ने 1 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी क्षेत्र में 240 मेगावाट की उरी-प्रथम चरण-द्वितीय जलविद्युत परियोजना का पहला विस्फोट सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस विस्फोट के साथ परियोजना की प्रमुख निर्माण गतिविधियों का औपचारिक आगाज़ हो गया है, जिसे क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

परियोजना का महत्व और लक्ष्य

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, 240 मेगावाट की यह परियोजना जम्मू-कश्मीर की विद्युत उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र शासित प्रदेश अपनी बिजली अवसंरचना के विस्तार और बाहरी आपूर्ति स्रोतों पर निर्भरता घटाने के प्रयासों में तेज़ी ला रहा है।

गौरतलब है कि यह परियोजना NHPC के उस व्यापक क्षमता-विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत दुलहस्ती चरण-द्वितीय और उरी-प्रथम चरण-द्वितीय मिलकर 500 मेगावाट की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ेंगी।

जम्मू-कश्मीर में NHPC की मौजूदा उपस्थिति

NHPC पहले से ही जम्मू-कश्मीर में 2,250 मेगावाट की संयुक्त स्थापित क्षमता वाली छह प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ संचालित कर रही है। इनमें शामिल हैं:

सलाल एचईपी (690 मेगावाट, रियासी), उरी-प्रथम एचईपी (480 मेगावाट, बारामूला), उरी-द्वितीय एचईपी (240 मेगावाट, बारामूला), दुलहस्ती एचईपी (390 मेगावाट, किश्तवाड़), किशनगंगा एचईपी (330 मेगावाट, बांदीपोरा) और सेवा-द्वितीय एचईपी (120 मेगावाट, कठुआ)।

निर्माणाधीन बड़ी परियोजनाएँ

NHPC जम्मू-कश्मीर में संयुक्त उद्यमों — चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (CVPPL) और रैटल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RHPCL) — के ज़रिये कई बड़े पैमाने की परियोजनाएँ क्रियान्वित कर रही है।

इनमें पाकल दुल परियोजना (1,000 मेगावाट, मरुसुदार नदी, किश्तवाड़), रैटल परियोजना (850 मेगावाट, चेनाब नदी, किश्तवाड़), किरू परियोजना (624 मेगावाट, चेनाब नदी, किश्तवाड़) और क्वार परियोजना (540 मेगावाट, चेनाब नदी, किश्तवाड़) प्रमुख हैं।

आगे की राह

अधिकारियों ने कहा कि निर्माण कार्य का आरंभ परियोजना के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उरी-प्रथम चरण-द्वितीय के पूर्ण होने पर यह क्षेत्र की भविष्य की बिजली माँग को पूरा करने और स्थानीय जलविद्युत क्षमता के दोहन की दिशा में NHPC के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को और मज़बूती देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा समयसीमा पर खरा उतरने की होगी — जम्मू-कश्मीर की बड़ी जलविद्युत परियोजनाएँ ऐतिहासिक रूप से देरी और लागत वृद्धि की शिकार रही हैं। 2,250 मेगावाट की मौजूदा क्षमता के बावजूद क्षेत्र में बिजली कटौती एक यथार्थ बनी हुई है, जो वितरण अवसंरचना की खामियों की ओर इशारा करती है। 500 मेगावाट का यह क्षमता विस्तार तभी सार्थक होगा जब ट्रांसमिशन नेटवर्क को समानांतर रूप से मज़बूत किया जाए — अन्यथा उत्पादन और उपभोक्ता के बीच की खाई बनी रहेगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उरी-प्रथम चरण-द्वितीय जलविद्युत परियोजना क्या है?
यह जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी क्षेत्र में NHPC द्वारा निर्मित की जा रही 240 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना है। इसका पहला विस्फोट NHPC के CMD भूपेंद्र गुप्ता ने सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिससे प्रमुख निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो गया।
इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर को क्या फायदा होगा?
यह परियोजना क्षेत्र की विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाएगी और बाहरी बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करेगी। दुलहस्ती चरण-द्वितीय के साथ मिलकर यह जम्मू-कश्मीर में 500 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ेगी।
NHPC जम्मू-कश्मीर में कितनी बिजली पैदा करती है?
NHPC फिलहाल जम्मू-कश्मीर में छह परियोजनाओं — सलाल (690 MW), उरी-प्रथम (480 MW), उरी-द्वितीय (240 MW), दुलहस्ती (390 MW), किशनगंगा (330 MW) और सेवा-द्वितीय (120 MW) — के ज़रिये कुल 2,250 मेगावाट बिजली उत्पादन करती है।
NHPC की जम्मू-कश्मीर में कौन-सी बड़ी परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं?
NHPC CVPPL और RHPCL के माध्यम से पाकल दुल (1,000 MW), रैटल (850 MW), किरू (624 MW) और क्वार (540 MW) परियोजनाएँ क्रियान्वित कर रही है, जो सभी किश्तवाड़ जिले में स्थित हैं।
उरी-प्रथम चरण-द्वितीय का पहला विस्फोट किसने और कब किया?
NHPC के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता ने 1 जून 2026 को बारामूला जिले के उरी क्षेत्र में यह पहला विस्फोट सफलतापूर्वक संपन्न किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले