पोखरण में होने जा रहा है काल्पनिक युद्ध का अभ्यास, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में वायुसेना दिखाएगी ताकत

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पोखरण में होने जा रहा है काल्पनिक युद्ध का अभ्यास, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में वायुसेना दिखाएगी ताकत

सारांश

भारतीय वायुसेना का वायु शक्ति–2026 अभ्यास 27 फरवरी को पोखरण में आयोजित होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में वायुसेना अपनी युद्ध क्षमताओं का प्रदर्शन करेगी, जिसमें 120 से अधिक विमान शामिल हैं।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना का वायु शक्ति–2026 अभ्यास 27 फरवरी को पोखरण में होगा।
इसमें 120 से अधिक विमान शामिल हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि होंगी।
तेजस विमान इस बार शामिल नहीं है।
अभ्यास में विभिन्न प्रकार के तकनीकी प्रदर्शन होंगे।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। वायु सैन्य अभ्यास ‘वायु शक्ति–2026’ का आयोजन पोखरण फील्ड एंड फायरिंग रेंज में होने जा रहा है। 27 फरवरी को सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के समक्ष भारतीय वायुसेना अपनी युद्ध क्षमताओं का प्रदर्शन करेगी।

इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के 120 से अधिक विमानों का समावेश है, जिसमें फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे कई महत्वपूर्ण उपकरण शामिल हैं। वायुसेना के अनुसार, इस अभ्यास में 77 फाइटर जेट, 43 हेलिकॉप्टर और 8 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भाग लेंगे। फाइटर जेट श्रेणी में राफेल, सुखोई-30, मिराज 2000, मिग-29 और जगुआर शामिल हैं।

हालांकि, इस बार तेजस विमान इस अभ्यास में शामिल नहीं हो रहा है। तेजस के साथ हुई एक घटना के बाद सभी तेजस एयरक्राफ्ट की गहन जांच की जा रही है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के अनुसार, तेजस में कोई गंभीर दुर्घटना नहीं हुई थी, केवल एक छोटी तकनीकी समस्या थी।

एचएएल वायुसेना के साथ मिलकर मानक संचालन प्रक्रिया के तहत इसकी जांच कर रही है। इस अभ्यास में सी-130जे, सी-295, सी-17, चेतक, एएलएच एमके-IV, एमआई-17 IV, एलसीएच ‘प्रचंड’, अपाचे, चिनूक और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) का संचालन किया जाएगा। इसके अलावा शॉर्ट रेंज लोइटरिंग म्यूनिशन, आकाश, स्पाइडर और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स भी इस अभ्यास का हिस्सा होंगे, जो विभिन्न समय पर मिशनों का संचालन करेंगे। पहली बार ‘वायु शक्ति’ अभ्यास में सी-295 द्वारा नाइट असॉल्ट लैंडिंग ड्रिल का प्रदर्शन किया जाएगा।

भारतीय वायुसेना के सभी फ्रंटलाइन फाइटर जेट विभिन्न लक्ष्यों पर निशाना साधेंगे। राफेल उच्च गति से रन और एयर डिफेंस इंटरसेप्शन के साथ मल्टीरोल मिशन में शामिल होगा, जिसमें बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) कॉम्बैट की विशेषताएं भी होंगी।

सुखोई-30 दुश्मन के काल्पनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमला करेंगे, जबकि मिराज 2000 जेट 450 किलोग्राम वजनी बमों से जमीन पर सटीक वार करेंगे। जगुआर फाइटर जेट दिन और रात में निगरानी की क्षमता दिखाएंगे। अटैक हेलीकॉप्टर ‘रुद्र’ दुश्मन के बख्तरबंद काफिले पर रॉकेट दागेंगे, जबकि ‘प्रचंड’ दुश्मन के फॉरवर्ड फ्यूल डंप को निशाना बनाएगा। पूरे प्रदर्शन के दौरान प्रिसीजन गाइडेड म्यूनिशन, लेजर गाइडेड बम, आर-73 और मीका एयर-टू-एयर मिसाइल, 450 किलोग्राम और 1000 पाउंड बम, लोइटरिंग म्यूनिशन, और आईएसआर नेटवर्क का प्रदर्शन होगा।

यह आयोजन राजस्थान के पोखरण में होगा, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव, सीडीएस, और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी उपस्थित रहेंगे।

राष्ट्रपति सुबह जैसलमेर एयरबेस पर पहुंचेंगी, वहाँ कुछ समय बिताकर पोखरण के लिए रवाना होंगी।

‘वायु शक्ति’ अभ्यास की शुरुआत 1954 में दिल्ली के तिलपत रेंज में हुई थी। इसके बाद 1989 से यह अभ्यास पोखरण में आयोजित किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि देश की सुरक्षा के लिए न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर भी एक शक्तिशाली संदेश भेजता है। राष्ट्रपति का इसमें शामिल होना और विभिन्न रक्षा अधिकारियों की उपस्थिति दर्शाता है कि हमारे रक्षा बल कितने गंभीरता से अपने कर्तव्यों को निभा रहे हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वायु शक्ति–2026 अभ्यास कब और कहाँ होगा?
वायु शक्ति–2026 अभ्यास 27 फरवरी को पोखरण फील्ड एंड फायरिंग रेंज में आयोजित होगा।
इस अभ्यास में कौन-कौन से विमान शामिल हैं?
इस अभ्यास में 120 से अधिक विमान, जिसमें राफेल, सुखोई-30, मिराज 2000, मिग-29 और जगुआर शामिल हैं।
तेजस विमान इस अभ्यास में क्यों शामिल नहीं है?
तेजस विमान के साथ हुई एक तकनीकी समस्या के कारण इसे इस अभ्यास में शामिल नहीं किया गया है।
इस अभ्यास में राष्ट्रपति का क्या महत्व है?
राष्ट्रपति का इस अभ्यास में शामिल होना इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।
वायु शक्ति अभ्यास की शुरुआत कब हुई थी?
वायु शक्ति अभ्यास की शुरुआत 1954 में दिल्ली के तिलपत रेंज में हुई थी।
राष्ट्र प्रेस
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