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पलामू सदर अस्पताल में 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र कांड: डिजिटल सिग्नेचर दुरुपयोग पर FIR दर्ज

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पलामू सदर अस्पताल में 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र कांड: डिजिटल सिग्नेचर दुरुपयोग पर FIR दर्ज

सारांश

पलामू सदर अस्पताल में एक कंप्यूटर ऑपरेटर के जरिए बाहरी व्यक्ति को पोर्टल एक्सेस देना अब 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों के कांड में बदल गया है। यह पलामू-मेदिनीनगर क्षेत्र में इस तरह की चौथी बड़ी घटना है — सवाल उठता है कि डिजिटल प्रणाली सुरक्षित है या सिर्फ कागज पर।

मुख्य बातें

पलामू सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ.
विजय कुमार के डिजिटल सिग्नेचर का कथित दुरुपयोग कर 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए।
सभी 33 प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए; मेदिनीनगर टाउन थाना में FIR दर्ज।
बिश्रामपुर निवासी शिवनारायण साव को अस्पताल पोर्टल आईडी दिए जाने की बात जांच में सामने आई।
पुलिस पोर्टल लॉगिन, सिस्टम रिकॉर्ड और तकनीकी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पलामू-मेदिनीनगर में जुलाई 2025 , सितंबर 2025 और मई 2026 में भी इसी तरह के फर्जी प्रमाण पत्र मामले सामने आ चुके हैं।

पलामू सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विजय कुमार के डिजिटल सिग्नेचर का कथित तौर पर दुरुपयोग कर 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला 14 सितंबर 2026 को सामने आया। ये प्रमाण पत्र न केवल जारी किए गए, बल्कि उनका वितरण भी हो चुका था। मामला उजागर होते ही सभी 33 प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए और अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर मेदिनीनगर टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।

मामला कैसे आया सामने

प्राथमिकी के अनुसार, सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने की जिम्मेदारी कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार को सौंपी गई थी। काम के अत्यधिक दबाव के चलते बिश्रामपुर निवासी शिवनारायण साव को भी पोर्टल की आईडी उपलब्ध कराई गई थी। शिवनारायण साव के कार्यकाल और पोर्टल गतिविधियों की समीक्षा के दौरान उपाधीक्षक के डिजिटल सिग्नेचर के कथित दुरुपयोग का खुलासा हुआ।

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डिजिटल सिग्नेचर का वास्तविक उपयोग किसने और किन परिस्थितियों में किया। जांच में पोर्टल लॉगिन रिकॉर्ड, सिस्टम लॉग, डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग का तकनीकी विश्लेषण और प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है।

जांच का दायरा

जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि 33 प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन किसने किए और उन्हें किस स्तर पर स्वीकृति दी गई। सभी संबंधित तकनीकी रिकॉर्ड और दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला साइबर धोखाधड़ी और सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग, दोनों पहलुओं से जुड़ा है।

पलामू में फर्जी प्रमाण पत्र का पुराना इतिहास

गौरतलब है कि पलामू और मेदिनीनगर क्षेत्र में जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े फर्जीवाड़े की यह पहली घटना नहीं है। मई 2026 में गढ़वा के मेराल प्रखंड में एक ऑनलाइन सेंटर से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का मामला उजागर हुआ था, जिसमें सेंटर संचालक के साथ-साथ मेदिनीनगर से जुड़े एक व्यक्ति का नाम भी सामने आया था।

इससे पहले जुलाई 2025 में मेदिनीनगर कचहरी परिसर में संचालित एक ऑनलाइन सेंटर से बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र बरामद किए गए थे। उन पर अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए थे और पुलिस ने सेंटर संचालक को गिरफ्तार कर सेंटर सील कर दिया था। सितंबर 2025 में मेदिनीनगर निगम के एक कंप्यूटर ऑपरेटर पर जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर सरकारी शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूलने का आरोप लगा था, और जांच के बाद उस ऑपरेटर को हटाया गया था।

डिजिटल प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल

यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण को पारदर्शिता और दक्षता का माध्यम माना जा रहा है। एक के बाद एक सामने आ रहे ये मामले डिजिटल प्रमाणीकरण प्रणाली की कमज़ोरियों और अनधिकृत पहुँच के खतरों को उजागर करते हैं। आलोचकों का कहना है कि पोर्टल एक्सेस का बाहरी व्यक्तियों को दिया जाना बड़ी प्रशासनिक चूक है।

मौजूदा जांच के नतीजे न केवल इस मामले की सच्चाई उजागर करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि पलामू ज़िले में डिजिटल प्रमाण पत्र प्रणाली को कितना सुरक्षित किया जाना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताती है कि पहले के मामलों से कोई संस्थागत सबक नहीं लिया गया। डिजिटल सिग्नेचर अगर किसी तीसरे व्यक्ति की पहुँच में आ सकता है, तो ऐसे प्रमाण पत्रों पर आधारित पूरी नागरिक पहचान प्रणाली की विश्वसनीयता दाँव पर है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पलामू सदर अस्पताल में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का मामला क्या है?
उपाधीक्षक डॉ. विजय कुमार के डिजिटल सिग्नेचर का कथित तौर पर दुरुपयोग कर 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए और उनका वितरण भी हो गया। मामला सामने आने के बाद सभी 33 प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए और FIR दर्ज की गई है।
इस फर्जीवाड़े में किस व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध है?
जांच के अनुसार, बिश्रामपुर निवासी शिवनारायण साव को सदर अस्पताल का पोर्टल एक्सेस दिया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान डिजिटल सिग्नेचर के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया, हालांकि पुलिस अभी यह निर्धारित कर रही है कि सिग्नेचर का वास्तविक उपयोग किसने किया।
क्या पलामू में इससे पहले भी ऐसे मामले हो चुके हैं?
हाँ, यह पहला मामला नहीं है। मई 2026 में गढ़वा के मेराल प्रखंड में, जुलाई 2025 में मेदिनीनगर कचहरी परिसर में और सितंबर 2025 में मेदिनीनगर निगम में भी फर्जी प्रमाण पत्र या अवैध वसूली के मामले सामने आए थे।
अब जांच किस दिशा में जा रही है?
पुलिस पोर्टल लॉगिन, सिस्टम रिकॉर्ड, डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग का तकनीकी विश्लेषण और प्रमाण पत्रों के आवेदनकर्ताओं की पड़ताल कर रही है। यह पता लगाना भी जरूरी है कि किस स्तर पर इन प्रमाण पत्रों को स्वीकृति मिली।
रद्द किए गए प्रमाण पत्रों का क्या होगा जो पहले ही वितरित हो चुके हैं?
अस्पताल प्रबंधन ने सभी 33 प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित लाभार्थियों और प्रक्रिया के बारे में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है, लेकिन अभी तक इस पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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