कैसे पीएमईजीपी ने निकिता की तकदीर बदली: 25 लाख के लोन से खड़ा किया ईंट उद्योग
सारांश
Key Takeaways
- सरकारी योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं।
- पीएमईजीपी योजना ने रोजगार सृजन में मदद की है।
- निकिता का उद्यमिता सफर महिला सशक्तीकरण का उदाहरण है।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
- उद्यमिता से ग्रामीण विकास में योगदान होता है।
लखनऊ, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाएं अब वास्तविक बदलाव की कहानी लिख रही हैं। स्वरोजगार को बढ़ावा देने की यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि उन्हें रोजगार सृजनकर्ता के रूप में भी स्थापित कर रही है।
प्रदेश में चल रही स्वरोजगार योजनाएं विशेष रूप से महिलाओं के लिए नए अवसर प्रदान कर रही हैं। इसी दिशा में लखीमपुर खीरी की नikita वर्मा ने अपनी उद्यमिता से सफलता की नई कहानी रची है।
लखीमपुर खीरी जिले के शाहपुर राजा गांव की निवासी निकिता वर्मा ने सीमेंट ईंट निर्माण का उद्योग शुरू कर न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 25 लाख रुपए का ऋण लेकर अपना प्लांट स्थापित किया।
निकिता के प्लांट में प्रतिदिन लगभग 5 से 7 हजार ईंटों का उत्पादन होता है, जिससे उन्हें प्रति माह लगभग एक लाख रुपए का मुनाफा हो रहा है। उनके उद्योग से 25 लोगों को रोजगार मिला है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
निकिता ने सरकार की पीएमईजीपी योजना का लाभ लेकर न केवल खुद को आत्मनिर्भर किया, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का सृजन भी किया है। उन्होंने अपने प्लांट में करीब 25 लोगों को नौकरी भी प्रदान की है।
निकिता की यह सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है। उनका प्रयास न केवल अन्य महिलाओं को प्रेरित कर रहा है, बल्कि स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनने का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है।
ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की एक प्रमुख क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है। इसका संचालन खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा किया जाता है।