दिल्ली ओ-जोन कॉलोनियों को बचाने के लिए 'आप' का हस्ताक्षर अभियान, संसद में कानून की माँग
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने मंगलवार, 16 जून को नई दिल्ली में ओ-जोन क्षेत्र की कॉलोनियों को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बचाने के लिए एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। पार्टी की माँग है कि संसद में विशेष कानून बनाकर इन कॉलोनियों को स्थायी कानूनी संरक्षण दिया जाए। दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओ-जोन क्षेत्र के मकानों के संबंध में 31 दिसंबर 2026 तक की समय-सीमा दी है, जिससे प्रभावित परिवारों में अनिश्चितता और भय का माहौल बना हुआ है।
अभियान का स्वरूप और उद्देश्य
दिल्ली प्रदेश AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बताया कि पार्टी के विधायक, पार्षद, नेता और कार्यकर्ता ओ-जोन प्रभावित कॉलोनियों में घर-घर जाकर नागरिकों से हस्ताक्षर कराएँगे। एकत्र हस्ताक्षरों को प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा और संसद में कानून निर्माण की माँग रखी जाएगी। भारद्वाज ने कहा कि जिस प्रकार दिल्ली स्पेशल प्रोविजंस एक्ट के तहत अनधिकृत कॉलोनियों को कानूनी सुरक्षा मिली हुई है, उसी तर्ज पर ओ-जोन की पुरानी बसी कॉलोनियों को भी संरक्षण मिलना चाहिए।
उनका आरोप था कि मौखिक आश्वासनों से कोई ठोस राहत नहीं मिली है और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई लगातार जारी है। भारद्वाज ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD, DDA और अन्य एजेंसियाँ एक ही राजनीतिक दल के नियंत्रण में होने के बावजूद प्रभावित निवासियों को राहत नहीं दी जा रही।
प्रभावित कॉलोनियों की स्थिति
AAP के वरिष्ठ नेता एवं बुराड़ी विधायक संजीव झा के अनुसार, दिल्ली की लगभग 91 कॉलोनियाँ ओ-जोन विवाद से प्रभावित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में ध्वस्तीकरण रोकने की होती, तो पूर्व में मिले संरक्षण को समाप्त नहीं किया जाता। झा का कहना था कि इस समस्या का स्थायी हल केवल संसदीय कानून के माध्यम से ही संभव है।
AAP नेता श्रीचंद वोहरा ने दावा किया कि बदरपुर विधानसभा क्षेत्र की अकेले 45 कॉलोनियाँ ओ-जोन से प्रभावित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐसी कॉलोनियाँ भी इस विवाद में शामिल कर दी गई हैं जो यमुना नदी से कई किलोमीटर दूर स्थित हैं, जिससे इस वर्गीकरण की तार्किकता पर सवाल उठता है।
निवासियों की पीड़ा
भारद्वाज ने दावा किया कि ओ-जोन की कई कॉलोनियों में परिवार पिछले 50 वर्षों से निवास कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें अपने घर उजड़ने का भय सता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली उच्च न्यायालय की समय-सीमा नज़दीक आती जा रही है और प्रभावित परिवारों के पास कोई ठोस कानूनी आश्वासन नहीं है। गौरतलब है कि वर्षों से इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी होती रही, किंतु स्थायी समाधान की दिशा में कोई विधायी कदम नहीं उठाया गया।
भाजपा पर आरोप और राजनीतिक संदर्भ
AAP नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा निशाना साधा और कहा कि केंद्र से लेकर नगर निकाय तक सभी संस्थाएँ एक ही दल के नियंत्रण में होने के बावजूद ओ-जोन निवासियों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा। आलोचकों का कहना है कि यह अभियान AAP के लिए विपक्ष में रहते हुए जनाधार बनाए रखने की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है।
आगे की राह
हस्ताक्षर अभियान के बाद AAP का इरादा एकत्रित माँग-पत्र प्रधानमंत्री को सौंपने और संसद सत्र में इस मुद्दे को उठाने का है। 31 दिसंबर 2026 की न्यायालय-निर्धारित समय-सीमा को देखते हुए पार्टी का दावा है कि विधायी समाधान में और देरी नहीं होनी चाहिए। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस जन-दबाव पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।