11 अगस्त 2026
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दिल्ली ओ-जोन कॉलोनियों को बचाने के लिए 'आप' का हस्ताक्षर अभियान, संसद में कानून की माँग

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दिल्ली ओ-जोन कॉलोनियों को बचाने के लिए 'आप' का हस्ताक्षर अभियान, संसद में कानून की माँग

सारांश

दिल्ली की लगभग 91 ओ-जोन कॉलोनियों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटकी है और दिल्ली उच्च न्यायालय की 31 दिसंबर 2026 की समय-सीमा नज़दीक आ रही है। AAP ने घर-घर हस्ताक्षर अभियान छेड़ते हुए संसद में विशेष कानून की माँग उठाई है — 50 साल से बसे परिवारों के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है।

मुख्य बातें

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 16 जून को दिल्ली के ओ-जोन क्षेत्र की कॉलोनियों को संरक्षण दिलाने के लिए हस्ताक्षर अभियान शुरू किया।
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हस्ताक्षर प्रधानमंत्री को सौंपे जाएँगे और संसद में कानून की माँग की जाएगी।
बुराड़ी विधायक संजीव झा के अनुसार दिल्ली की लगभग 91 कॉलोनियाँ ओ-जोन विवाद से प्रभावित हैं।
AAP नेता श्रीचंद वोहरा ने दावा किया कि बदरपुर विधानसभा की अकेले 45 कॉलोनियाँ प्रभावित हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओ-जोन मकानों के मामले में 31 दिसंबर 2026 तक की समय-सीमा दी है।
कई परिवार कथित तौर पर पिछले 50 वर्षों से इन कॉलोनियों में रह रहे हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने मंगलवार, 16 जून को नई दिल्ली में ओ-जोन क्षेत्र की कॉलोनियों को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बचाने के लिए एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। पार्टी की माँग है कि संसद में विशेष कानून बनाकर इन कॉलोनियों को स्थायी कानूनी संरक्षण दिया जाए। दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओ-जोन क्षेत्र के मकानों के संबंध में 31 दिसंबर 2026 तक की समय-सीमा दी है, जिससे प्रभावित परिवारों में अनिश्चितता और भय का माहौल बना हुआ है।

अभियान का स्वरूप और उद्देश्य

दिल्ली प्रदेश AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बताया कि पार्टी के विधायक, पार्षद, नेता और कार्यकर्ता ओ-जोन प्रभावित कॉलोनियों में घर-घर जाकर नागरिकों से हस्ताक्षर कराएँगे। एकत्र हस्ताक्षरों को प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा और संसद में कानून निर्माण की माँग रखी जाएगी। भारद्वाज ने कहा कि जिस प्रकार दिल्ली स्पेशल प्रोविजंस एक्ट के तहत अनधिकृत कॉलोनियों को कानूनी सुरक्षा मिली हुई है, उसी तर्ज पर ओ-जोन की पुरानी बसी कॉलोनियों को भी संरक्षण मिलना चाहिए।

उनका आरोप था कि मौखिक आश्वासनों से कोई ठोस राहत नहीं मिली है और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई लगातार जारी है। भारद्वाज ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD, DDA और अन्य एजेंसियाँ एक ही राजनीतिक दल के नियंत्रण में होने के बावजूद प्रभावित निवासियों को राहत नहीं दी जा रही।

प्रभावित कॉलोनियों की स्थिति

AAP के वरिष्ठ नेता एवं बुराड़ी विधायक संजीव झा के अनुसार, दिल्ली की लगभग 91 कॉलोनियाँ ओ-जोन विवाद से प्रभावित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में ध्वस्तीकरण रोकने की होती, तो पूर्व में मिले संरक्षण को समाप्त नहीं किया जाता। झा का कहना था कि इस समस्या का स्थायी हल केवल संसदीय कानून के माध्यम से ही संभव है।

AAP नेता श्रीचंद वोहरा ने दावा किया कि बदरपुर विधानसभा क्षेत्र की अकेले 45 कॉलोनियाँ ओ-जोन से प्रभावित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐसी कॉलोनियाँ भी इस विवाद में शामिल कर दी गई हैं जो यमुना नदी से कई किलोमीटर दूर स्थित हैं, जिससे इस वर्गीकरण की तार्किकता पर सवाल उठता है।

