पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर कांग्रेस का हमला: 'तेल कंपनियों ने ₹30 लाख करोड़ कमाए, फिर भी दाम 100 के पार'

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पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर कांग्रेस का हमला: 'तेल कंपनियों ने ₹30 लाख करोड़ कमाए, फिर भी दाम 100 के पार'

सारांश

पेट्रोल-डीजल के दाम ₹100 के करीब पहुँचने पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा। सांसद प्रमोद तिवारी ने तेल कंपनियों के ₹30 लाख करोड़ के कथित मुनाफे का हवाला देकर बढ़ोतरी को अनुचित बताया, जबकि विधायक आराधना मिश्रा ने एलपीजी किल्लत और सरकारी नाकामी पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल में ₹3 प्रति लीटर की पहली बढ़ोतरी के समय ही उन्होंने आगाह किया था कि यह 'सिर्फ ट्रेलर है।' तिवारी के अनुसार, तेल कंपनियों ने कथित तौर पर लगभग ₹30 लाख करोड़ का मुनाफा कमाया है।
कांग्रेस ने कहा कि उनकी सरकार में पेट्रोल-डीजल ₹60-70 प्रति लीटर से ऊपर नहीं गया, जबकि अब कीमतें ₹100 के करीब हैं।
विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' ने एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और शादियों में गैस न मिलने की समस्या उठाई।
बलिया और दिल्ली के आम नागरिकों ने बढ़ती कीमतों से रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित होने की बात कही।

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर 19 मई 2026 को लखनऊ में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि जब पहली बार ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, उसी दिन उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह 'सिर्फ ट्रेलर है' — और अब उनकी आशंका सही साबित हो रही है।

मुख्य आरोप और माँगें

प्रमोद तिवारी ने कहा कि तेल कंपनियों ने कथित तौर पर लगभग ₹30 लाख करोड़ का मुनाफा कमाया है, इसके बावजूद आम जनता पर कीमतों का बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस की सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम ₹60-70 प्रति लीटर से ऊपर नहीं जाने दिए, तो अब कीमतें ₹100 प्रति लीटर के करीब पहुँचने की क्या मजबूरी है। उन्होंने यह भी माँग की कि इस बात की जाँच होनी चाहिए कि कहीं पेट्रोलियम पदार्थों का निर्यात तो नहीं बढ़ाया गया।

विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' की प्रतिक्रिया

कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा कि जब तक बिजली और पेट्रोल की कीमतें आम आदमी की पहुँच में न हों, तब तक सड़कों पर सामान्य आवाजाही संभव नहीं। उन्होंने सरकार पर दूरदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि न तो समय पर नीतिगत तैयारी की गई और न ही जनता की परेशानियों को प्राथमिकता दी गई।

मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण में लोगों को 'जगह खाली करने' और 'अनावश्यक यात्रा से बचने' की चेतावनी दी गई, जिससे डर का माहौल बना। उनके अनुसार, इसके बजाय सरकार को जनता की वास्तविक दिक्कतों — जैसे एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और शादी-ब्याह में गैस न मिलने की समस्या — पर ध्यान देना चाहिए था।

आम जनता पर असर

बलिया के एक निवासी ने बताया कि कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है — गैस, डीजल और पेट्रोल, सब कुछ महंगा हो गया है। दिल्ली के एक नागरिक ने कहा कि बढ़ती कीमतें परेशान करती हैं, लेकिन आजीविका के लिए यात्रा रोकना संभव नहीं। एक अन्य नागरिक ने माना कि 'कुछ दिक्कतें हैं, लेकिन काम चल रहा है।'

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब ईंधन की कीमतें पहले से ही महँगाई की बड़ी वजह बनी हुई हैं। गौरतलब है कि पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य वैट मिलाकर कुल कर का बोझ खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होता है — यह विपक्ष के लिए लंबे समय से राजनीतिक हथियार रहा है।

आगे क्या

कांग्रेस नेताओं ने संसद और विधानसभाओं में इस मुद्दे को उठाने का संकेत दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यात की जाँच की माँग भी सामने आई है। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि ज़रूरी है — तेल कंपनियों के वास्तविक शुद्ध लाभ और सकल राजस्व में फ़र्क होता है। असली मुद्दा यह है कि पेट्रोल-डीजल पर केंद्र और राज्य दोनों का कर-बोझ दशकों से राजकोषीय निर्भरता का हिस्सा रहा है — जिसे किसी भी सरकार ने आमूल नहीं बदला। एलपीजी किल्लत का मुद्दा अधिक ठोस और सत्यापन-योग्य है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज में उचित जगह नहीं मिल रही। विपक्ष की माँग तब और विश्वसनीय होगी जब वह वैकल्पिक राजकोषीय मॉडल भी सामने रखे, न सिर्फ तुलनात्मक दाम।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी कितनी हैं और कितनी बढ़ी हैं?
रिपोर्टों के अनुसार पेट्रोल-डीजल के दाम ₹100 प्रति लीटर के करीब पहुँच गए हैं। कांग्रेस नेताओं के अनुसार इससे पहले ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी थी, जिसे उन्होंने 'ट्रेलर' बताया था।
कांग्रेस ने तेल कंपनियों पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि तेल कंपनियों ने कथित तौर पर लगभग ₹30 लाख करोड़ का मुनाफा कमाया है। उनका तर्क है कि इतने मुनाफे के बावजूद आम जनता पर कीमतों का बोझ डालना उचित नहीं है।
कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने कौन-सी समस्याएँ उठाईं?
विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' ने एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और शादियों में गैस न मिलने की समस्या उठाई। उन्होंने सरकार पर दूरदर्शिता की कमी का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण ने डर का माहौल बनाया।
आम जनता पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का क्या असर हो रहा है?
बलिया और दिल्ली के नागरिकों ने बताया कि गैस, डीजल और पेट्रोल सहित हर चीज़ महंगी हो गई है, जिससे रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है। हालाँकि कुछ नागरिकों ने कहा कि काम रोकना संभव नहीं, इसलिए मजबूरी में यात्रा जारी है।
कांग्रेस के शासन में पेट्रोल-डीजल के दाम कितने थे?
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के अनुसार, कांग्रेस की सरकार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें ₹60-70 प्रति लीटर से ऊपर नहीं जाने दी गई थीं। वर्तमान में कीमतें ₹100 के करीब पहुँचने पर उन्होंने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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