पेपर लीक कानून का स्वागत, 'वन नेशन वन इलेक्शन' अव्यावहारिक: NCP नेता नसीम सिद्दीकी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता नसीम सिद्दीकी ने 31 जुलाई को मुंबई में पेपर लीक विरोधी कानून, 'वंदे मातरम' विधेयक, 'वन नेशन, वन इलेक्शन' प्रस्ताव, छात्र आंदोलनों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और भिवंडी इमारत हादसे समेत कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने पेपर लीक रोकने के लिए बने नए कानून का स्वागत किया, लेकिन साथ ही केंद्र सरकार से इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जवाब भी माँगा।
पेपर लीक कानून: स्वागत, पर सवाल भी
सिद्दीकी ने कहा कि पेपर लीक विरोधी कानून एक सकारात्मक कदम है और उनकी पार्टी इसका स्वागत करती है। उन्होंने कहा, 'देश के युवाओं और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए।' उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के पिछले 10-12 वर्षों के दौरान लगभग 70 बार पेपर लीक की घटनाएँ सामने आई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर कि पेपर लीक माफिया को बख्शा नहीं जाएगा, सिद्दीकी ने कहा कि प्रधानमंत्री कड़े संदेश तो देते हैं, लेकिन उनका असर जमीन पर नहीं दिखता। उन्होंने माँग की कि अब तक हुए सभी पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने विशेष रूप से बिहार से जुड़े कुछ गिरोहों का उल्लेख किया, जिनके तार कथित तौर पर पूरे देश में फैले हुए हैं।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' व्यावहारिक रूप से असंभव
सिद्दीकी ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के प्रस्ताव को व्यावहारिक रूप से असंभव बताया। उन्होंने तर्क दिया कि जब चुनाव आयोग कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी एक ही चरण में नहीं करा पाता, तो पूरे देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराना संभव नहीं है। उनके अनुसार, 'यह प्रधानमंत्री मोदी का सपना हो सकता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इसे लागू करना कठिन है।'
'वंदे मातरम' विधेयक पर तटस्थ रुख
'वंदे मातरम' विधेयक पर NCP (शरद पवार गुट) का रुख तटस्थ बताते हुए सिद्दीकी ने कहा कि उनकी पार्टी न तो इस बिल का विरोध करती है और न ही विशेष स्वागत। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय में शरीयत के अनुसार केवल खुदा की इबादत होती है और इस धार्मिक मान्यता के कारण 'वंदे मातरम' का पाठ संभव नहीं है, हालाँकि वे इसका सम्मान करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार यह विधेयक राजनीतिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से लाई है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग स्वेच्छा से 'वंदे मातरम' पढ़ना चाहते हैं, उन्हें पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।
छात्र आंदोलन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
नीट परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलनों के संदर्भ में सिद्दीकी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जिस प्रकार की कार्रवाई हुई, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नैतिक जिम्मेदारी लेने और इस्तीफा देने या कम से कम देश से माफी माँगने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलन को जिस तरह दबाया गया, उससे उन्हें जलियाँवाला बाग की घटना की याद आई। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को उन्होंने अमानवीय बताया।
प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब के पोस्टर दिखाई देने के सवाल पर सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि आंदोलन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जिनका संबंध कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से हो सकता है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की।
भिवंडी हादसा और अन्य मुद्दे
ठाणे के भिवंडी में हुए इमारत हादसे पर सिद्दीकी ने गहरा दुख व्यक्त किया और सरकार से अनधिकृत निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। उन्होंने महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री पर सख्ती के फैसले का स्वागत किया और इस अभियान की अगुवाई करने वाले IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि बार-बार उनका तबादला। आगे उन्होंने पूरे देश में जंक फूड पर स्थायी प्रतिबंध और बच्चों को दूध, दही, पनीर जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की वकालत की।