निवासियों की पीड़ा

भारद्वाज ने दावा किया कि ओ-जोन की कई कॉलोनियों में परिवार पिछले 50 वर्षों से निवास कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें अपने घर उजड़ने का भय सता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली उच्च न्यायालय की समय-सीमा नज़दीक आती जा रही है और प्रभावित परिवारों के पास कोई ठोस कानूनी आश्वासन नहीं है। गौरतलब है कि वर्षों से इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी होती रही, किंतु स्थायी समाधान की दिशा में कोई विधायी कदम नहीं उठाया गया।

भाजपा पर आरोप और राजनीतिक संदर्भ

AAP नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा निशाना साधा और कहा कि केंद्र से लेकर नगर निकाय तक सभी संस्थाएँ एक ही दल के नियंत्रण में होने के बावजूद ओ-जोन निवासियों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा। आलोचकों का कहना है कि यह अभियान AAP के लिए विपक्ष में रहते हुए जनाधार बनाए रखने की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है।

आगे की राह

हस्ताक्षर अभियान के बाद AAP का इरादा एकत्रित माँग-पत्र प्रधानमंत्री को सौंपने और संसद सत्र में इस मुद्दे को उठाने का है। 31 दिसंबर 2026 की न्यायालय-निर्धारित समय-सीमा को देखते हुए पार्टी का दावा है कि विधायी समाधान में और देरी नहीं होनी चाहिए। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस जन-दबाव पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो दशकों से इन कॉलोनियों को उसी दायरे में क्यों नहीं लाया गया। यह भी विचारणीय है कि यमुना से कई किलोमीटर दूर स्थित कॉलोनियों को ओ-जोन में शामिल करने का आधार क्या है — इस वर्गीकरण की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। 31 दिसंबर 2026 की समय-सीमा से पहले यदि संसदीय समाधान नहीं निकला, तो हस्ताक्षर अभियान महज एक राजनीतिक दस्तावेज़ बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में ओ-जोन क्या है और यह विवाद क्यों है?
ओ-जोन दिल्ली के मास्टर प्लान में नामित वह क्षेत्र है जो मुख्यतः यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र और उसके आसपास की भूमि को कवर करता है। इस क्षेत्र में निर्माण पर प्रतिबंध है, लेकिन दशकों से यहाँ बड़ी संख्या में कॉलोनियाँ बस चुकी हैं, जिससे निवासियों और प्रशासन के बीच कानूनी विवाद बना हुआ है।
AAP का हस्ताक्षर अभियान क्या माँग कर रहा है?
AAP माँग कर रही है कि संसद में विशेष कानून बनाकर ओ-जोन कॉलोनियों को वैसा ही कानूनी संरक्षण दिया जाए जैसा दिल्ली स्पेशल प्रोविजंस एक्ट के तहत अनधिकृत कॉलोनियों को मिला है। पार्टी घर-घर हस्ताक्षर एकत्र कर उन्हें प्रधानमंत्री को सौंपेगी।
दिल्ली में कितनी कॉलोनियाँ ओ-जोन से प्रभावित हैं?
बुराड़ी विधायक संजीव झा के अनुसार दिल्ली की लगभग 91 कॉलोनियाँ ओ-जोन विवाद से प्रभावित हैं। इनमें से अकेले बदरपुर विधानसभा क्षेत्र में 45 कॉलोनियाँ हैं, जैसा कि AAP नेता श्रीचंद वोहरा ने बताया।
दिल्ली उच्च न्यायालय की समय-सीमा क्या है और इसका क्या असर होगा?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओ-जोन क्षेत्र में बने मकानों के संबंध में 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है। इस समय-सीमा के चलते प्रभावित परिवारों में अनिश्चितता और भय का माहौल है, क्योंकि कोई स्थायी कानूनी सुरक्षा अभी तक नहीं दी गई है।
AAP ने BJP पर क्या आरोप लगाए हैं?
AAP नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD, DDA और अन्य एजेंसियाँ सभी BJP के नियंत्रण में होने के बावजूद ओ-जोन निवासियों को राहत नहीं दी जा रही। उनका कहना है कि मौखिक आश्वासन दिए जाते रहे लेकिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं रुकी।
राष्ट्र प्रेस
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