बोलपुर विधानसभा 2026: चंद्रनाथ सिन्हा की चौथी जीत, दिलीप घोष को 13,188 मतों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की बोलपुर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चंद्रनाथ सिन्हा ने 2026 के विधानसभा चुनाव में चौथी बार जीत दर्ज की है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार दिलीप घोष को 13,188 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। 4 मई 2026 को घोषित हुए इस परिणाम ने बोलपुर में TMC की पकड़ को एक बार फिर पुख्ता कर दिया है।
मतगणना के प्रमुख आँकड़े
मतगणना के अनुसार, चंद्रनाथ सिन्हा को कुल 1,14,915 वोट मिले, जबकि भाजपा के दिलीप घोष को 1,01,727 वोट प्राप्त हुए। तीसरे स्थान पर ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट के बापी सोरेन रहे, जिन्हें 18,390 वोट मिले। कांग्रेस के उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहे। इस सीट पर 89 से 90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के औसत के अनुरूप बताया जा रहा है।
चंद्रनाथ सिन्हा की जीत का क्रम
चंद्रनाथ सिन्हा ने इससे पहले 2011, 2016 और 2021 में भी इसी सीट से जीत हासिल की थी। 2021 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के डॉ. अनिर्बाण गांगुली को हराया था, जबकि 2016 में उन्होंने आरएसपी के तपन होरे को पराजित किया था। यह ऐसे समय में आया है जब TMC ने पूरे राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया हुआ था।
बोलपुर सीट का राजनीतिक इतिहास
बोलपुर विधानसभा सीट का गठन 1951 में हुआ था और यह बीरभूम जिले की महत्वपूर्ण सीटों में गिनी जाती है। 1977 से 2006 तक इस सीट पर रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) का दबदबा रहा और इसे वाम मोर्चे का मजबूत गढ़ माना जाता था। तपन होरे ने 1991, 1996, 2001 और 2006 में लगातार चार बार इस सीट पर जीत दर्ज की। 2011 के बाद से TMC ने यहाँ अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया। वर्तमान परिसीमन 2006 की प्रक्रिया के बाद निर्धारित हुआ।
सीट की सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान
बोलपुर विधानसभा सीट, बोलपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यह सीट शांतिनिकेतन-बोलपुर क्षेत्र की वजह से राज्य की सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। गौरतलब है कि इस सीट पर मतदाताओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से उच्च रही है — 2011, 2016 और 2021 में भी यहाँ भारी मतदान दर्ज किया गया था।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
इस जीत के साथ TMC ने बोलपुर में अपनी निरंतरता बनाए रखी है, जबकि भाजपा के दिलीप घोष की हार इस क्षेत्र में पार्टी के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। वाम दलों की पारंपरिक पकड़ अब काफी कमज़ोर हो चुकी है और मुख्य मुकाबला TMC व BJP के बीच सिमट गया है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि विपक्षी दल इस सीट पर अपनी रणनीति किस तरह पुनर्गठित करते हैं।