20 जुलाई 2026
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पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज ट्रेन चार साल बाद बहाल, चक्की दरिया पुल पुनर्निर्माण के बाद पंजाब-हिमाचल रेल संपर्क जुड़ा

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पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज ट्रेन चार साल बाद बहाल, चक्की दरिया पुल पुनर्निर्माण के बाद पंजाब-हिमाचल रेल संपर्क जुड़ा

सारांश

चार साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज ट्रेन 2 जून 2026 को फिर पटरी पर दौड़ी। चक्की दरिया पर नया पुल बनने से पंजाब और हिमाचल का टूटा रेल संपर्क जुड़ा — महज ₹25 किराये में पहाड़ी वादियों का सफर अब फिर संभव।

मुख्य बातें

पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज ट्रेन 2 जून 2026 को चार वर्षों के अंतराल के बाद पुनः संचालित हुई।
2022 की बाढ़ में चक्की दरिया का रेलवे पुल बह जाने से सेवा बंद हुई थी; नए पुल के निर्माण के बाद ट्रैक बहाल।
यात्रियों को अब महज ₹25 के किराये में आरामदायक पहाड़ी यात्रा का विकल्प उपलब्ध।
रेल संपर्क बहाल होने से पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच पर्यटन और व्यापार दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद।
लोको पायलट जसपाल सिंह सहित यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों ने सेवा बहाली का स्वागत किया।

पठानकोट को हिमाचल प्रदेश के जोगिंदर नगर से जोड़ने वाली ऐतिहासिक नैरोगेज रेल सेवा 2 जून 2026 को चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पुनः संचालित हो गई। चक्की दरिया पर नवनिर्मित रेलवे पुल के तैयार होने के बाद यह रेल संपर्क बहाल हुआ, जिससे पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच टूटी कड़ी एक बार फिर जुड़ गई। इस सेवा के फिर से शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार दोनों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पुल क्षतिग्रस्त होने से टूटा था संपर्क

2022 में आई भारी बारिश और बाढ़ के दौरान चक्की दरिया का तेज बहाव रेलवे पुल को बह ले गया था। पुल के क्षतिग्रस्त होते ही पठानकोट-जोगिंदर नगर रेलमार्ग पर ट्रेन संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया था। इसके बाद से यात्री सड़क मार्ग पर निर्भर थे, जिससे समय और धन दोनों अधिक व्यय होते थे।

चार वर्षों में पूरा हुआ पुनर्निर्माण

लगातार चार वर्षों के निर्माण कार्य के बाद चक्की दरिया पर नया रेलवे पुल तैयार हुआ और रेल ट्रैक को पुनः बहाल किया गया। 2 जून 2026 को ट्रेन सेवा का औपचारिक संचालन शुरू होने पर यात्रियों और स्थानीय निवासियों में उत्साह का माहौल देखा गया। यह नैरोगेज मार्ग अपने मनोरम पहाड़ी दृश्यों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पहले से ही पर्यटकों के बीच लोकप्रिय रहा है।

यात्रियों की प्रतिक्रिया

ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों ने राहत और खुशी जाहिर की। एक यात्री ने कहा, 'हम बहुत खुश हैं कि ट्रेन सेवा फिर से शुरू हो गई है। बस से सफर करना मुश्किल और असुविधाजनक था। ट्रेन का यह सफर कहीं ज्यादा बेहतर है।' उन्होंने बताया कि बस के मुकाबले ट्रेन का किराया भी काफी कम है — महज ₹25 में यात्रा संभव है। एक महिला पर्यटक ने बताया कि वे ज्वाला जी की यात्रा पर हैं और पहली बार इस ट्रेन से सफर कर रही हैं, रास्ते में हसीन वादियाँ देखने को मिलेंगी।

व्यापार और पर्यटन को उम्मीद

लोको पायलट जसपाल सिंह ने कहा कि यह ट्रेन सेवा जारी रहनी चाहिए, क्योंकि यह व्यापार को बढ़ावा देने में मदद करती है और पर्यटन को भी सहारा देती है, जिससे इस क्षेत्र के स्थानीय निवासियों और व्यवसायों, दोनों को लाभ पहुँचता है। स्थानीय व्यापारियों का भी मानना है कि रेल संपर्क बहाल होने से पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह नैरोगेज मार्ग न केवल यात्री परिवहन, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक जुड़ाव का भी प्रतीक है। रेल सेवा के नियमित और निर्बाध संचालन पर अब स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की नजरें टिकी हैं, ताकि भविष्य में किसी भी व्यवधान से बचा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि चार वर्षों की देरी क्यों हुई — जबकि यह मार्ग दो राज्यों को जोड़ता है और हजारों यात्रियों की रोजमर्रा की जरूरत है। भारत में बाढ़ से क्षतिग्रस्त रेल अवसंरचना की बहाली अक्सर अपेक्षा से कहीं अधिक समय लेती है, और पठानकोट-जोगिंदर नगर मार्ग इसका ताजा उदाहरण है। इस ऐतिहासिक नैरोगेज मार्ग की दीर्घकालिक सुरक्षा और रखरखाव के लिए एक स्पष्ट योजना के बिना, अगली बाढ़ में फिर वही स्थिति बन सकती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज ट्रेन सेवा क्यों बंद हुई थी?
2022 में भारी बारिश और बाढ़ के दौरान चक्की दरिया पर बना रेलवे पुल तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण पठानकोट-जोगिंदर नगर रेलमार्ग पर ट्रेन संचालन बंद कर दिया गया था।
पठानकोट-जोगिंदर नगर ट्रेन सेवा कब बहाल हुई?
यह सेवा 2 जून 2026 को औपचारिक रूप से बहाल की गई, जब चक्की दरिया पर चार वर्षों के निर्माण कार्य के बाद नया रेलवे पुल तैयार हुआ।
इस नैरोगेज ट्रेन का किराया कितना है?
यात्रियों के अनुसार इस ट्रेन का किराया महज ₹25 है, जो बस यात्रा की तुलना में काफी कम और किफायती है।
पठानकोट-जोगिंदर नगर नैरोगेज रेलमार्ग क्यों महत्वपूर्ण है?
यह ऐतिहासिक नैरोगेज मार्ग पंजाब के पठानकोट को हिमाचल प्रदेश के जोगिंदर नगर से जोड़ता है और अपने मनोरम पहाड़ी दृश्यों के कारण पर्यटकों में लोकप्रिय है। यह दोनों राज्यों के बीच व्यापार और यात्री परिवहन का भी अहम माध्यम है।
ट्रेन सेवा बहाल होने से किसे फायदा होगा?
स्थानीय यात्रियों को किफायती और आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा, जबकि व्यापारियों को दोनों राज्यों के बीच माल-परिवहन में सुविधा होगी। पर्यटन क्षेत्र को भी इस सेवा से नई गति मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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