राजस्थान में ऑपरेशन वज्र प्रहार: बारां पुलिस ने नशा तस्करों की ₹5.82 करोड़ की संपत्तियाँ फ्रीज कीं

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राजस्थान में ऑपरेशन वज्र प्रहार: बारां पुलिस ने नशा तस्करों की ₹5.82 करोड़ की संपत्तियाँ फ्रीज कीं

सारांश

राजस्थान के बारां में पुलिस ने 'ऑपरेशन वज्र प्रहार' के तहत कथित ड्रग्स तस्कर परिवार की ₹5.82 करोड़ की संपत्तियाँ फ्रीज कर दीं — दो बंगले, चार वाहन और ₹3.32 करोड़ का बैंक बैलेंस। यह कार्रवाई सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, तस्करों की आर्थिक नींव उखाड़ने की नई रणनीति है।

मुख्य बातें

बारां पुलिस ने ऑपरेशन वज्र प्रहार के तहत कथित नशा तस्कर किशोर कुमार मीणा और उसके परिवार की ₹5.82 करोड़ की संपत्तियाँ फ्रीज कीं।
फ्रीज की गई संपत्तियों में दो बंगले , स्कॉर्पियो एसयूवी , मारुति कार , ट्रैक्टर , मोटरसाइकिल , स्कूटर और ₹3.32 करोड़ का बैंक बैलेंस शामिल है।
पहले इन आरोपियों से 263 किलोग्राम डोडा-चूरा जब्त हो चुका था, जिसकी कीमत कथित तौर पर ₹39.45 लाख बताई गई थी।
कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ के तहत नई दिल्ली स्थित केंद्रीय सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बाद हुई।
आयकर विभाग , स्टांप विभाग , जीएसटी और मनी लॉन्ड्रिंग एजेंसियाँ भी अब जांच में जुट गई हैं।

राजस्थान के बारां जिले में नशा तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई करते हुए बारां पुलिस ने 'ऑपरेशन वज्र प्रहार' के तहत कथित ड्रग्स तस्कर किशोर कुमार मीणा, उसके भाई घनश्याम मीणा और पत्नी अनीता मीणा की ₹5.82 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ के तहत स्थायी रूप से फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 18 मई को की गई यह कार्रवाई राज्य सरकार की नशा तस्करी के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा बताई जा रही है।

क्या-क्या फ्रीज हुआ

पुलिस ने इस अभियान में दो आलीशान बंगले, एक स्कॉर्पियो एसयूवी, एक मारुति कार, एक ट्रैक्टर, एक मोटरसाइकिल, एक स्कूटर और करोड़ों रुपए के बैंक बैलेंस को फ्रीज किया है। अधिकारियों के अनुसार, अब तीनों आरोपी इन संपत्तियों का उपयोग, बिक्री या हस्तांतरण नहीं कर सकेंगे।

वित्तीय जांच में क्या सामने आया

छीपाबड़ौद थाना क्षेत्र के निवासी किशोर कुमार मीणा और उसके परिजनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के दो गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं, जिनमें व्यावसायिक मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए थे। इन मामलों में पुलिस पहले 263 किलोग्राम डोडा-चूरा (अफीम के टूटे हुए हिस्से) जब्त कर चुकी है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कथित तौर पर ₹39.45 लाख बताई गई थी।

गुप्त वित्तीय जांच में यह उजागर हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में तीनों आरोपियों के बैंक खातों में ₹3.32 करोड़ जमा हुए, जबकि उनकी कोई वैध आय का स्रोत सामने नहीं आया। इसके अतिरिक्त ₹2.50 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ भी जांच में सामने आईं।

केंद्रीय प्राधिकरण की मंजूरी

छीपाबड़ौद थाने द्वारा तैयार की गई विस्तृत वित्तीय जांच रिपोर्ट नई दिल्ली स्थित भारत सरकार के सक्षम प्राधिकरण को भेजी गई थी। जांच के बाद प्राधिकरण ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ के तहत संपत्तियाँ फ्रीज करने की मंजूरी दी, जिसके बाद बारां पुलिस ने यह कार्रवाई अंजाम दी।

