22 अगस्त 2026
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लकवाग्रस्त तेंदुए को 'गीर' फाउंडेशन ने दी नई ज़िंदगी: ढाई महीने के उपचार के बाद फिर चलने लगा

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लकवाग्रस्त तेंदुए को 'गीर' फाउंडेशन ने दी नई ज़िंदगी: ढाई महीने के उपचार के बाद फिर चलने लगा

सारांश

19 जनवरी 2026 को खेराचा-खोडंबा हाईवे पर हुए हादसे में रीढ़ की हड्डी टूटने से लकवाग्रस्त हुए तेंदुए को GEER फाउंडेशन की टीम ने ढाई महीने की गहन देखभाल से चलने-फिरने योग्य बना दिया — गुजरात के वन्यजीव चिकित्सा इतिहास में एक दुर्लभ उपलब्धि।

मुख्य बातें

19 जनवरी 2026 को खेराचा-खोडंबा हाईवे पर सड़क हादसे में तेंदुए की रीढ़ ( L7-S1 क्षेत्र ) में गंभीर फ्रैक्चर-सबलक्सेशन हुआ, जिससे पिछले दोनों पैर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गए।
GEER फाउंडेशन के निदेशक बी.पी.
पति (IFS) और उप निदेशक अमित नायक (IFS) की टीम ने गांधीनगर के इंद्रोड़ा नेचर पार्क में विशेष पिंजरे में गहन उपचार दिया।
तेंदुए ने 40वें दिन चारों पैरों पर खड़े होने और ढाई महीने बाद स्वाभाविक चाल से चलने की क्षमता वापस पाई।
रीढ़ की हड्डी के शेष प्रभावों के कारण उसे जंगल में वापस नहीं छोड़ा जाएगा; वह इंद्रोड़ा नेचर पार्क में स्थायी देखभाल में रहेगा।
वर्ष 2026 में GEER की वेटरनरी टीम ने वन्यजीव बचाव और पुनर्वास के 10 से अधिक मामले सफलतापूर्वक संभाले।
GEER फाउंडेशन इंद्रोड़ा नेचर पार्क में अत्याधुनिक वाइल्डलाइफ वेटरनरी हॉस्पिटल विकसित कर रहा है, जिसमें ICU, ऑपरेशन थिएटर और डिजिटल डायग्नोस्टिक सुविधाएँ होंगी।

गांधीनगर स्थित गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (GEER) फाउंडेशन की वेटरनरी टीम ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है — अरवल्ली जिले के शामलाजी के पास 19 जनवरी 2026 को सड़क हादसे में रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट से लकवाग्रस्त हुआ एक तेंदुआ, महीनों के गहन उपचार और पुनर्वास के बाद, अब स्वाभाविक चाल से चलने-फिरने में सक्षम हो गया है। वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा स्थापित यह स्वायत्त संस्थान राज्य में वन्यजीव स्वास्थ्य देखभाल का केंद्र बनकर उभरा है।

हादसा और बचाव

19 जनवरी 2026 को खेराचा-खोडंबा हाईवे पर हुए एक सड़क हादसे में यह तेंदुआ गंभीर रूप से घायल हो गया था। वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने तत्काल पहुँचकर उसे सुरक्षित बचाया और विभागीय सुविधा केंद्र पहुँचाया, जहाँ पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सा अधिकारियों ने आपातकालीन उपचार शुरू किया। 20 जनवरी को अरवल्ली वन विभाग ने GEER फाउंडेशन से संपर्क किया, जिसके बाद तेंदुए को हिम्मतनगर के राजपुर स्थित कामधेनु यूनिवर्सिटी के रेफरल सेंटर, टीचिंग वेटरनरी क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स में रेडियोग्राफिक जाँच के लिए ले जाया गया।

