धर्मेंद्र प्रधान का जयराम रमेश को करारा जवाब: 'मैं जमीनी नेता हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 28 जुलाई 2025 को नीट पेपर लीक विवाद के बाद इस्तीफा देने के बाद पहली बार संसद पहुंचे, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश द्वारा जताई गई सहानुभूति के जवाब में प्रधान ने दो-टूक कहा कि वे 'जमीनी संघर्ष करने वाले नेता' हैं।
संसद में हुई तीखी नोकझोंक
जब कांग्रेस सांसद जयराम रमेश प्रधान के पास पहुंचे और उनके इस्तीफे पर सहानुभूति जताते हुए कहा, 'ऐसा होता रहता है', तो प्रधान ने सीधे और कड़े लहजे में जवाब दिया — 'कुछ नहीं हुआ है। मैं जमीनी संघर्ष करने वाला नेता हूं। एसी रूम में बैठकर काम करने वाला एक्टिविस्ट नहीं।' राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस संक्षिप्त लेकिन तीखी बातचीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि कैबिनेट से हटने के बावजूद प्रधान राजनीतिक रूप से आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
कथित नीट 2026 पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अन्य गड़बड़ियों को लेकर हफ्तों तक चले देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। BJP के एक सांसद ने कहा कि संभवतः यह पहला अवसर है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने बिना किसी व्यक्तिगत आरोप का सामना किए पद छोड़ा हो। अपने इस्तीफे के बयान में प्रधान ने कहा कि उन्हें हाल की घटनाओं से गहरा दुख हुआ है और उन्होंने भारत के युवाओं के हितों की रक्षा के अपने संकल्प को दोहराया।
वरिष्ठ नेताओं का समर्थन
इस्तीफे के बाद से BJP के वरिष्ठ नेता प्रधान के साथ खड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके घर जाकर मिले, जबकि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह इस्तीफा राजनीतिक जवाबदेही और राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम है, न कि उनके राजनीतिक कद में कोई गिरावट।
आगे की राजनीतिक भूमिका
ओडिशा में BJP के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक धर्मेंद्र प्रधान ने इससे पहले बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक में पार्टी के चुनावी अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने BJP के पश्चिम बंगाल अभियान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जहाँ पार्टी ने मई में राज्य में अपनी पहली सरकार बनाई। अब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी उन्हें संगठन में कोई अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है या आगामी विधानसभा चुनावों में किसी राज्य के अभियान की कमान दे सकती है।