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नोएडा मेट्रो एक्वा लाइन के 200 एएफसी गेट बदलेंगे, ₹23 करोड़ की परियोजना से 'वन नेशन वन कार्ड' से होगा सफर

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नोएडा मेट्रो एक्वा लाइन के 200 एएफसी गेट बदलेंगे, ₹23 करोड़ की परियोजना से 'वन नेशन वन कार्ड' से होगा सफर

सारांश

नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन पर सफर अब और स्मार्ट होगा — ₹23 करोड़ की इस परियोजना में 21 स्टेशनों के 200 पुराने एएफसी गेट बदले जाएंगे और 'वन नेशन वन कार्ड' से एंट्री मिलेगी। जेवर एयरपोर्ट से पहले यह अपग्रेड एनएमआरसी की भविष्य की तैयारी का हिस्सा है।

मुख्य बातें

एनएमआरसी एक्वा लाइन के 21 स्टेशनों पर करीब 200 एएफसी गेट बदलेगा।
परियोजना की अनुमानित लागत ₹23 करोड़ ; टेंडर जारी, आवेदन की अंतिम तिथि 30 जुलाई ।
नए गेट नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) यानी 'वन नेशन वन कार्ड' के अनुरूप होंगे।
मौजूदा गेट 2019 में लगाए गए थे; बार-बार तकनीकी खराबी के बाद यह निर्णय लिया गया।
चयनित एजेंसी 4 वर्षों तक गेटों का रखरखाव भी करेगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के संचालन से पहले बढ़ती यात्री संख्या को ध्यान में रखकर यह अपग्रेड किया जा रहा है।

नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) एक्वा लाइन के सभी 21 मेट्रो स्टेशनों पर लगे करीब 200 ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी) गेट बदलने जा रहा है, जिस पर लगभग ₹23 करोड़ खर्च होंगे। इस अपग्रेडेशन के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच सफर करने वाले यात्री नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी), यानी 'वन नेशन वन कार्ड', से सीधे मेट्रो में प्रवेश कर सकेंगे। एनएमआरसी ने इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है और इच्छुक कंपनियाँ 30 जुलाई तक आवेदन कर सकती हैं।

परियोजना का दायरा और लागत

चयनित एजेंसी को न केवल सभी पुराने एएफसी गेट हटाकर नई अत्याधुनिक मशीनें स्थापित करनी होंगी, बल्कि उन्हें एनसीएमसी के अनुरूप तैयार भी करना होगा। इसके अलावा, एजेंसी को अगले चार वर्षों तक इन गेटों के रखरखाव और तकनीकी देखरेख की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। परियोजना की कुल लागत ₹23 करोड़ आँकी गई है।

पुराने गेटों की खामियाँ और बदलाव की वजह

एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक क्रांति शेखर सिंह ने बताया कि मौजूदा एएफसी गेट वर्ष 2019 में एक्वा लाइन मेट्रो सेवा शुरू होने के समय लगाए गए थे। बाद में इन्हें मोबाइल ऐप आधारित सुविधाओं के लिए अपग्रेड भी किया गया, परंतु कई स्टेशनों पर बार-बार तकनीकी खराबी की शिकायतें सामने आती रहीं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर और निर्बाध यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।

जेवर एयरपोर्ट और भविष्य की तैयारी

एनएमआरसी के अनुसार यह बदलाव केवल मौजूदा तकनीकी खामियों को दूर करने तक सीमित नहीं है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के संचालन शुरू होने के बाद यात्रियों की संख्या में तेज वृद्धि की संभावना को देखते हुए आधुनिक और तेज टिकटिंग प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है और इंटरऑपरेबल भुगतान प्रणाली की माँग बढ़ रही है।

यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा

नई प्रणाली लागू होने के बाद यात्री वन नेशन वन कार्ड के माध्यम से अलग-अलग कार्ड खरीदने की झंझट से मुक्त होंगे। टिकट लेने में लगने वाला समय घटेगा, लंबी कतारों से राहत मिलेगी और समग्र यात्रा अनुभव अधिक सुविधाजनक बनेगा। गौरतलब है कि एनसीएमसी प्रणाली देशभर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में एकीकृत भुगतान की दिशा में केंद्र सरकार की व्यापक पहल का हिस्सा है।

एनएमआरसी को उम्मीद है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू हो जाएगा और एक्वा लाइन की सेवाएँ और अधिक भरोसेमंद एवं आधुनिक बनेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासतौर पर जब जेवर एयरपोर्ट की शुरुआत से पहले यात्री दबाव बढ़ने की उम्मीद है। एनसीएमसी का लाभ तभी पूरी तरह मिलेगा जब दिल्ली मेट्रो और अन्य नेटवर्क के साथ सहज इंटीग्रेशन सुनिश्चित हो — जो अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाया है। ₹23 करोड़ की यह राशि और चार साल का रखरखाव अनुबंध सही दिशा में है, पर निष्पादन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा मेट्रो एक्वा लाइन पर एएफसी गेट क्यों बदले जा रहे हैं?
एक्वा लाइन के मौजूदा एएफसी गेट 2019 में लगाए गए थे और कई स्टेशनों पर बार-बार तकनीकी खराबी की शिकायतें आ रही थीं। इसके अलावा, नए गेट 'वन नेशन वन कार्ड' (एनसीएमसी) के अनुरूप होंगे और जेवर एयरपोर्ट के बाद बढ़ने वाली यात्री संख्या को भी संभाल सकेंगे।
'वन नेशन वन कार्ड' से नोएडा मेट्रो में सफर कैसे होगा?
नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) एक ऐसा कार्ड है जिससे देशभर के सार्वजनिक परिवहन — बस, मेट्रो, टोल — में भुगतान किया जा सकता है। नए एएफसी गेट लगने के बाद यात्री अलग मेट्रो कार्ड खरीदे बिना इसी कार्ड से एक्वा लाइन में प्रवेश कर सकेंगे।
एनएमआरसी की इस परियोजना पर कितना खर्च होगा और टेंडर की स्थिति क्या है?
इस परियोजना पर लगभग ₹23 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। एनएमआरसी ने टेंडर जारी कर दिया है और इच्छुक कंपनियाँ 30 जुलाई तक आवेदन कर सकती हैं।
नए एएफसी गेट कब तक लग जाएंगे?
अभी तक एनएमआरसी ने गेट लगाने की अंतिम समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है। टेंडर प्रक्रिया 30 जुलाई को बंद होने के बाद एजेंसी का चयन होगा, जिसके बाद काम शुरू होगा। चयनित एजेंसी को गेट लगाने के साथ-साथ चार वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
इस बदलाव से नोएडा-ग्रेटर नोएडा के यात्रियों को क्या फायदा होगा?
नई प्रणाली से टिकट लेने में लगने वाला समय घटेगा, स्टेशनों पर कतारें कम होंगी और यात्रा अधिक सुविधाजनक बनेगी। यात्रियों को अलग मेट्रो कार्ड खरीदने की जरूरत नहीं होगी — वे एनसीएमसी कार्ड से ही सफर कर सकेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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