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ओडिशा LED स्ट्रीट लाइट घोटाला: तीन जिलों में 81 अधिकारियों की 24 टीमें तैनात, विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई

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ओडिशा LED स्ट्रीट लाइट घोटाला: तीन जिलों में 81 अधिकारियों की 24 टीमें तैनात, विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई

सारांश

ओडिशा विजिलेंस ने तीन जिलों में LED स्ट्रीट लाइट योजना में कथित गबन की जांच के लिए 81 अधिकारियों की 24 टीमें उतारी हैं। बिल में उपकरण दिखाकर भुगतान लेने के आरोप हैं, जबकि उपकरण लगाए ही नहीं गए। 50 स्थानों पर तकनीकी निरीक्षण जारी है।

मुख्य बातें

ओडिशा विजिलेंस ने 24 जून को क्योंझर, नयागढ़ और जाजपुर में LED स्ट्रीट लाइट घोटाले की जांच शुरू की।
जांच के लिए 81 अधिकारियों की 24 टीमें तैनात; प्रत्येक जिले में 27 पुलिस अधिकारी ।
मामला वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 से जुड़ा; राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि के दुरुपयोग के आरोप।
बिलों में एनर्जी मीटर, केबल, एमसीसीबी जैसे उपकरण दर्शाकर भुगतान लिया गया, लेकिन उपकरण लगाए नहीं गए।
तीनों जिलों में 50 स्थानों पर फील्ड जांच और तकनीकी निरीक्षण जारी।
आरटीआई कार्यकर्ता हिमांशु शेखर नायक ने जांच को स्वागत योग्य बताया, बड़े गबन के खुलासे की उम्मीद जताई।

ओडिशा विजिलेंस ने 24 जून 2026 को क्योंझर, नयागढ़ और जाजपुर जिलों में ग्राम पंचायतों में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने के कार्यों में कथित अनियमितताओं और सरकारी धन के गबन की विस्तृत जांच शुरू की है। यह मामला वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 से जुड़ा है, जिसमें राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि के दुरुपयोग के गंभीर संकेत सामने आए हैं।

जांच का दायरा और तैनाती

समन्वित और त्वरित कार्रवाई के लिए ओडिशा विजिलेंस ने 81 अधिकारियों की 24 टीमें तैनात की हैं। इन टीमों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी, इंस्पेक्टर और अन्य विजिलेंस कर्मी शामिल हैं। तीनों जिलों में प्रत्येक जिले में 27 पुलिस अधिकारी तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त तीनों जिलों में 50 स्थानों पर फील्ड जांच और तकनीकी निरीक्षण जारी है ताकि गबन की राशि का सटीक आकलन किया जा सके।

मुख्य अनियमितताएं

जांच के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। विजिलेंस के अनुसार, टेंडर नियमों का उल्लंघन किया गया और एनर्जी मीटर, केबल, एमसीसीबी, क्लैंप तथा फोटो स्विच टाइमर जैसे जरूरी उपकरण वास्तव में लगाए ही नहीं गए — परंतु इन्हें बिलों में दर्शाकर भुगतान प्राप्त कर लिया गया। यह 'एक ग्राम पंचायत में एक गांव में एलईडी स्ट्रीट लाइट सिस्टम' योजना के तहत हुआ, जिसमें इंस्टॉलेशन के साथ वार्षिक रखरखाव अनुबंध भी शामिल था।

आरटीआई कार्यकर्ता की प्रतिक्रिया

आरटीआई कार्यकर्ता हिमांशु शेखर नायक ने कहा कि उन्होंने लंबे समय से इस योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें उठाई थीं और यह जांच एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सही तरीके से जांच होने पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन के गबन का खुलासा हो सकता है। गौरतलब है कि इस प्रकार की शिकायतें वर्षों से लंबित थीं, लेकिन विजिलेंस की यह कार्रवाई पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हुई है।

आगे क्या होगा

विजिलेंस विभाग अब 50 फील्ड स्थानों पर तकनीकी निरीक्षण के आधार पर गबन की कुल राशि तय करेगा और इसमें शामिल अधिकारियों व एजेंसियों की भूमिका निर्धारित की जाएगी। यह जांच ओडिशा में पंचायत स्तर की सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण परीक्षण साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां कागजों पर काम पूरा दिखाकर भुगतान लेना एक स्थापित पैटर्न बन चुका है। असली सवाल यह है कि वार्षिक रखरखाव अनुबंध और तकनीकी निरीक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद वर्षों तक यह गड़बड़ी कैसे अनदेखी रही। 81 अधिकारियों की तैनाती संकेत देती है कि मामला बड़ा है, लेकिन जांच का असली मूल्यांकन उन एजेंसियों और अधिकारियों पर होने वाली कार्रवाई से होगा — न कि केवल टीमों की संख्या से।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा LED स्ट्रीट लाइट घोटाला क्या है?
यह मामला वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 में क्योंझर, नयागढ़ और जाजपुर जिलों की ग्राम पंचायतों में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने की योजना में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि जरूरी उपकरण लगाए बिना बिलों में दर्शाकर सरकारी धन का गबन किया गया।
ओडिशा विजिलेंस ने इस जांच में कितनी टीमें तैनात की हैं?
ओडिशा विजिलेंस ने 81 अधिकारियों की 24 टीमें तैनात की हैं, जिनमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी और इंस्पेक्टर शामिल हैं। प्रत्येक जिले में 27 पुलिस अधिकारी तैनात किए गए हैं।
इस घोटाले में किस तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं?
जांच के अनुसार टेंडर नियमों का उल्लंघन हुआ और एनर्जी मीटर, केबल, एमसीसीबी, क्लैंप व फोटो स्विच टाइमर जैसे उपकरण वास्तव में लगाए नहीं गए, लेकिन बिलों में दर्शाकर भुगतान ले लिया गया। इससे राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं।
यह जांच किन जिलों में हो रही है और इसका दायरा क्या है?
जांच क्योंझर, नयागढ़ और जाजपुर जिलों में हो रही है। तीनों जिलों में 50 स्थानों पर फील्ड जांच और तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है ताकि गबन की कुल राशि और जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों की भूमिका तय की जा सके।
आरटीआई कार्यकर्ता हिमांशु शेखर नायक ने इस मामले पर क्या कहा?
आरटीआई कार्यकर्ता हिमांशु शेखर नायक ने कहा कि उन्होंने लंबे समय से इस योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें उठाई थीं और विजिलेंस की यह जांच एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सही तरीके से जांच होने पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन के गबन का खुलासा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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