ओमान तट हमले में विशाखापत्तनम के मरीन इंजीनियर सुरेश पटनाला की मौत, जगन मोहन रेड्डी ने जताया शोक
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार, 12 जून को ओमान तट के निकट तेल टैंकर पर हुए हमले में विशाखापत्तनम के मरीन इंजीनियर सुरेश पटनाला की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया। इस हमले में कुल तीन भारतीय नाविक मारे गए, जिनमें सुरेश भी शामिल थे।
हमले का घटनाक्रम
बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर 'एमटी सेटेबेलो' पर हमला किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला अमेरिकी सेना ने तब किया जब जहाज ने कथित तौर पर अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश की। घटना के बाद शुरू में लापता घोषित किए गए तीनों भारतीय नाविकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई।
मृत भारतीय नाविकों का परिचय
इस हादसे में जान गंवाने वाले तीन भारतीय नाविक थे — आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम निवासी चीफ इंजीनियर सुरेश पटनाला, हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा और उत्तर प्रदेश के इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया। सुरेश के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं, जो इस दुखद खबर से गहरे सदमे में हैं।
जगन मोहन रेड्डी की संवेदनाएँ
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि 'इस घटना में तीन भारतीयों की मौत दुखद है। जान गंवाने वालों में आंध्र प्रदेश के सुरेश पटनाला का भी शामिल होना बहुत दुख की बात है। एक मरीन इंजीनियर की असमय मौत वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है और सुरेश के परिवार के दुख को शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता।' उन्होंने प्रार्थना की कि ईश्वर परिवार को यह भारी दुख सहने की शक्ति दे और सुरेश की आत्मा को शांति मिले।
पूर्व सांसद विजयसाई रेड्डी की अपील
पूर्व सांसद वी. विजयसाई रेड्डी ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'यह दुखद है कि तीन भारतीय नाविकों की जान एक ऐसे संघर्ष में चली गई जो हमारा था ही नहीं।' उन्होंने बताया कि वैश्विक समुद्री उद्योग में 3 लाख से अधिक भारतीय कार्यरत हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
विजयसाई रेड्डी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अपील की कि वे युद्धरत देशों से संपर्क स्थापित करें और अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएँ।
आगे क्या होगा
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा का सवाल अब राजनयिक स्तर पर उठाए जाने की माँग तेज हो रही है। विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और मृतकों के परिजनों को मुआवजे के संबंध में आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा है।