चोट की गंभीरता

GEER फाउंडेशन के निदेशक बी.पी. पति (IFS) ने बताया, 'तेंदुए की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसके पिछले दोनों पैर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गए थे। वह खड़ा नहीं हो पा रहा था और अपने अगले पैरों की मदद से शरीर के पिछले हिस्से को घसीटते हुए आगे बढ़ता था।' रेडियोग्राफ में L7-S1 क्षेत्र में गंभीर ट्रॉमेटिक लंबोसेक्रल फ्रैक्चर-सबलक्सेशन सामने आया, जो पिछले पैरों, पूँछ और पेल्विक क्षेत्र की तंत्रिका कार्यप्रणाली से सीधे जुड़ा होता है। इसके अतिरिक्त, निचले जबड़े में भी गंभीर चोट थी — होंठ लटक गया था, मुँह और मसूड़ों के ऊतकों को क्षति पहुँची थी और संक्रमण भी फैल गया था, जिससे शुरुआती दिनों में खाने-पीने में भारी कठिनाई होती थी।

उपचार और पुनर्वास की यात्रा

GEER फाउंडेशन के उप निदेशक अमित नायक (IFS) के अनुसार, तेंदुए को गांधीनगर के इंद्रोड़ा नेचर पार्क में लाया गया। वेटरनरी टीम ने उसके लिए एक विशेष पिंजरा डिज़ाइन किया, ताकि नियंत्रित और कम तनाव वाला माहौल मिल सके। मानवीय संपर्क न्यूनतम रखा गया और दूर से निगरानी की गई। रोज़ाना गहन उपचार के साथ-साथ शरीर की उचित स्थिति बनाए रखने, नियंत्रित पोजिशनिंग और पोषण सहायता प्रदान की गई।

नायक ने बताया कि तीन दिनों के भीतर तेंदुए ने स्वेच्छा से खाना-पानी लेना शुरू किया। पाँचवें दिन उसने सामान्य रूप से मल-मूत्र त्याग शुरू किया। एक सप्ताह में शक्ति और व्यवहार में सुधार दिखा। लगभग 20वें दिन उसने अगले पैरों की मदद से शरीर उठाना शुरू किया। 40वें दिन वह चारों पैरों पर खड़ा हो सका। 50वें दिन शरीर की मुद्रा अधिक स्वाभाविक हो गई। दो महीने बाद उसने बाड़े में चलना शुरू किया और ढाई महीने बाद उसने स्वाभाविक चाल और शरीर की सामान्य मुद्रा पुनः प्राप्त कर ली।

अब भी कुछ सीमाएँ, जंगल में छोड़ना संभव नहीं

उल्लेखनीय रूप से स्वस्थ होने के बावजूद तेंदुए में शरीर की मुद्रा में थोड़ा विचलन और पूँछ के लटके रहने की समस्या अभी भी दिखती है, जो रीढ़ की हड्डी की चोट के शेष प्रभावों को दर्शाती है। जंगल में शिकार करने, क्षेत्र की रक्षा करने और अन्य खतरों से बचने की क्षमता पर संभावित चुनौतियों को देखते हुए उसे फिर से मुक्त प्राकृतिक वातावरण में नहीं छोड़ने का निर्णय लिया गया है। फिलहाल वह इंद्रोड़ा नेचर पार्क में उचित देखभाल और निगरानी में प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप जीवन बिता रहा है।

