27 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान का जयराम रमेश को करारा जवाब: 'मैं जमीनी नेता हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं'

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धर्मेंद्र प्रधान का जयराम रमेश को करारा जवाब: 'मैं जमीनी नेता हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं'

सारांश

इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस की सहानुभूति को सीधे नकारा — 'जमीनी नेता हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं।' यह एक पंक्ति बताती है कि नीट विवाद के बाद कैबिनेट से बाहर होने के बावजूद प्रधान राजनीतिक रूप से कहीं से कमज़ोर नहीं पड़े हैं।

मुख्य बातें

धर्मेंद्र प्रधान नीट पेपर लीक विवाद के बाद इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे, जहाँ BJP-NDA सांसदों ने जोरदार स्वागत किया।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश की सहानुभूति पर प्रधान ने कड़ा जवाब दिया — 'मैं जमीनी नेता हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं।' गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधान के घर जाकर मुलाकात की; रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनके योगदान की सराहना की।
अटकलें हैं कि पार्टी प्रधान को संगठन में अहम जिम्मेदारी या आगामी विधानसभा चुनावों में अभियान की कमान सौंप सकती है।
BJP नेताओं ने इस्तीफे को राजनीतिक जवाबदेही और त्याग का प्रतीक बताया, न कि राजनीतिक पतन का।

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 28 जुलाई 2025 को नीट पेपर लीक विवाद के बाद इस्तीफा देने के बाद पहली बार संसद पहुंचे, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश द्वारा जताई गई सहानुभूति के जवाब में प्रधान ने दो-टूक कहा कि वे 'जमीनी संघर्ष करने वाले नेता' हैं।

संसद में हुई तीखी नोकझोंक

जब कांग्रेस सांसद जयराम रमेश प्रधान के पास पहुंचे और उनके इस्तीफे पर सहानुभूति जताते हुए कहा, 'ऐसा होता रहता है', तो प्रधान ने सीधे और कड़े लहजे में जवाब दिया — 'कुछ नहीं हुआ है। मैं जमीनी संघर्ष करने वाला नेता हूं। एसी रूम में बैठकर काम करने वाला एक्टिविस्ट नहीं।' राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस संक्षिप्त लेकिन तीखी बातचीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि कैबिनेट से हटने के बावजूद प्रधान राजनीतिक रूप से आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि

कथित नीट 2026 पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अन्य गड़बड़ियों को लेकर हफ्तों तक चले देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। BJP के एक सांसद ने कहा कि संभवतः यह पहला अवसर है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने बिना किसी व्यक्तिगत आरोप का सामना किए पद छोड़ा हो। अपने इस्तीफे के बयान में प्रधान ने कहा कि उन्हें हाल की घटनाओं से गहरा दुख हुआ है और उन्होंने भारत के युवाओं के हितों की रक्षा के अपने संकल्प को दोहराया।

वरिष्ठ नेताओं का समर्थन

इस्तीफे के बाद से BJP के वरिष्ठ नेता प्रधान के साथ खड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके घर जाकर मिले, जबकि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह इस्तीफा राजनीतिक जवाबदेही और राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम है, न कि उनके राजनीतिक कद में कोई गिरावट।

आगे की राजनीतिक भूमिका

ओडिशा में BJP के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक धर्मेंद्र प्रधान ने इससे पहले बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक में पार्टी के चुनावी अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने BJP के पश्चिम बंगाल अभियान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जहाँ पार्टी ने मई में राज्य में अपनी पहली सरकार बनाई। अब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी उन्हें संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है या आगामी विधानसभा चुनावों में किसी राज्य के अभियान की कमान दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बलिदान के रूप में स्थापित करती है। गौरतलब है कि नीट विवाद में व्यक्तिगत रूप से आरोपित न होने के बावजूद इस्तीफा देना एक असामान्य राजनीतिक कदम था, और पार्टी उसे 'जवाबदेही की मिसाल' के रूप में भुनाने में लगी है। असली सवाल यह है कि क्या यह जवाबदेही वास्तविक है या फिर यह एक रणनीतिक 'सॉफ्ट लैंडिंग' है जो प्रधान को बड़ी भूमिका के लिए तैयार करती है — खासकर जब पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव सामने हों।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
कथित नीट 2026 पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अन्य गड़बड़ियों को लेकर हफ्तों तक चले देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उन्हें हाल की घटनाओं से गहरा दुख हुआ है।
संसद में जयराम रमेश और धर्मेंद्र प्रधान के बीच क्या हुआ?
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रधान के इस्तीफे पर सहानुभूति जताते हुए कहा, 'ऐसा होता रहता है।' इस पर प्रधान ने कड़े लहजे में जवाब दिया — 'कुछ नहीं हुआ है। मैं जमीनी संघर्ष करने वाला नेता हूं, एसी रूम में बैठकर काम करने वाला एक्टिविस्ट नहीं।'
इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान की अगली राजनीतिक भूमिका क्या हो सकती है?
रिपोर्टों के अनुसार, BJP उन्हें संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है या आगामी विधानसभा चुनाव वाले पाँच राज्यों में से किसी एक में पार्टी के अभियान का नेतृत्व दे सकती है। प्रधान पहले बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में चुनावी अभियान संभाल चुके हैं।
BJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को किस रूप में देखा?
BJP नेताओं ने इस इस्तीफे को राजनीतिक जवाबदेही, त्याग और राष्ट्रीय हित में उठाए गए कदम के रूप में पेश किया, न कि उनके राजनीतिक कद में किसी गिरावट के रूप में। गृह मंत्री अमित शाह ने उनके घर जाकर मुलाकात की और राजनाथ सिंह ने शिक्षा में उनके योगदान की प्रशंसा की।
नीट पेपर लीक विवाद क्या है?
नीट 2026 पेपर लीक एक कथित परीक्षा घोटाला है जिसमें देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे। इस विवाद ने देशव्यापी छात्र आंदोलन को जन्म दिया और अंततः शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंचा।
राष्ट्र प्रेस
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