ओमान तट पर तेल टैंकर हमले में देवरिया के शिवानंद चौरसिया की मौत, परिवार ने मांगा मुआवजा और सरकारी नौकरी
सारांश
मुख्य बातें
ओमान तट के निकट एक तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के निवासी शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई। 12 जून 2026 को सामने आई इस दुखद खबर के बाद से उनके परिवार में शोक और अनिश्चितता का गहरा माहौल है। पड़ोसियों के अनुसार, जिस जहाज पर शिवानंद कार्यरत थे, उस पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें उनकी मौत हो गई।
परिवार की स्थिति और मांगें
शिवानंद परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनकी आय पर ही पूरे परिवार का भरण-पोषण निर्भर था। परिजनों ने केंद्र और राज्य सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — शव का सम्मानपूर्वक भारत लाया जाना, पर्याप्त आर्थिक मुआवजा, और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद से अब तक कोई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी परिवार से मिलने नहीं पहुँचा है।
पत्नी और माँ का दर्द
शिवानंद की पत्नी सुशीला देवी ने भावुक होकर कहा कि उन्हें अभी भी उम्मीद है कि उनके पति सकुशल घर लौटेंगे। उन्होंने कहा, 'यदि उनके साथ कोई अनहोनी हुई है तो परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।' उन्होंने यह भी कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर है और किसी सदस्य को सरकारी नौकरी मिलने से भविष्य की परेशानियाँ कम हो सकती हैं।
शिवानंद की माँ कलावती देवी का हाल रो-रोकर बुरा है। उन्होंने बताया कि शिवानंद अपने पीछे एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं, जिनकी परवरिश और शिक्षा की ज़िम्मेदारी अब परिवार के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। उनके अनुसार परिवार में आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है।
पिता और पड़ोसी की अपील
शिवानंद के पिता रामजी चौरसिया ने कहा कि उनकी उम्र अब काफी हो चुकी है और इस परिस्थिति में परिवार को संभालना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
पड़ोसी अजीत कुमार शाही ने बताया कि सूचना मिलने के बाद से अब तक कोई सक्षम सरकारी प्रतिनिधि परिवार से मिलने नहीं आया। उन्होंने सरकार से माँग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शव सम्मानपूर्वक स्वदेश लाया जाए।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब ओमान तट पर समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और विदेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा एक बड़ा सवाल बनकर उभरी है। परिवार को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करेगी और उन्हें न्याय दिलाएगी।