ऑपरेशन मिलाप: गुजरात पुलिस ने 14 दिनों में 701 लापता लोगों को परिवारों से मिलाया

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ऑपरेशन मिलाप: गुजरात पुलिस ने 14 दिनों में 701 लापता लोगों को परिवारों से मिलाया

सारांश

गुजरात पुलिस का ऑपरेशन मिलाप सिर्फ एक पुलिस अभियान नहीं — यह 24,767 से अधिक लंबित मामलों के बोझ तले दबे परिवारों की उम्मीद की वापसी है। 14 दिनों में 701 लोगों की बरामदगी बताती है कि डेटा, तकनीक और इच्छाशक्ति एक साथ आएँ तो नतीजे मिलते हैं।

मुख्य बातें

ऑपरेशन मिलाप के तहत गुजरात पुलिस ने 7 से 21 मई 2025 के बीच 701 लापता व्यक्तियों को उनके परिजनों से मिलाया।
बरामद लोगों में 19 नाबालिग लड़के , 97 नाबालिग लड़कियाँ , 417 महिलाएँ और 168 पुरुष शामिल हैं।
2007 से अब तक गुजरात में लापता व्यक्तियों के 24,767 से अधिक मामले दर्ज हैं।
राव के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है; सभी थानों को 15-सूत्रीय SOP जारी की गई है।
यह ऑपरेशन मानव तस्करी और बाल तस्करी नेटवर्क के खिलाफ भी एक सक्रिय कदम है।

गुजरात पुलिस ने 7 मई से 21 मई 2025 के बीच मात्र दो हफ्तों में 701 लापता व्यक्तियों को उनके परिजनों से मिलाने में सफलता हासिल की है। ऑपरेशन मिलाप के नाम से चलाए जा रहे इस विशेष अभियान की शुरुआत गुजरात पुलिस महानिदेशक (DGP) डॉ. के.एल.एन. राव के मार्गदर्शन में हुई और यह 2007 से अब तक के पेंडिंग लापता व्यक्तियों के मामलों को फिर से खंगालने पर केंद्रित है।

ऑपरेशन का दायरा और संरचना

राज्य सरकार के अनुसार, 2007 से अब तक गुजरात में लापता व्यक्तियों के 24,767 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। इस ऑपरेशन के तहत प्रत्येक पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को पुराने लंबित मामलों को पुनः खोलने, समीक्षा करने और गहन जाँच करने के निर्देश दिए गए हैं। गुजरात पुलिस ने सभी थानों को 15-सूत्रीय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है।

इस SOP में केस फाइलें दोबारा खोलना, शिकायतकर्ताओं से पुनः संपर्क करना, डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों की जाँच, सोशल मीडिया गतिविधि ट्रैकिंग, परिवहन केंद्रों और आश्रय स्थलों की जाँच, संदिग्ध मानव तस्करों से पूछताछ तथा अज्ञात शवों की तस्वीरों का लापता व्यक्तियों के रिकॉर्ड से मिलान शामिल है।

मिले 701 लोगों का विवरण

पिछले दो हफ्तों में बरामद 701 व्यक्तियों में 19 नाबालिग लड़के, 97 नाबालिग लड़कियाँ, 417 महिलाएँ और 168 पुरुष शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा, "मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल की अगुआई में गुजरात पुलिस ने लापता लोगों को ढूँढने के लिए एक विशेष ऑपरेशन शुरू किया है। इसके लिए पुलिस को सभी जरूरी संसाधन दिए गए हैं।"

तकनीक और खुफिया तंत्र का उपयोग

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP), CID क्राइम और रेलवे (महिला सेल), अजय चौधरी ने बताया, "यह ऑपरेशन डेटा, तकनीकी खुफिया और मानवीय खुफिया के आधार पर चलाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए हैं।" अधिकारियों को लापता व्यक्तियों के मोबाइल फोन की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, अंतिम सक्रिय लोकेशन ट्रैकिंग और फेसबुक, इंस्टाग्राम व व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर सोशल मीडिया गतिविधि की जाँच के निर्देश दिए गए हैं।

