उरी-प्रथम चरण-द्वितीय जलविद्युत परियोजना: NHPC ने बारामूला में 240 MW के लिए पहला विस्फोट किया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जलविद्युत ऊर्जा निगम (NHPC) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता ने 1 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के उरी क्षेत्र में 240 मेगावाट की उरी-प्रथम चरण-द्वितीय जलविद्युत परियोजना का पहला विस्फोट सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस विस्फोट के साथ परियोजना की प्रमुख निर्माण गतिविधियों का औपचारिक आगाज़ हो गया है, जिसे क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
परियोजना का महत्व और लक्ष्य
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, 240 मेगावाट की यह परियोजना जम्मू-कश्मीर की विद्युत उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र शासित प्रदेश अपनी बिजली अवसंरचना के विस्तार और बाहरी आपूर्ति स्रोतों पर निर्भरता घटाने के प्रयासों में तेज़ी ला रहा है।
गौरतलब है कि यह परियोजना NHPC के उस व्यापक क्षमता-विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत दुलहस्ती चरण-द्वितीय और उरी-प्रथम चरण-द्वितीय मिलकर 500 मेगावाट की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जोड़ेंगी।
जम्मू-कश्मीर में NHPC की मौजूदा उपस्थिति
NHPC पहले से ही जम्मू-कश्मीर में 2,250 मेगावाट की संयुक्त स्थापित क्षमता वाली छह प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ संचालित कर रही है। इनमें शामिल हैं:
सलाल एचईपी (690 मेगावाट, रियासी), उरी-प्रथम एचईपी (480 मेगावाट, बारामूला), उरी-द्वितीय एचईपी (240 मेगावाट, बारामूला), दुलहस्ती एचईपी (390 मेगावाट, किश्तवाड़), किशनगंगा एचईपी (330 मेगावाट, बांदीपोरा) और सेवा-द्वितीय एचईपी (120 मेगावाट, कठुआ)।
निर्माणाधीन बड़ी परियोजनाएँ
NHPC जम्मू-कश्मीर में संयुक्त उद्यमों — चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (CVPPL) और रैटल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RHPCL) — के ज़रिये कई बड़े पैमाने की परियोजनाएँ क्रियान्वित कर रही है।
इनमें पाकल दुल परियोजना (1,000 मेगावाट, मरुसुदार नदी, किश्तवाड़), रैटल परियोजना (850 मेगावाट, चेनाब नदी, किश्तवाड़), किरू परियोजना (624 मेगावाट, चेनाब नदी, किश्तवाड़) और क्वार परियोजना (540 मेगावाट, चेनाब नदी, किश्तवाड़) प्रमुख हैं।
आगे की राह
अधिकारियों ने कहा कि निर्माण कार्य का आरंभ परियोजना के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उरी-प्रथम चरण-द्वितीय के पूर्ण होने पर यह क्षेत्र की भविष्य की बिजली माँग को पूरा करने और स्थानीय जलविद्युत क्षमता के दोहन की दिशा में NHPC के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को और मज़बूती देगी।