पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर कांग्रेस का हमला: 'तेल कंपनियों ने ₹30 लाख करोड़ कमाए, फिर भी दाम 100 के पार'
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर 19 मई 2026 को लखनऊ में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि जब पहली बार ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, उसी दिन उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह 'सिर्फ ट्रेलर है' — और अब उनकी आशंका सही साबित हो रही है।
मुख्य आरोप और माँगें
प्रमोद तिवारी ने कहा कि तेल कंपनियों ने कथित तौर पर लगभग ₹30 लाख करोड़ का मुनाफा कमाया है, इसके बावजूद आम जनता पर कीमतों का बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस की सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम ₹60-70 प्रति लीटर से ऊपर नहीं जाने दिए, तो अब कीमतें ₹100 प्रति लीटर के करीब पहुँचने की क्या मजबूरी है। उन्होंने यह भी माँग की कि इस बात की जाँच होनी चाहिए कि कहीं पेट्रोलियम पदार्थों का निर्यात तो नहीं बढ़ाया गया।
विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' की प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा कि जब तक बिजली और पेट्रोल की कीमतें आम आदमी की पहुँच में न हों, तब तक सड़कों पर सामान्य आवाजाही संभव नहीं। उन्होंने सरकार पर दूरदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि न तो समय पर नीतिगत तैयारी की गई और न ही जनता की परेशानियों को प्राथमिकता दी गई।
मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण में लोगों को 'जगह खाली करने' और 'अनावश्यक यात्रा से बचने' की चेतावनी दी गई, जिससे डर का माहौल बना। उनके अनुसार, इसके बजाय सरकार को जनता की वास्तविक दिक्कतों — जैसे एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और शादी-ब्याह में गैस न मिलने की समस्या — पर ध्यान देना चाहिए था।
आम जनता पर असर
बलिया के एक निवासी ने बताया कि कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है — गैस, डीजल और पेट्रोल, सब कुछ महंगा हो गया है। दिल्ली के एक नागरिक ने कहा कि बढ़ती कीमतें परेशान करती हैं, लेकिन आजीविका के लिए यात्रा रोकना संभव नहीं। एक अन्य नागरिक ने माना कि 'कुछ दिक्कतें हैं, लेकिन काम चल रहा है।'
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब ईंधन की कीमतें पहले से ही महँगाई की बड़ी वजह बनी हुई हैं। गौरतलब है कि पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य वैट मिलाकर कुल कर का बोझ खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होता है — यह विपक्ष के लिए लंबे समय से राजनीतिक हथियार रहा है।
आगे क्या
कांग्रेस नेताओं ने संसद और विधानसभाओं में इस मुद्दे को उठाने का संकेत दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यात की जाँच की माँग भी सामने आई है। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।