पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज ट्रेन चार साल बाद बहाल, चक्की दरिया पुल पुनर्निर्माण के बाद पंजाब-हिमाचल रेल संपर्क जुड़ा
सारांश
मुख्य बातें
पठानकोट को हिमाचल प्रदेश के जोगिंदर नगर से जोड़ने वाली ऐतिहासिक नैरोगेज रेल सेवा 2 जून 2026 को चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पुनः संचालित हो गई। चक्की दरिया पर नवनिर्मित रेलवे पुल के तैयार होने के बाद यह रेल संपर्क बहाल हुआ, जिससे पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच टूटी कड़ी एक बार फिर जुड़ गई। इस सेवा के फिर से शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार दोनों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
पुल क्षतिग्रस्त होने से टूटा था संपर्क
2022 में आई भारी बारिश और बाढ़ के दौरान चक्की दरिया का तेज बहाव रेलवे पुल को बह ले गया था। पुल के क्षतिग्रस्त होते ही पठानकोट-जोगिंदर नगर रेलमार्ग पर ट्रेन संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया था। इसके बाद से यात्री सड़क मार्ग पर निर्भर थे, जिससे समय और धन दोनों अधिक व्यय होते थे।
चार वर्षों में पूरा हुआ पुनर्निर्माण
लगातार चार वर्षों के निर्माण कार्य के बाद चक्की दरिया पर नया रेलवे पुल तैयार हुआ और रेल ट्रैक को पुनः बहाल किया गया। 2 जून 2026 को ट्रेन सेवा का औपचारिक संचालन शुरू होने पर यात्रियों और स्थानीय निवासियों में उत्साह का माहौल देखा गया। यह नैरोगेज मार्ग अपने मनोरम पहाड़ी दृश्यों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पहले से ही पर्यटकों के बीच लोकप्रिय रहा है।
यात्रियों की प्रतिक्रिया
ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों ने राहत और खुशी जाहिर की। एक यात्री ने कहा, 'हम बहुत खुश हैं कि ट्रेन सेवा फिर से शुरू हो गई है। बस से सफर करना मुश्किल और असुविधाजनक था। ट्रेन का यह सफर कहीं ज्यादा बेहतर है।' उन्होंने बताया कि बस के मुकाबले ट्रेन का किराया भी काफी कम है — महज ₹25 में यात्रा संभव है। एक महिला पर्यटक ने बताया कि वे ज्वाला जी की यात्रा पर हैं और पहली बार इस ट्रेन से सफर कर रही हैं, रास्ते में हसीन वादियाँ देखने को मिलेंगी।
व्यापार और पर्यटन को उम्मीद
लोको पायलट जसपाल सिंह ने कहा कि यह ट्रेन सेवा जारी रहनी चाहिए, क्योंकि यह व्यापार को बढ़ावा देने में मदद करती है और पर्यटन को भी सहारा देती है, जिससे इस क्षेत्र के स्थानीय निवासियों और व्यवसायों, दोनों को लाभ पहुँचता है। स्थानीय व्यापारियों का भी मानना है कि रेल संपर्क बहाल होने से पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह नैरोगेज मार्ग न केवल यात्री परिवहन, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक जुड़ाव का भी प्रतीक है। रेल सेवा के नियमित और निर्बाध संचालन पर अब स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की नजरें टिकी हैं, ताकि भविष्य में किसी भी व्यवधान से बचा जा सके।