पलामू सदर अस्पताल में 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र कांड: डिजिटल सिग्नेचर दुरुपयोग पर FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
पलामू सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विजय कुमार के डिजिटल सिग्नेचर का कथित तौर पर दुरुपयोग कर 33 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला 14 सितंबर 2026 को सामने आया। ये प्रमाण पत्र न केवल जारी किए गए, बल्कि उनका वितरण भी हो चुका था। मामला उजागर होते ही सभी 33 प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए और अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर मेदिनीनगर टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।
मामला कैसे आया सामने
प्राथमिकी के अनुसार, सदर अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र बनाने की जिम्मेदारी कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार को सौंपी गई थी। काम के अत्यधिक दबाव के चलते बिश्रामपुर निवासी शिवनारायण साव को भी पोर्टल की आईडी उपलब्ध कराई गई थी। शिवनारायण साव के कार्यकाल और पोर्टल गतिविधियों की समीक्षा के दौरान उपाधीक्षक के डिजिटल सिग्नेचर के कथित दुरुपयोग का खुलासा हुआ।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डिजिटल सिग्नेचर का वास्तविक उपयोग किसने और किन परिस्थितियों में किया। जांच में पोर्टल लॉगिन रिकॉर्ड, सिस्टम लॉग, डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग का तकनीकी विश्लेषण और प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है।
जांच का दायरा
जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि 33 प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन किसने किए और उन्हें किस स्तर पर स्वीकृति दी गई। सभी संबंधित तकनीकी रिकॉर्ड और दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला साइबर धोखाधड़ी और सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग, दोनों पहलुओं से जुड़ा है।
पलामू में फर्जी प्रमाण पत्र का पुराना इतिहास
गौरतलब है कि पलामू और मेदिनीनगर क्षेत्र में जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े फर्जीवाड़े की यह पहली घटना नहीं है। मई 2026 में गढ़वा के मेराल प्रखंड में एक ऑनलाइन सेंटर से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का मामला उजागर हुआ था, जिसमें सेंटर संचालक के साथ-साथ मेदिनीनगर से जुड़े एक व्यक्ति का नाम भी सामने आया था।
इससे पहले जुलाई 2025 में मेदिनीनगर कचहरी परिसर में संचालित एक ऑनलाइन सेंटर से बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र बरामद किए गए थे। उन पर अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए थे और पुलिस ने सेंटर संचालक को गिरफ्तार कर सेंटर सील कर दिया था। सितंबर 2025 में मेदिनीनगर निगम के एक कंप्यूटर ऑपरेटर पर जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के नाम पर सरकारी शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूलने का आरोप लगा था, और जांच के बाद उस ऑपरेटर को हटाया गया था।
डिजिटल प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण को पारदर्शिता और दक्षता का माध्यम माना जा रहा है। एक के बाद एक सामने आ रहे ये मामले डिजिटल प्रमाणीकरण प्रणाली की कमज़ोरियों और अनधिकृत पहुँच के खतरों को उजागर करते हैं। आलोचकों का कहना है कि पोर्टल एक्सेस का बाहरी व्यक्तियों को दिया जाना बड़ी प्रशासनिक चूक है।
मौजूदा जांच के नतीजे न केवल इस मामले की सच्चाई उजागर करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि पलामू ज़िले में डिजिटल प्रमाण पत्र प्रणाली को कितना सुरक्षित किया जाना बाकी है।