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ओमान तट पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत, विशाखापत्तनम के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश भी शामिल

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ओमान तट पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत, विशाखापत्तनम के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश भी शामिल

सारांश

ओमान तट के पास होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी हमले की चपेट में आए तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर सवार तीन भारतीय नाविकों की जान गई। विशाखापत्तनम के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश का परिवार पार्थिव शरीर और सरकारी सहायता की प्रतीक्षा में है — यह घटना भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

एमटी सेट्टेबेलो तेल टैंकर पर होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई।
मारे गए नाविकों में विशाखापत्तनम के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश , डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया शामिल हैं।
जहाज के 21 अन्य चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया; तीनों भारतीयों के शव बाद में बरामद हुए।
पटनाला सुरेश की पत्नी भार्गवी और 13 व 10 वर्ष के दो बेटे हैं; परिवार ने पार्थिव शरीर की शीघ्र वापसी और आर्थिक सहायता की माँग की।
सुरेश के पिता पटनाला रामकृष्ण राव ने अधिकारियों से मृतक की तस्वीर तत्काल उपलब्ध कराने की अपील की।

ओमान तट के निकट होर्मुज स्ट्रेट के पास पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। मारे गए नाविकों में विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश के निवासी चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया शामिल हैं। तीनों के शव बाद में बरामद किए गए और 11 जून को उनकी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हुई।

हमले का घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, जहाज पर ड्रोन हमला हुआ, जिसके बाद तीनों भारतीय नाविक लापता हो गए। जहाज के शेष 21 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। बचाव अभियान के दौरान पहले दो शव मिले, और गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे अधिकारियों ने चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के शव मिलने की भी पुष्टि की। यह हमला रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट के निकट हुआ, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है।

परिवार की पीड़ा और अपील

पटनाला सुरेश अपने पीछे पत्नी भार्गवी और 1310 वर्ष के दो बेटों को छोड़ गए हैं। भार्गवी ने बताया कि बुधवार रात उन्हें जहाज पर हमले और पति के लापता होने की सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने लगातार कंपनी और दुबई स्थित कार्यालय से संपर्क किया। देर रात ऑनलाइन रिपोर्टों से दो शव मिलने की जानकारी मिली, लेकिन सुरेश का तब तक पता नहीं चल सका था।

भार्गवी ने भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि सभी औपचारिकताएँ शीघ्र पूरी कर उनके पति का पार्थिव शरीर भारत भेजा जाए, ताकि अंतिम संस्कार हो सके।

परिवार की माँगें

सुरेश के पिता पटनाला रामकृष्ण राव ने अधिकारियों से मृतक की तस्वीर तत्काल साझा करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि सुबह से लगातार जानकारी माँगी जा रही है, परंतु परिवार को अब तक आधिकारिक रूप से कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं कराई गई। परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता की भी माँग की है, यह कहते हुए कि सुरेश परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उन पर पत्नी तथा दो बच्चों की पूरी जिम्मेदारी थी।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि इस जलमार्ग से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है और इस क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में कई समुद्री घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं। भारतीय नाविकों की मौत ने एक बार फिर भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा और संकटग्रस्त क्षेत्रों में उनकी तैनाती पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

आगे क्या

परिवारों की प्राथमिकता अभी पार्थिव शरीरों की स्वदेश वापसी है। भारतीय अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे दूतावास के माध्यम से कंपनी और संबंधित देशों के साथ समन्वय कर इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करें। मृतक नाविकों के परिवारों को सरकारी राहत और मुआवजे के मुद्दे पर भी स्पष्टता की प्रतीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो क्या शिपिंग कंपनियाँ और भर्ती एजेंसियाँ चालक दल को पर्याप्त जोखिम-सूचना दे रही हैं? परिवार को घटना की जानकारी ऑनलाइन रिपोर्टों से मिली — यह संस्थागत संचार की विफलता को उजागर करता है। भारत सरकार को न केवल पार्थिव शरीरों की वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए, बल्कि उच्च-जोखिम क्षेत्रों में तैनात भारतीय समुद्री कर्मियों के लिए एक स्पष्ट संरक्षण और मुआवजा नीति भी बनानी चाहिए।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमान तट पर किस जहाज पर हमला हुआ और कौन से भारतीय नाविक मारे गए?
हमला पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर हुआ, जो होर्मुज स्ट्रेट के पास था। मारे गए तीन भारतीय नाविकों में विशाखापत्तनम के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया शामिल हैं।
एमटी सेट्टेबेलो पर हमले में कितने लोग बचे और कितने मारे गए?
जहाज के कुल चालक दल में से 21 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन भारतीय नाविक पहले लापता हुए और बाद में उनके शव बरामद किए गए। 11 जून को तीनों की मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हुई।
पटनाला सुरेश के परिवार ने सरकार से क्या माँगें की हैं?
सुरेश की पत्नी भार्गवी ने भारतीय दूतावास से पार्थिव शरीर की शीघ्र स्वदेश वापसी की अपील की है। परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता की भी माँग की है, क्योंकि सुरेश परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उन पर पत्नी व दो बच्चों की जिम्मेदारी थी।
होर्मुज स्ट्रेट के पास यह हमला क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक रणनीतिक और अत्यंत संवेदनशील जलमार्ग है, जहाँ से दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सैन्य अभियानों के बीच भारतीय नाविकों की मौत ने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या भारत सरकार इस मामले में कोई कार्रवाई कर रही है?
परिवारों के अनुसार, दुबई स्थित कंपनी कार्यालय ने बचाव अभियान की जानकारी दी थी। भारतीय दूतावास से पार्थिव शरीरों की वापसी और औपचारिकताएँ पूरी करने की अपील की गई है। सरकारी राहत और मुआवजे पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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