ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना ने युद्धपोतों की संख्या बढ़ाई, भारतीय शिप्स की सुरक्षा कर रही है

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ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना ने युद्धपोतों की संख्या बढ़ाई, भारतीय शिप्स की सुरक्षा कर रही है

सारांश

ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोतों की संख्या बढ़ाई है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। भारतीय फ्लैगged शिप्स को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया जा रहा है। जानें इस स्थिति के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

Key Takeaways

  • भारतीय नौसेना की तैनाती बढ़ी है।
  • ओमान की खाड़ी में सुरक्षा कवच।
  • मिशन आधारित रणनीति का महत्व।
  • समुद्री डकैती के खिलाफ कार्रवाई।
  • भारतीय फ्लैगged शिप्स का एस्कॉर्ट।

नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में उत्पन्न युद्ध जैसे हालातों ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर संकट में डाल दिया है। भारतीय फ्लैगged टैंकरों को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' क्षेत्र से प्रवेश की अनुमति दी गई है, और वे वहां से आ रहे हैं। शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी भारतीय बंदरगाह पर पहुँच चुके हैं, जिन्हें भारतीय नौसेना ने सुरक्षित रूप से एस्कॉर्ट किया है।

ओमान की खाड़ी के निकट भारतीय नौसेना का 'मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट' 2017 से एक युद्धपोत की तैनाती के साथ हो रहा है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, नौसेना ने इस संख्या को बढ़ा दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहले यह संख्या 1 से बढ़ाकर 3 की गई थी, और अब इसे और भी बढ़ाया गया है। हालांकि, इस संख्या के बारे में अधिक जानकारी प्रदान नहीं की गई है। इन युद्धपोतों का कार्य भारतीय फ्लैगged शिप्स को सुरक्षित रूप से पहुँचाना है।

भारत सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पश्चिम में 22 भारतीय जहाजों की मौजूदगी है। मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट के तहत भारतीय नौसेना की तैनाती विश्व के छह विभिन्न क्षेत्रों में है और यह तैनाती 2017 से लगातार बनी हुई है।

ओमान और अदन की खाड़ी के पास चल रहे दो बड़े अभियानों में 'ऑपरेशन संकल्प' और 'एंटी-पायरेसी ऑपरेशन' शामिल हैं। वेस्ट एशिया की स्थिति पर आयोजित इंटर-मिनिस्ट्रीयल प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि भारतीय नौसेना समुद्री डकैती विरोधी अभियानों में सहयोग कर रही है। इस सहायता के प्रकार की विस्तृत जानकारी रक्षा मंत्रालय द्वारा दी जाएगी।

2017 में शुरू किए गए 'मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट' के तहत ओमान और अदन की खाड़ी के अलावा तीसरी तैनाती सेशेल्स के निकट है, जो केप ऑफ गुड होप से आने-जाने वाले जहाजों की सुरक्षा और समुद्री डकैती के निवारण के लिए है। चौथी तैनाती मालदीव के निकट, पाँचवीं अंडमान-निकोबार के पास और छठी तैनाती म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के निकट बंगाल की खाड़ी में है।

इन तैनातियों के दौरान भारतीय युद्धपोत मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ युद्धाभ्यास भी करते हैं और किसी भी प्रकार की समुद्री डकैती या दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को अंजाम देते हैं।

Point of View

भारतीय नौसेना का यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की तैनातियों से न केवल भारतीय शिप्स की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता को भी बढ़ावा देती है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी में कितने युद्धपोत तैनात किए हैं?
भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी में अपने युद्धपोतों की संख्या को 1 से बढ़ाकर 3 कर दिया है और अब इसे और बढ़ाने की योजना है।
मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट क्या है?
मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट एक रणनीति है जिसके तहत भारतीय नौसेना विभिन्न क्षेत्रों में तैनात रहती है, ताकि समुद्री सुरक्षा और डकैती विरोधी अभियानों को सुरक्षित किया जा सके।
भारतीय फ्लैगged शिप्स को किस क्षेत्र से आने की अनुमति है?
भारतीय फ्लैगged टैंकरों को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' क्षेत्र से आने की अनुमति है।
ओमान की खाड़ी में कौन-कौन से ऑपरेशन चल रहे हैं?
ओमान की खाड़ी में 'ऑपरेशन संकल्प' और अदन की खाड़ी में 'एंटी-पायरेसी ऑपरेशन' चल रहे हैं।
भारतीय नौसेना का कार्य क्या है?
भारतीय नौसेना का कार्य भारतीय फ्लैगged शिप्स को सुरक्षित एस्कॉर्ट करना और किसी भी समुद्री डकैती के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना है।
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