एक केस स्टडी: वडोदरा की महिला दस साल बाद मिली

ऑपरेशन मिलाप की एक उल्लेखनीय सफलता वडोदरा जिले के पादरा तालुका की एक महिला से जुड़ी है। 23 वर्षीया यह महिला 2016 में अपने पाँच वर्षीय बेटे के साथ लापता हो गई थी। उसके पति ने पुलिस को बताया था कि वह एक घाट पर गई और वापस नहीं लौटी। दस साल बाद जब ऑपरेशन मिलाप के तहत मामले की पुनः जाँच शुरू हुई, तो परिवार से संपर्क में पता चला कि महिला को कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर देखा गया था।

पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खंगाले और पाया कि महिला अब राजकोट में अपने दूसरे पति के साथ रह रही है और गरबा क्लास चलाती है। उसका बेटा, जो लापता होने के समय पाँच साल का था, अब 15 वर्ष का है। जाँच में सामने आया कि महिला ने पारिवारिक विवादों के चलते पहला घर छोड़ा था और 2016 में दूसरी शादी कर ली थी।

मानव तस्करी के खिलाफ भी मोर्चा

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह ऑपरेशन केवल लापता व्यक्तियों को ढूँढने तक सीमित नहीं है। यह मानव तस्करी गिरोहों, बाल तस्करी और नवजात शिशुओं की बिक्री में शामिल आपराधिक नेटवर्क को समाप्त करने की एक सुनियोजित कोशिश भी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, "गायब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं — पारिवारिक विवाद, वैवाहिक कलह, परीक्षा का तनाव, असफल प्रेम संबंध, आर्थिक कठिनाइयाँ और आपराधिक शोषण।" पुलिस ने कहा कि यह ऑपरेशन जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 24,767 में से केवल 701 — यानी तीन प्रतिशत से भी कम — इतने कम समय में क्यों मिले, जबकि बाकी मामले वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़े थे। यह ऑपरेशन सिस्टम की क्षमता नहीं, बल्कि उस उपेक्षा को उजागर करता है जो राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में पुराने मामलों को दफन कर देती है। मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का दावा सराहनीय है, लेकिन अब तक कितने तस्कर गिरफ्तार हुए — इस पर पारदर्शिता जरूरी है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन मिलाप क्या है?
ऑपरेशन मिलाप गुजरात पुलिस का एक विशेष अभियान है जिसे 2007 से दर्ज लापता व्यक्तियों के पेंडिंग मामलों को फिर से खोलकर हल करने के लिए शुरू किया गया है। इसके तहत डेटा, तकनीकी खुफिया और मानवीय खुफिया का उपयोग करते हुए 7 से 21 मई 2025 के बीच 701 लोगों को उनके परिवारों से मिलाया गया।
ऑपरेशन मिलाप में कितने और किस तरह के लोग मिले?
14 दिनों में मिले 701 लोगों में 19 नाबालिग लड़के, 97 नाबालिग लड़कियाँ, 417 महिलाएँ और 168 पुरुष शामिल हैं। ये सभी गुजरात के विभिन्न जिलों के पुलिस थानों द्वारा खोजे गए।
गुजरात में लापता व्यक्तियों के कुल कितने मामले दर्ज हैं?
गुजरात पुलिस के अनुसार 2007 से अब तक राज्य में लापता व्यक्तियों के 24,767 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। ऑपरेशन मिलाप इन्हीं पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर फिर से जाँचने का प्रयास है।
ऑपरेशन मिलाप में पुलिस किन तरीकों का इस्तेमाल कर रही है?
पुलिस मोबाइल फोन इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, सोशल मीडिया ट्रैकिंग, अज्ञात शवों की तस्वीरों का मिलान, परिवहन केंद्रों की जाँच और संदिग्ध तस्करों से पूछताछ जैसे तरीके अपना रही है। सभी थानों को 15-सूत्रीय SOP भी जारी की गई है।
क्या ऑपरेशन मिलाप मानव तस्करी के खिलाफ भी काम कर रहा है?
हाँ, पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह ऑपरेशन केवल लापता व्यक्तियों को ढूँढने तक सीमित नहीं है। यह मानव तस्करी गिरोहों, बाल तस्करी और नवजात शिशुओं की बिक्री में संलिप्त आपराधिक नेटवर्क को समाप्त करने की भी कोशिश है।
राष्ट्र प्रेस
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