गौतमबुद्ध नगर में 'ऑपरेशन फास्ट' 1 नवंबर से: एंबुलेंस को मिलेगी 24 घंटे ट्रैफिक क्लीयरेंस, UP में पहली बार
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने 1 नवंबर 2026 से 'ऑपरेशन फास्ट' (Fast Ambulance Seamless Transition) लागू करने की घोषणा की है, जिसके तहत आपातकालीन एंबुलेंस को ट्रैफिक में सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में शुरू की जा रही यह पहल लागू करने वाला गौतमबुद्ध नगर उत्तर प्रदेश का पहला जनपद बन गया है। इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य ट्रैफिक जाम के कारण होने वाली जीवनरक्षक उपचार में देरी को समाप्त करना और रोकी जा सकने वाली मौतों की संख्या घटाना है।
योजना की संरचना और कार्यप्रणाली
इस योजना का प्रस्ताव पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) शैव्या गोयल ने विस्तृत शोध के बाद तैयार किया है। ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम में 24 घंटे संचालित होने वाला एक समर्पित एंबुलेंस ट्रैफिक सेल स्थापित किया जा रहा है, जिसके लिए हेल्पलाइन नंबर 9218981716 जारी किया गया है। जिले के 72 अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ पुलिस बैठक कर चुकी है और 108 एंबुलेंस सेवा को भी इस व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।
इस प्रणाली में जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों, एंबुलेंस सेवा प्रदाताओं तथा आपातकालीन डिस्पैच केंद्रों को एकीकृत किया गया है। जब किसी एंबुलेंस को ट्रैफिक सहायता की आवश्यकता होगी, तो एंबुलेंस डिस्पैचर, अस्पताल का कंट्रोल रूम या एंबुलेंस कर्मचारी अपनी लोकेशन, गंतव्य अस्पताल और प्रस्तावित रूट की जानकारी समर्पित सेल को देगा।
रोलिंग ट्रैफिक क्लीयरेंस: कैसे काम करेगा तंत्र
यह पूरी व्यवस्था रोलिंग ट्रैफिक क्लीयरेंस मैकेनिज्म पर आधारित है — यानी एंबुलेंस जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, उसके अगले चौराहों पर पहले से ट्रैफिक नियंत्रित कर दिया जाएगा। सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम संबंधित मार्ग पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को अलर्ट करेगा। ज़रूरत के अनुसार ट्रैफिक सिग्नल का संचालन अस्थायी रूप से बदला जा सकेगा, विपरीत दिशा के यातायात को नियंत्रित किया जाएगा और वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था की जाएगी।
इसके अतिरिक्त शहर में लगे पब्लिक एड्रेस सिस्टम और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम की मदद से भी ट्रैफिक प्रबंधन किया जाएगा। पीए सिस्टम के माध्यम से वाहन चालकों को एंबुलेंस के आने की सूचना देकर रास्ता देने की अपील की जाएगी।
ट्रायल रन में मिली सफलता
इस व्यवस्था की व्यावहारिकता जाँचने के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने पहले ट्रायल रन भी किया था। व्यस्त ट्रैफिक के दौरान एक एंबुलेंस ने चिल्ला बॉर्डर से मैक्स हॉस्पिटल और फोर्टिस हॉस्पिटल तक लगभग 12 किलोमीटर की दूरी प्रत्येक मार्ग पर करीब 10 मिनट में तय की। पुलिस के अनुसार यह ट्रायल सामान्य यातायात को बाधित किए बिना प्रभावी ट्रैफिक समन्वय के ज़रिए सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इससे यह साबित हुआ कि भीड़भाड़ के दौरान भी बेहतर तालमेल से एंबुलेंस का सफर-समय काफी कम किया जा सकता है।
किन मरीजों को मिलेगी विशेष प्राथमिकता
ऑपरेशन फास्ट के तहत सड़क दुर्घटना में घायल लोगों और गंभीर ट्रॉमा मरीजों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सिर में गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव, कई फ्रैक्चर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी आपातकालीन स्थितियों में हर मिनट मरीज के लिए निर्णायक होता है। यह पहल जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट की अवधारणा के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करना है।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सड़क पर एंबुलेंस दिखाई देने पर उसे तुरंत रास्ता दें, चौराहों और सड़कों को अवरुद्ध न करें तथा ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें। यदि यह पहल अपेक्षित परिणाम देती है, तो इसे उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी लागू किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।