अन्य एजेंसियों की जांच

इस ऑपरेशन के बाद कई अन्य सरकारी एजेंसियाँ भी सक्रिय हो गई हैं। पुलिस के अनुसार, आयकर विभाग आरोपियों की आय से अधिक संपत्तियों की जांच कर रहा है। स्टांप विभाग संदिग्ध नोटरी दस्तावेजों की पड़ताल में जुटा है। इसके साथ ही जीएसटी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अधीक्षक का बयान और आगे की रणनीति

पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने कहा कि बारां पुलिस केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अवैध कमाई से खड़े किए गए उनके पूरे आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रहार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रग्स तस्करी के गिरोहों की 'आर्थिक कमर तोड़ना' इस अभियान का मूल उद्देश्य है और आगे भी ऐसी वित्तीय कार्रवाइयाँ जारी रहेंगी।

इस ऑपरेशन में छीपाबड़ौद थाना प्रभारी योगेश चौहान, विनोद कुमार, विमलेश मेहता, कांस्टेबल अनिल कुमार और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कांस्टेबल कंवरपाल की अहम भूमिका रही। यह कार्रवाई राजस्थान में नशा तस्करी के खिलाफ वित्तीय दबाव की रणनीति को नई दिशा देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी अवैध संपत्ति को निशाना बनाया जा रहा है। एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ का उपयोग अभी भी देश के अधिकांश जिलों में दुर्लभ है, इसलिए बारां का यह प्रयोग एक मॉडल बन सकता है। हालाँकि, असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह संपत्ति फ्रीज अंततः न्यायालय में टिकती है और क्या दोष-सिद्धि तक पहुँचती है — क्योंकि भारत में एनडीपीएस मामलों में सजा की दर ऐतिहासिक रूप से अपेक्षाओं से कम रही है। आयकर, जीएसटी और मनी लॉन्ड्रिंग एजेंसियों का एक साथ सक्रिय होना स्वागत योग्य है, लेकिन एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी अक्सर ऐसे मामलों को कमज़ोर कर देती है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन वज्र प्रहार क्या है?
ऑपरेशन वज्र प्रहार राजस्थान के बारां जिले में पुलिस द्वारा चलाया गया नशा-विरोधी वित्तीय अभियान है, जिसके तहत कथित ड्रग्स तस्करों की अवैध संपत्तियों और बैंक खातों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ के अंतर्गत फ्रीज किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य तस्करों के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है।
किशोर कुमार मीणा की कितनी और कौन-सी संपत्तियाँ फ्रीज हुईं?
कथित नशा तस्कर किशोर कुमार मीणा, उसके भाई घनश्याम मीणा और पत्नी अनीता मीणा की कुल ₹5.82 करोड़ की संपत्तियाँ फ्रीज की गई हैं। इनमें दो आलीशान बंगले, स्कॉर्पियो एसयूवी, मारुति कार, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल, स्कूटर और ₹3.32 करोड़ का बैंक बैलेंस शामिल है।
एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ क्या है?
एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट की धारा 68-एफ सक्षम प्राधिकरण को नशीले पदार्थों की तस्करी से अर्जित कथित संपत्तियों को फ्रीज या जब्त करने का अधिकार देती है। इसके तहत आरोपी फ्रीज संपत्ति का उपयोग, बिक्री या हस्तांतरण नहीं कर सकता।
इस मामले में अब तक क्या बरामदगी हो चुकी है?
इससे पहले पुलिस आरोपियों से 263 किलोग्राम डोडा-चूरा (अफीम के टूटे हुए हिस्से) जब्त कर चुकी है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कथित तौर पर ₹39.45 लाख बताई गई थी। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के दो गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं।
इस कार्रवाई में कौन-सी अन्य एजेंसियाँ जांच कर रही हैं?
बारां पुलिस की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग, स्टांप विभाग, जीएसटी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी एजेंसियाँ भी जांच में शामिल हो गई हैं। पुलिस के अनुसार, ये सभी एजेंसियाँ आरोपियों की आय से अधिक संपत्तियों और संदिग्ध दस्तावेजों की अलग-अलग पड़ताल कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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