22 सितंबर 2026
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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया ऋग्वेद का सुभाषित: 'दिव्य नौका से जीवन-सागर पार करें'

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया ऋग्वेद का सुभाषित: 'दिव्य नौका से जीवन-सागर पार करें'

सारांश

PM मोदी ने 22 सितंबर को एक्स पर ऋग्वेद का प्राचीन मंत्र साझा किया जो जीवन को समुद्र-यात्रा से उपमा देता है — और ज्ञान, भक्ति, सत्कर्म को उस दिव्य नौका के चप्पू बताता है जो इंसान को परम कल्याण की ओर ले जाती है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2026 को एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया।
यह मंत्र मुख्यतः ऋग्वेद के 10वें मंडल, 63वें सूक्त का 10वाँ मंत्र है; अथर्ववेद और शुक्ल यजुर्वेद में भी उपलब्ध है।
मंत्र में मानव जीवन की तुलना समुद्र-यात्रा से की गई है और दिव्य नौका के माध्यम से मोक्ष व परम कल्याण की प्रार्थना है।
सत्य, धर्म और सदाचार को नौका के चप्पू (पतवार) के रूप में वर्णित किया गया है।
यह मंत्र पारंपरिक स्वस्ति-वाचन — कल्याण प्रार्थना — का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2026, मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें स्थिर पृथ्वी, कल्याणकारी आकाश और पापरहित जीवन-मार्ग अपनाने का संदेश दिया गया है। यह श्लोक मुख्य रूप से ऋग्वेद के 10वें मंडल के 63वें सूक्त का 10वाँ मंत्र है।

क्या है यह सुभाषित

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक है: 'सुत्रामाणं पृथिवीं द्यामनेहसं सुशर्माणमदितिं सुप्रणीतिम्। दैवीं नावं स्वरित्रामनागसो अस्रवन्तीमा रुहेमा स्वस्तये॥' इस मंत्र का हिंदी भावार्थ है कि मनुष्य उत्तम संरक्षण करने वाली, स्थिर पृथ्वी और कल्याणकारी, निर्बाध आकाशरूपी आधार का आश्रय लें। पापरहित होकर, शुभ मार्ग से ले जाने वाली, उत्तम चप्पुओं से युक्त दिव्य नौका के समान कल्याणकारी साधनों का आश्रय लेकर सुख और मंगल को प्राप्त करें।

वैदिक स्रोत और महत्त्व

यह मंत्र केवल ऋग्वेद तक सीमित नहीं है — यह अथर्ववेद और शुक्ल यजुर्वेद (अध्याय 21, मंत्र 6) में भी मिलता है। इस मंत्र के माध्यम से 'स्वस्ति-वाचन' अर्थात कल्याण की प्रार्थना की जाती है, जो भारतीय परंपरा में शुभारंभ और मंगलकामना के अवसरों पर उच्चारित किया जाता रहा है।

गौरतलब है कि यह मंत्र देवताओं की स्तुति और जीवन-यात्रा की निर्विघ्न समाप्ति के लिए प्रार्थना का माध्यम है। इसमें मानव जीवन की तुलना एक समुद्र-यात्रा से की गई है।

मंत्र का दार्शनिक संदेश

इस श्लोक में ऋषि ईश्वर या दिव्य शक्तियों से एक ऐसी सुरक्षित नौका प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं, जो जीवन रूपी सागर से पार लगा सके। यह नौका 'सुरक्षित, अविनाशी, सुन्दर पतवारों वाली और कल्याणकारी' हो, जिसमें अज्ञान या पाप का कोई छेद न हो।

इस दृष्टांत में सत्य, धर्म और सदाचार को नौका के चप्पू (पतवार) के रूप में चित्रित किया गया है, जो जीवन को सही दिशा में आगे ले जाते हैं और अंततः परम शांति, आनंद तथा मोक्ष की ओर मार्ग प्रशस्त करते हैं।

आम जनता के लिए संदेश

ऋषियों के अनुसार, मनुष्य को स्वयं को भी पापरहित बनाना होगा, क्योंकि पवित्र मन वाला व्यक्ति ही इस दिव्य नौका — अर्थात ज्ञान, भक्ति और सत्कर्म — पर बैठने का अधिकारी होता है। ईश्वर की कृपा और श्रेष्ठ बुद्धि ही वह माध्यम है, जिससे मनुष्य बिना किसी बाधा के परम कल्याण (स्वस्ति) को प्राप्त कर सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से भारत की प्राचीन वैदिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी इस श्रृंखला में और सुभाषित साझा किए जाने की संभावना बनी रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसके ज़रिये वेदों और उपनिषदों की विरासत को डिजिटल पीढ़ी तक पहुँचाया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि 'दिव्य नौका' का रूपक — जिसमें पाप-रहित जीवन और श्रेष्ठ बुद्धि को मार्गदर्शक बताया गया है — उस वक्त सामने आया है जब देश में नैतिकता और शासन को लेकर बहस तेज़ है। हालाँकि इस प्रकार के सांस्कृतिक संदेशों की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग वर्ग अलग तरीके से करता है, इसलिए इसके व्यापक सामाजिक प्रभाव का आकलन करना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने एक्स पर कौन-सा संस्कृत सुभाषित साझा किया?
PM मोदी ने 'सुत्रामाणं पृथिवीं द्यामनेहसं सुशर्माणमदितिं सुप्रणीतिम्…' श्लोक साझा किया, जो ऋग्वेद के 10वें मंडल, 63वें सूक्त का 10वाँ मंत्र है। इसका अर्थ है कि मनुष्य स्थिर पृथ्वी और कल्याणकारी आकाश का आश्रय लेकर पापरहित दिव्य नौका के माध्यम से सुख व मंगल को प्राप्त करें।
यह मंत्र किन वैदिक ग्रंथों में मिलता है?
यह मंत्र मुख्यतः ऋग्वेद (10वाँ मंडल, 63वाँ सूक्त, 10वाँ मंत्र) में है। इसके अतिरिक्त यह अथर्ववेद और शुक्ल यजुर्वेद (अध्याय 21, मंत्र 6) में भी उपलब्ध है।
'दिव्य नौका' का इस मंत्र में क्या अर्थ है?
इस मंत्र में जीवन को एक विशाल समुद्र बताया गया है और ईश्वर से ऐसी दिव्य नौका की प्रार्थना की गई है जो सुरक्षित, पाप-रहित और सत्य-धर्म-सदाचार रूपी पतवारों से युक्त हो। यही नौका मनुष्य को परम शांति और मोक्ष तक पहुँचाती है।
'स्वस्ति-वाचन' क्या होता है?
स्वस्ति-वाचन भारतीय वैदिक परंपरा में कल्याण-प्रार्थना का एक रूप है, जो शुभ अवसरों, यज्ञों और मंगलकार्यों के आरंभ में किया जाता है। PM मोदी द्वारा साझा यह मंत्र इसी श्रेणी का है।
PM मोदी ने यह सुभाषित कब और कहाँ साझा किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2026, मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह संस्कृत सुभाषित साझा किया।
राष्ट्र प्रेस
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