बिधाननगर (साल्ट लेक) सीट पर BJP की ऐतिहासिक जीत: डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने TMC के सुजीत बोस को 37,330 वोटों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार और प्रख्यात ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने 4 मई 2026 को बिधाननगर (साल्ट लेक) विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और मंत्री सुजीत बोस को 37,330 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, डॉ. मुखर्जी को कुल 97,979 मत प्राप्त हुए — यह नतीजा पश्चिम बंगाल के शहरी राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़े उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
बिधाननगर विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 116) पर पिछले डेढ़ दशक से TMC का एकछत्र वर्चस्व था। सुजीत बोस ने 2009, 2011, 2016 और 2021 में लगातार चार बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी और 2026 में अपने पाँचवें कार्यकाल की तलाश में थे। इस बार BJP ने एक रणनीतिक निर्णय लेते हुए पेशेवर पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को मैदान में उतारा, जो TMC के अनुभवी राजनेता के सामने निर्णायक साबित हुआ।
सीट का राजनीतिक इतिहास
इस सीट का मौजूदा स्वरूप 2008 के परिसीमन के बाद 2011 में अस्तित्व में आया। इससे पहले यह क्षेत्र 'बेलगछिया पूर्व' के नाम से जाना जाता था और 1977 से 2006 तक वाम मोर्चे — विशेषकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के दिग्गज नेता सुभाष चक्रवर्ती — का यहाँ मज़बूत गढ़ था। 2009 के उपचुनाव में TMC ने पहली बार यह सीट जीती और तब से लगातार अपना कब्ज़ा बनाए रखा था। गौरतलब है कि यह सीट बारासात लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
सीट की सामाजिक-राजनीतिक विशेषताएँ
बिधाननगर सीट पश्चिम बंगाल के अन्य निर्वाचन क्षेत्रों से अलग है। साल्ट लेक जैसे उच्च शिक्षित और आर्थिक रूप से संपन्न इलाकों के साथ-साथ दत्ताबाद जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े वार्डों का मिश्रण इस सीट को जटिल बनाता है। यहाँ जातीय और धार्मिक समीकरणों की तुलना में वर्ग-आधारित राजनीति अधिक प्रभावी रही है। अनुसूचित जाति और शहरी मध्यम वर्गीय मतदाताओं की भूमिका इस सीट पर निर्णायक मानी जाती है।
BJP की रणनीति और उसका असर
BJP ने इस बार परंपरागत राजनेता की जगह एक प्रतिष्ठित चिकित्सक को प्रत्याशी बनाया। डॉ. शारद्वत मुखर्जी की पेशेवर साख और शहरी मध्यम वर्ग में विश्वसनीयता ने इस सीट पर TMC के लंबे वर्चस्व को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश में है।
आगे क्या
इस नतीजे ने TMC के लिए शहरी मध्यम वर्ग को साधने की चुनौती को और तीखा कर दिया है। बिधाननगर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर इतने बड़े अंतर से हार TMC के संगठनात्मक ढाँचे और उम्मीदवार चयन पर सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में दोनों दलों की रणनीति पर नज़र रहेगी।