PM मोदी ने एक्स पर साझा किया ऋग्वेद का सुभाषित: 'दिव्य नौका से जीवन-सागर पार करें'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2026, मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें स्थिर पृथ्वी, कल्याणकारी आकाश और पापरहित जीवन-मार्ग अपनाने का संदेश दिया गया है। यह श्लोक मुख्य रूप से ऋग्वेद के 10वें मंडल के 63वें सूक्त का 10वाँ मंत्र है।
क्या है यह सुभाषित
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक है: 'सुत्रामाणं पृथिवीं द्यामनेहसं सुशर्माणमदितिं सुप्रणीतिम्। दैवीं नावं स्वरित्रामनागसो अस्रवन्तीमा रुहेमा स्वस्तये॥' इस मंत्र का हिंदी भावार्थ है कि मनुष्य उत्तम संरक्षण करने वाली, स्थिर पृथ्वी और कल्याणकारी, निर्बाध आकाशरूपी आधार का आश्रय लें। पापरहित होकर, शुभ मार्ग से ले जाने वाली, उत्तम चप्पुओं से युक्त दिव्य नौका के समान कल्याणकारी साधनों का आश्रय लेकर सुख और मंगल को प्राप्त करें।
वैदिक स्रोत और महत्त्व
यह मंत्र केवल ऋग्वेद तक सीमित नहीं है — यह अथर्ववेद और शुक्ल यजुर्वेद (अध्याय 21, मंत्र 6) में भी मिलता है। इस मंत्र के माध्यम से 'स्वस्ति-वाचन' अर्थात कल्याण की प्रार्थना की जाती है, जो भारतीय परंपरा में शुभारंभ और मंगलकामना के अवसरों पर उच्चारित किया जाता रहा है।
गौरतलब है कि यह मंत्र देवताओं की स्तुति और जीवन-यात्रा की निर्विघ्न समाप्ति के लिए प्रार्थना का माध्यम है। इसमें मानव जीवन की तुलना एक समुद्र-यात्रा से की गई है।
मंत्र का दार्शनिक संदेश
इस श्लोक में ऋषि ईश्वर या दिव्य शक्तियों से एक ऐसी सुरक्षित नौका प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं, जो जीवन रूपी सागर से पार लगा सके। यह नौका 'सुरक्षित, अविनाशी, सुन्दर पतवारों वाली और कल्याणकारी' हो, जिसमें अज्ञान या पाप का कोई छेद न हो।
इस दृष्टांत में सत्य, धर्म और सदाचार को नौका के चप्पू (पतवार) के रूप में चित्रित किया गया है, जो जीवन को सही दिशा में आगे ले जाते हैं और अंततः परम शांति, आनंद तथा मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त करते हैं।
आम जनता के लिए संदेश
ऋषियों के अनुसार, मनुष्य को स्वयं को भी पापरहित बनाना होगा, क्योंकि पवित्र मन वाला व्यक्ति ही इस दिव्य नौका — अर्थात ज्ञान, भक्ति और सत्कर्म — पर बैठने का अधिकारी होता है। ईश्वर की कृपा और श्रेष्ठ बुद्धि ही वह माध्यम है, जिससे मनुष्य बिना किसी बाधा के परम कल्याण (स्वस्ति) को प्राप्त कर सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से भारत की प्राचीन वैदिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी इस श्रृंखला में और सुभाषित साझा किए जाने की संभावना बनी रहती है।