आगे की योजना और व्यापक संदर्भ

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने GEER फाउंडेशन की टीम को इस सफल बचाव, उपचार और पुनर्वास के लिए बधाई दी। GEER फाउंडेशन इंद्रोड़ा नेचर पार्क में एक अत्याधुनिक वाइल्डलाइफ वेटरनरी हॉस्पिटल विकसित कर रहा है, जिसमें डिजिटल रेडियोग्राफी, अल्ट्रासोनोग्राफी, समर्पित ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, पैथोलॉजी लेबोरेटरी, नवजात प्राणियों के लिए केयर यूनिट, ओपीडी, रिकवरी रूम, फार्मेसी और रेफरेंस लाइब्रेरी जैसी सुविधाएँ शामिल होंगी। गौरतलब है कि वर्ष 2026 में GEER की वेटरनरी टीम ने वन्यजीवों के बचाव, उपचार और पुनर्वास के 10 से अधिक मामलों पर सफलतापूर्वक काम किया है, जो इसे राज्य की वन्यजीव आपातकालीन प्रतिक्रिया की रीढ़ बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अब तक मानव चिकित्सा के मुकाबले बेहद उपेक्षित रही है। L7-S1 फ्रैक्चर-सबलक्सेशन जैसी जटिल न्यूरोलॉजिकल चोट से उबारना किसी भी प्रजाति के लिए असाधारण है। असली सवाल यह है कि क्या गुजरात का यह मॉडल — विशेष पिंजरा, न्यूनतम मानवीय संपर्क, चरणबद्ध पुनर्वास — देश के अन्य वन विभागों के लिए एक दोहराने योग्य प्रोटोकॉल बन सकता है। सड़क हादसों में वन्यजीवों की मृत्यु दर को देखते हुए, यह एकल सफलता एक व्यापक नीतिगत बहस की माँग करती है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेंदुए को किस प्रकार की चोट आई थी और वह कितनी गंभीर थी?
19 जनवरी 2026 को खेराचा-खोडंबा हाईवे पर सड़क हादसे में तेंदुए की रीढ़ की हड्डी के L7-S1 क्षेत्र में गंभीर ट्रॉमेटिक लंबोसेक्रल फ्रैक्चर-सबलक्सेशन हुआ, जिससे उसके पिछले दोनों पैर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गए। इसके साथ ही निचले जबड़े में गंभीर चोट और संक्रमण भी था।
GEER फाउंडेशन ने तेंदुए का उपचार कैसे किया?
गांधीनगर के इंद्रोड़ा नेचर पार्क में तेंदुए के लिए विशेष पिंजरा बनाया गया, मानवीय संपर्क न्यूनतम रखा गया और दूर से निगरानी की गई। रोज़ाना गहन उपचार, नियंत्रित पोजिशनिंग, पोषण सहायता और अतिरिक्त आहार प्रदान किया गया।
तेंदुए को ठीक होने में कितना समय लगा?
तेंदुए ने लगभग 40वें दिन चारों पैरों पर खड़े होने की क्षमता वापस पाई और दुर्घटना के करीब ढाई महीने बाद स्वाभाविक चाल और शरीर की सामान्य मुद्रा पुनः प्राप्त की। तीन दिनों के भीतर ही उसने स्वेच्छा से खाना-पानी लेना शुरू कर दिया था।
क्या इस तेंदुए को जंगल में वापस छोड़ा जाएगा?
नहीं। रीढ़ की हड्डी की चोट के कुछ शेष प्रभाव — शरीर की मुद्रा में थोड़ा विचलन और पूँछ का लटकना — अभी भी दिखते हैं। जंगल में शिकार, क्षेत्र-रक्षा और खतरों से बचने की क्षमता पर संभावित सीमाओं को देखते हुए उसे इंद्रोड़ा नेचर पार्क में ही स्थायी देखभाल में रखने का निर्णय लिया गया है।
GEER फाउंडेशन वन्यजीव स्वास्थ्य के लिए आगे क्या करने की योजना बना रहा है?
GEER फाउंडेशन इंद्रोड़ा नेचर पार्क में एक अत्याधुनिक वाइल्डलाइफ वेटरनरी हॉस्पिटल विकसित कर रहा है, जिसमें डिजिटल रेडियोग्राफी, ICU, ऑपरेशन थिएटर, पैथोलॉजी लेबोरेटरी और नवजात प्राणियों के लिए केयर यूनिट जैसी सुविधाएँ होंगी। वर्ष 2026 में टीम पहले ही 10 से अधिक वन्यजीव बचाव मामले सफलतापूर्वक संभाल चुकी है।
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