पद्मश्री डॉ. गिरीश भारद्वाज का निधन: '140 से अधिक सस्पेंशन ब्रिज के निर्माता' को CM शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के प्रसिद्ध इंजीनियर और पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ. गिरीश भारद्वाज का निधन हो गया है। देशभर में 140 से अधिक सस्पेंशन ब्रिज निर्मित कर ग्रामीण भारत को कनेक्टिविटी देने वाले इस असाधारण इंजीनियर के जाने से तकनीकी और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक अपूरणीय रिक्तता उत्पन्न हो गई है। उनके निधन की खबर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित राज्य के वरिष्ठ नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार का शोक संदेश
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, "पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और 'सस्पेंशन ब्रिजों के प्रमुख' के तौर पर मशहूर डॉ. गिरीश भारद्वाज के निधन की दुखद खबर से गहरा दुख हुआ है। उनके जाने से राज्य ने तकनीकी क्षेत्र में एक असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्ति को खो दिया है।"
मुख्यमंत्री ने आगे लिखा कि डॉ. भारद्वाज ने देशभर में 140 से अधिक सस्पेंशन ब्रिज बनाकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों को जोड़ा और लोगों का जीवन सुगम बनाया। उनकी निस्वार्थ तकनीकी सेवा से प्रभावित होकर ग्रामीण उन्हें प्यार से 'सुल्लिय के विश्वेश्वरैया' कहते थे।
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर की श्रद्धांजलि
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने भी एक्स पर अपना शोक व्यक्त करते हुए कहा कि 'ब्रिज मैन ऑफ इंडिया' के नाम से विख्यात पद्मश्री डॉ. गिरीश भारद्वाज के निधन से उन्हें गहरा सदमा पहुँचा है। उन्होंने कहा, "तकनीकी क्षेत्र के इस महान दूरदर्शी का जाना विज्ञान, तकनीक और समाज सेवा के क्षेत्रों के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।"
उपमुख्यमंत्री ने डॉ. भारद्वाज के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि ग्रामीण भारत के विकास और कनेक्टिविटी क्रांति में उनकी भूमिका बेमिसाल रही। अपनी सादगी और निस्वार्थ सेवाभाव के कारण 'सुल्लिय के विश्वेश्वरैया' के रूप में लोगों के दिलों में बसे डॉ. भारद्वाज की विरासत अमिट रहेगी।
डॉ. भारद्वाज की विरासत
डॉ. गिरीश भारद्वाज को भारत के दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में किफायती सस्पेंशन ब्रिज निर्मित करने के लिए जाना जाता था। उनके बनाए पुलों ने कर्नाटक सहित देशभर के ऐसे गाँवों को मुख्यधारा से जोड़ा, जहाँ पहुँचना पहले अत्यंत कठिन था। भारत सरकार ने उनकी इस असाधारण सेवा को मान्यता देते हुए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
गौरतलब है कि उनकी तुलना कर्नाटक के महान इंजीनियर सर एम. विश्वेश्वरैया से की जाती थी — यह उपाधि उनके गृहनगर सुल्लिय के लोगों ने उन्हें स्वतः प्रदान की थी, जो उनके प्रति जनमानस के असीम सम्मान को दर्शाती है।
आगे की राह
डॉ. भारद्वाज के निधन के बाद उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति राज्य सरकार और जनप्रतिनिधियों ने संवेदनाएँ प्रकट की हैं। उनके द्वारा छोड़ी गई तकनीकी और सामाजिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के इंजीनियरों और समाजसेवियों को प्रेरणा देती रहेगी।