निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को 'वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा' कहा, विपक्ष के प्रदर्शन पर कसा तंज
सारांश
Key Takeaways
- निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को 'वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा' कहा।
- एलपीजी के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा प्रदर्शन।
- अरुण भारती ने विपक्ष की रणनीतियों पर सवाल उठाया।
नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की चाय की चुस्की पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने तीखा हमला किया है। उन्होंने राहुल गांधी को 'वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा' करार दिया और कहा कि उनका असली मकसद सिर्फ पिकनिक मनाना है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "वे (राहुल गांधी) वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा हैं और उनका मुख्य उद्देश्य पिकनिक मनाना है। इसलिए पिकनिक मनाने वाले को पूरा देश पहचानता है। उन्हें न तो गरीबों की चिंता है और न ही देश की। देश उन्हें अच्छी तरह से जानता है।"
एलपीजी पर विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने एक रिपोर्ट का उल्लेख किया जिसमें न्यूक्लियर फैसिलिटी का निर्माण, हाइडिल पावर बढ़ाने, रेलवे विद्युतीकरण और कोयला गैसीकरण की चर्चा की गई। दुबे ने राहुल गांधी और कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल को छोड़कर, 1974 से 2014 तक पिछले 40 वर्षों में किस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का काम किया गया।
उन्होंने यह भी कहा, "1970 में एक कमेटी बनी थी और 1974 में एक रिपोर्ट तैयार की गई। कांग्रेस का सिर्फ यही काम रहा कि उन्होंने रिपोर्ट बनाई और चुपचाप बैठ गए।"
वहीं, तेल-एलजीपी को लेकर विपक्ष के हंगामे पर एलजेपी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि विपक्ष के पास मुद्दे नहीं हैं। विपक्ष सिर्फ अपनी और अपने नेताओं की बात करता है और वह किसी का जवाब सुनने को तैयार नहीं है। आज सरकार ने विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि यदि तेल-एलजीपी की कमी है, तो वे उस पर नजर रख रहे हैं और नागरिकों को सुविधाओं की कमी नहीं होगी।
अरुण भारती ने कहा, "जनता में किसी प्रकार की घबराने की आवश्यकता नहीं है। सरकार सभी चीजों का ध्यान रख रही है और आगे भी रखेगी। विपक्ष मुद्दाविहीन होकर लगातार संकट की बात कर रहा है, पैनिक क्रिएट करने की कोशिश कर रहा है। सिर्फ अपने नेता को सुर्खियों में रखने के लिए छोटे से छोटे मुद्दे को उठाने की कोशिश हो रही है।"
उन्होंने यह भी कहा कि सदन में कांग्रेस को नीतियों और कार्यों पर सरकार को घेरना था, लेकिन वेल में आकर घेर लेने से ही उन्हें लगता है कि पार्टी ने जीत हासिल कर ली है। न विपक्ष प्रश्नकाल और न ही शून्यकाल चलने दिया जाता है। जरूरी यह है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस बात को लेकर परिपक्वता दिखाएं कि सदन में सरकार को मुद्दों पर घेरना है, अपनी जिद को लेकर नहीं।