ओडिशा पीजी मेडिकल परीक्षा विवाद: सरकार ने पेपर लीक से इनकार किया, हाई-लेवल कमेटी गठित
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा सरकार ने 31 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (OUHS) द्वारा आयोजित पोस्टग्रेजुएट मेडिकल परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक नहीं हुआ, बल्कि परीक्षा प्रबंधन में हुई चूक के कारण प्रश्न पत्र की तस्वीरें मोबाइल फोन के ज़रिए प्रसारित हुईं। सरकार के अनुसार, शुरुआती जाँच में यह घटना संगठित पेपर लीक की श्रेणी में नहीं आती।
क्या हुआ परीक्षा के दौरान
सरकारी बयान के अनुसार, बरहमपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में परीक्षा के दौरान किसी ने प्रश्न पत्र से सवालों की तस्वीरें खींचकर फोन के ज़रिए भेज दीं। यह संभव हो सका क्योंकि परीक्षा कक्ष प्रबंधन में गंभीर चूक हुई। गौरतलब है कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल परीक्षाओं में इस तरह की घटनाएँ सीधे चिकित्सा शिक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं।
हाई-लेवल जाँच कमेटी का गठन
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने 31 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक आदेश के तहत तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जाँच समिति बनाई है। समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव विजय कुमार डैश करेंगे। विशेष सचिव विजय कुमार मिश्रा और संयुक्त डीएमईटी अनिल कुमार साहू इसके सदस्य होंगे। यह समिति परीक्षा आयोजन के सभी पहलुओं की जाँच करेगी, जिसमें OUHS की ओर से हुई संभावित चूक भी शामिल है।
OUHS और एमकेसीजी की कार्रवाई
OUHS ने एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज से परीक्षा प्रबंधन में कथित कमियों को लेकर स्पष्टीकरण माँगा है और नोटिस मिलने के दो दिनों के भीतर विस्तृत जाँच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, एमकेसीजी ने भी संस्थान के डीन और प्रिंसिपल की अध्यक्षता में एक अलग आंतरिक जाँच समिति गठित की है, जो घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करेगी।
एफआईआर दर्ज, पुलिस जाँच शुरू
OUHS के परीक्षा नियंत्रक की शिकायत पर भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस प्रश्न पत्र की सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से उसके प्रसार की जाँच कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर बहस तेज़ है।
आगे क्या होगा
तीनों जाँच समितियाँ — राज्य सरकार की हाई-लेवल कमेटी, OUHS की आंतरिक जाँच और एमकेसीजी की अनुशासनात्मक समिति — समानांतर रूप से काम करेंगी। पुलिस जाँच के नतीजे और जाँच रिपोर्टें यह तय करेंगी कि दोषियों के विरुद्ध आपराधिक या प्रशासनिक कार्रवाई होगी या नहीं। पीजी मेडिकल परीक्षा की पवित्रता सुनिश्चित करना अब राज्य सरकार की प्राथमिकता बन गई है।