स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नौसेना का फ्लैगशिप एस्कॉर्ट, सुरक्षा का सिलसिला जारी
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय नौसेना की तैनाती वैश्विक सुरक्षा को बढ़ावा देती है।
- ओमान और अदन की खाड़ी में महत्वपूर्ण अभियान चल रहे हैं।
- समुद्री डकैती से निपटने के लिए एंटी-पायरेसी ऑपरेशन जारी है।
- जग लाडकी जैसे वेसल्स को सुरक्षित एस्कॉर्ट मिल रहा है।
- मिशन के तहत विभिन्न क्षेत्रों में तैनाती जारी है।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना के ‘मिशन आधारित डिप्लॉयमेंट’ के अंतर्गत विश्व के छह विभिन्न स्थानों पर वॉरशिप की तैनाती की गई है। यह तैनाती 2017 के बाद से लगातार चल रही है। ‘मिशन आधारित डिप्लॉयमेंट’ के तहत ओमान और अदन की खाड़ी में भी दो महत्वपूर्ण अभियान चलाए जा रहे हैं- ओमान की खाड़ी में ‘ऑपरेशन संकल्प’ और अदन की खाड़ी में ‘एंटी-पायरेसी ऑपरेशन’।
वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण, इस क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना के वॉरशिप ने भारतीय फ्लैगशिप को सुरक्षित एस्कॉर्ट प्रदान किया है। एलपीजी कैरियर शिवालिक और नंदा देवी के बाद, तीसरा भारतीय फ्लैग वेसल जग लाडकी भी सुरक्षित रूप से भारत के लिए प्रस्थान कर चुका है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना का एक वॉरशिप देर रात से ही उसे एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाने का कार्य कर रहा है। इससे पहले, नौसेना के वॉरशिप ने दोनों वेसल्स को भी सुरक्षा प्रदान की थी।
सूत्रों के अनुसार, अदन की खाड़ी में वर्तमान में भारतीय नौसेना के तीन जहाज सक्रिय हैं। जिस दिन से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मरीन ट्रैफिक प्रभावित हुआ, उस समय से भारतीय नौसेना के वॉरशिप लगातार हालात पर नज़र रखे हुए हैं।
ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस सूरत तैनात है। अगर हम ‘मिशन आधारित डिप्लॉयमेंट’ की बात करें, तो वर्तमान में दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में इस मिशन के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोत सक्रिय रहते हैं।
पहली तैनाती अरब सागर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास है, जहां से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के माध्यम से भारत का लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार होता है।
दूसरी तैनाती अदन की खाड़ी में है, जहां ऊर्जा व्यापार के साथ-साथ भारत का लगभग 90 प्रतिशत अन्य व्यापार भी होता है, जो स्वेज नहर, रेड सी और अदन की खाड़ी से होकर अरब सागर के रास्ते भारत पहुंचता है। यह क्षेत्र समुद्री डकैती के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। जिबूती और सोमालिया के समुद्री लुटेरे इसी क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं।
यह व्यापार का सबसे संक्षिप्त समुद्री मार्ग है, इसलिए यहाँ जहाजों की आवाजाही अधिक होती है। यदि अदन की खाड़ी का मार्ग बाधित हो जाए, तो व्यापारी जहाजों को भूमध्य सागर से होते हुए अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते आना-जाना पड़ता है। यह मार्ग न केवल समय में वृद्धि करता है, बल्कि लागत को भी बढ़ा देता है।
तीसरी तैनाती सेशेल्स के पास है, जो केप ऑफ गुड होप मार्ग से आने-जाने वाले जहाजों की सुरक्षा और समुद्री डकैती रोकने के लिए है। चौथी तैनाती मालदीव के पास, पांचवीं अंडमान-निकोबार के पास और छठी तैनाती म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास बंगाल की खाड़ी में है।
इन तैनातियों के दौरान भारतीय युद्धपोत मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास भी करते हैं और किसी भी प्रकार की समुद्री डकैती या दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को संपादित करते हैं।