पप्पू यादव को राम मंदिर चढ़ावा नाटक के बाद 'जिंदा जलाने' की धमकी, इनाम घोषित करने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया (बिहार) के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने 2 अगस्त को आरोप लगाया कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को दर्शाने वाले एक नाटक में भाग लेने के बाद उन्हें 'जिंदा जलाने' और जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर इनाम भी घोषित किया गया है।
नाटक का विवरण और विरोध
इस नाटक में पप्पू यादव ने साधु का वेश धारण किया था। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) के कई विपक्षी नेताओं ने भी इसमें भाग लिया था। नाटक के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP), विभिन्न हिंदू संगठनों और संत समाज में तीखी नाराज़गी देखी गई। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पप्पू यादव के आरोप और सवाल
पूर्णिया में पत्रकारों से बात करते हुए यादव ने BJP के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'वे चंदे के दुरुपयोग के आरोपियों से पूछताछ नहीं करेंगे और न ही चंपत राय से सवाल पूछेंगे — फिर भी मुझे निशाना बना रहे हैं। पप्पू यादव को मारकर या जलाकर उन्हें क्या मिलेगा?'
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब लखनऊ में BJP अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो में भगवान हनुमान का वेश धारण कर एक कलाकार प्रस्तुति दे रहा था, तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई। यादव ने कहा, 'क्या यह मेरी संस्कृति नहीं है? मैं संतों की आवाज़ उठाने के लिए भगवा वस्त्र पहन सकता हूँ।'
राहुल गांधी और शंकराचार्य प्रसंग
यादव ने तर्क दिया कि राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा देश के 100 करोड़ लोगों की धार्मिक आस्थाओं के साथ खड़े हैं। उन्होंने प्रयागराज में 2026 के माघ मेले के दौरान ज्योतिर्मठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी ज़िक्र किया और कहा कि उस समय किसी ने आवाज़ नहीं उठाई।
राम मंदिर चढ़ावे की जांच की माँग
यादव ने माँग की कि राम मंदिर से कथित तौर पर गायब हुए 200 किलो चाँदी और ₹3,300 करोड़ के मामले में निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि चढ़ावे के कथित दुरुपयोग के आरोपियों से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है।
आगे क्या
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब यह देखना होगा कि जाँच एजेंसियाँ इस मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं।