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ओमान तट पर तेल टैंकर हमले में देवरिया के शिवानंद चौरसिया की मौत, परिवार ने मांगा मुआवजा और सरकारी नौकरी

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ओमान तट पर तेल टैंकर हमले में देवरिया के शिवानंद चौरसिया की मौत, परिवार ने मांगा मुआवजा और सरकारी नौकरी

सारांश

ओमान तट के पास तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में देवरिया के शिवानंद चौरसिया की मौत ने एक पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया। पत्नी, माँ और बुजुर्ग पिता ने सरकार से शव वापसी, मुआवजे और सरकारी नौकरी की गुहार लगाई है — लेकिन अब तक कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुँचा।

मुख्य बातें

शिवानंद चौरसिया , देवरिया, उत्तर प्रदेश के निवासी, ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में मारे गए।
परिवार ने केंद्र व राज्य सरकार से शव की सम्मानपूर्वक वापसी , आर्थिक मुआवजा और परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग की है।
शिवानंद परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे; उनके पीछे पत्नी सुशीला देवी , माँ कलावती देवी , बुजुर्ग पिता रामजी चौरसिया , एक बेटा और एक बेटी हैं।
घटना की सूचना मिलने के बाद से कोई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी परिवार से मिलने नहीं पहुँचा — पड़ोसी अजीत कुमार शाही के अनुसार।
परिवार की पूरी आजीविका शिवानंद की विदेशी कमाई पर निर्भर थी; उनके जाने से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर संकट मंडरा रहा है।

ओमान तट के निकट एक तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के निवासी शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई। 12 जून 2026 को सामने आई इस दुखद खबर के बाद से उनके परिवार में शोक और अनिश्चितता का गहरा माहौल है। पड़ोसियों के अनुसार, जिस जहाज पर शिवानंद कार्यरत थे, उस पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें उनकी मौत हो गई।

परिवार की स्थिति और मांगें

शिवानंद परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनकी आय पर ही पूरे परिवार का भरण-पोषण निर्भर था। परिजनों ने केंद्र और राज्य सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — शव का सम्मानपूर्वक भारत लाया जाना, पर्याप्त आर्थिक मुआवजा, और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद से अब तक कोई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी परिवार से मिलने नहीं पहुँचा है।

पत्नी और माँ का दर्द

शिवानंद की पत्नी सुशीला देवी ने भावुक होकर कहा कि उन्हें अभी भी उम्मीद है कि उनके पति सकुशल घर लौटेंगे। उन्होंने कहा, 'यदि उनके साथ कोई अनहोनी हुई है तो परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।' उन्होंने यह भी कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर है और किसी सदस्य को सरकारी नौकरी मिलने से भविष्य की परेशानियाँ कम हो सकती हैं।

शिवानंद की माँ कलावती देवी का हाल रो-रोकर बुरा है। उन्होंने बताया कि शिवानंद अपने पीछे एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं, जिनकी परवरिश और शिक्षा की ज़िम्मेदारी अब परिवार के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। उनके अनुसार परिवार में आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है।

पिता और पड़ोसी की अपील

शिवानंद के पिता रामजी चौरसिया ने कहा कि उनकी उम्र अब काफी हो चुकी है और इस परिस्थिति में परिवार को संभालना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

पड़ोसी अजीत कुमार शाही ने बताया कि सूचना मिलने के बाद से अब तक कोई सक्षम सरकारी प्रतिनिधि परिवार से मिलने नहीं आया। उन्होंने सरकार से माँग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शव सम्मानपूर्वक स्वदेश लाया जाए।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब ओमान तट पर समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और विदेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा एक बड़ा सवाल बनकर उभरी है। परिवार को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करेगी और उन्हें न्याय दिलाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

कानूनी सुरक्षा या आपातकालीन निकासी योजना के काम करते रहते हैं। सरकारी अधिकारियों का अब तक परिवार से न मिलना यह दर्शाता है कि संस्थागत संवेदनशीलता अभी भी उस स्तर पर नहीं पहुँची जो ऐसे मामलों में अपेक्षित है। ओमान और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, यह समय है कि सरकार विदेश में कार्यरत श्रमिकों के लिए युद्ध-जोखिम मुआवजा नीति को स्पष्ट और सार्वजनिक करे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवानंद चौरसिया की मौत कैसे हुई?
पड़ोसियों और परिजनों के अनुसार, शिवानंद चौरसिया ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर कार्यरत थे, जिस पर कथित तौर पर मिसाइल हमला हुआ। इस हमले में उनकी मौत हो गई।
शिवानंद के परिवार ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
परिवार ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — शव का सम्मानपूर्वक भारत लाया जाना, पर्याप्त आर्थिक मुआवजा, और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी। परिजनों का कहना है कि शिवानंद घर के एकमात्र कमाने वाले थे।
शिवानंद चौरसिया कहाँ के रहने वाले थे?
शिवानंद चौरसिया उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के निवासी थे। वे विदेश में रोज़गार के लिए ओमान तट पर एक तेल टैंकर पर काम कर रहे थे।
क्या सरकार ने अब तक परिवार से संपर्क किया है?
पड़ोसी अजीत कुमार शाही के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बाद से अब तक कोई वरिष्ठ या सक्षम सरकारी अधिकारी परिवार से मिलने नहीं पहुँचा है। परिवार सरकारी सहायता की प्रतीक्षा में है।
शिवानंद के जाने के बाद परिवार पर क्या असर पड़ा है?
शिवानंद परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पीछे पत्नी सुशीला देवी, बुजुर्ग माँ कलावती देवी, पिता रामजी चौरसिया, एक बेटा और एक बेटी हैं। परिवार अब आर्थिक और मानसिक दोनों संकटों से जूझ रहा है, और बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर भी अनिश्चितता है।
राष्ट्र प्रेस
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